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‘रमन के गोठ’ : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने की जनता से रेडियो संवाद की नई शुरूआत
 Posted on 21/09/2015
 

राज्य निर्माण के विगत लगभग 15 वर्ष में यह पहला अवसर था, जब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सरकारी परम्परा से कुछ अलग हटकर आज एक नई शुरूआत की। उन्होंने ’आकाशवाणी’ जैसे जन-संवाद के सशक्त माध्यम को अपनी सरकार के जनसम्पर्क विभाग के माध्यम से प्रदेशवासियों के व्यापक हित में अपनी संवेदनशील अभिव्यक्ति का एक प्रभावी मंच बनाया। 
आम तौर पर राज्यों के मुख्यमंत्री स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर (15 अगस्त को) आकाशवाणी और दूरदर्शन से जनता के नाम संदेश वाचन करते हैं, लेकिन डॉ. रमन सिंह देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने हर महीने के दूसरे रविवार को आकाशवाणी के जरिए जनता से नियमित रूप से जुड़ने का निर्णय लिया है। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आकाशवाणी से ‘मन की बात’ जनता से साझा करने की शुरूआत लगभग एक साल पहले कर चुके हैं और उनका यह कार्यक्रम काफी लोकप्रिय भी हो रहा है। उनसे प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी आकाशवाणी के माध्यम से जनता से जुड़ने का सिलसिला शुरू किया है। आकाशवाणी के रूप में आज रेडियो की पहुंच भारत में लगभग 99 प्रतिशत तक हो चुकी है। छत्तीसगढ़ में भी रायपुर सहित आकाशवाणी के पांच केन्द्र हैं, जिनकी पहुंच राज्य की करीब 99 प्रतिशत जनता तक है। निश्चित रूप से भारत में आकाशवाणी जनता के लिए सूचना, शिक्षा और मनोरंजन का एक उपयोगी और लोकप्रिय माध्यम है। बहुत पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने आजादी के बाद आकाशवाणी से अपने प्रथम प्रसारण में रेडियो को  एक बड़ी ताकत बताया था। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आकाशवाणी की इस शक्ति को जनता के लिए जनकल्याण की बात कहने का जो माध्यम बनाया है, उससे आज इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के इस आधुनिक युग में वास्तव में आकाशवाणी को एक नई पहचान मिली है और रेडियो का भी सम्मान बड़ा है। 
इसी कड़ी में डॉ. रमन सिंह ने आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से प्रदेश सरकार के जनसम्पर्क विभाग द्वारा आयोजित अपने नियमित मासिक कार्यक्रम ’रमन के गोठ’ की पहली प्रस्तुति में 13 सितम्बर को साक्षात्कार की शैली में जनता से अपने विचारों को साझा किया। राजधानी रायपुर से लेकर राज्य के सभी 27 जिला मुख्यालयों, 146 ब्लॉक मुख्यालयों सहित सभी शहरों, कस्बों और गांवों में लोगों ने सामूहिक रूप से बैठकर उत्साह के साथ ‘रमन के गोठ’ को सुना। युवाओं और छात्र-छात्राओं में भी रमन के गोठ को लेकर काफी उत्साह देखा गया। मुख्यमंत्री ने अपनी इसी पहली रेडियो वार्ता में पारम्परिक तीज-त्यौहारों का जिक्र करते हुए सीधे राज्य की मातृशक्ति की भावनाओं को भी अपना स्वर दिया। सुनने वालों को मुख्यमंत्री के इस उद्बोधन में अपनी माटी की सोंधी सांस्कृतिक सुगंध का भी अहसास हुआ। डॉ. सिंह ने राज्य की महतारियों और बहनों को उनके खास त्यौहार तीजा की बधाई देते हुए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता और जन-जीवन की संवेदनाओं को भी स्पर्श किया। उल्लेखनीय है कि आधुनिकता के इस प्रवाह में नई पीढ़ी के देशवासी और प्रदेशवासी अपनी धरती, अपनी माटी और अपनी संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण तीज-त्यौहारों को भूलते जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी शासन-प्रशासन से जुड़े कई अधिकारियों और कर्मचारियों को शायद यह मालूम नहीं होगा कि ’तीजा’ क्या है, जबकि यह त्यौहार यहां के लोकजीवन में गहराई से रचा-बसा है। मुख्यमंत्री ने आज ’रमन के गोठ’ की प्रथम प्रस्तुति में जब अपने उद्बोधन का एक पूरा पैराग्राफ तीजा पर्व को समर्पित किया, तब नई पीढ़ी के अधिकांश शहरी लोगों को पता चला कि तीजा क्या है। डॉ. रमन सिंह की इस पहल को कई प्रबुद्ध नागरिकों ने छत्तीसगढ़ के लिए एक नई सांस्कृतिक क्रांति का आगाज बताया। 
मुख्यमंत्री ने ’रमन के गोठ’ में माताओं और बहनों को तीजा की अग्रिम बधाई और शुभकामनाएं देते हुए छत्तीसगढ़ी भाषा में कहा - हमर राज के बहुत खास तिहार 16 सितम्बर के, आज ले तीन दिन बाद आही, जउन हमर महतारी-बहिनी मन के सबले बड़े तिहार ए। मैं तीजा के बात करथवं। अउ मोर ये विश्वास हे, के हमर महतारी बहिन म चाहे कतको उमर के हो जायं, तीजा बर, अपन मईके जाए बर, भाई अउ ददा के लेवाल आए के, साल भर अगोरा, करत रहिथे। तीजा उखर मन के, भाग अउ मंगल से जुड़े हुए, तिहार ए। ए बेरा म, मैं अपन सब्बो तिजहारिन बहिनी अउ महतारी मन ल, जउन मन, ए परब म, अपन सुहाग के रक्षा बर, निर्जला उपास करके, भगवान सो प्रार्थना करथे, अपन डहर ले मंगल कामना, अउ बधाई देवथव। अउ संगे संग, भगवान ले ये प्रार्थना घला करथव, के मोरे दाई-दीदी मन के, सुहाग अम्मर राहय। मोर महतारी बहिनी मन, सुख म नई रहिही, तव मैं कईसे सुखी रहि सकिहंव ? तीजा पर्व को लेकर मुख्यमंत्री की इन भावनाओं ने प्रदेश की माताओं और बहनों को काफी प्रभावित किया। इसी तरह डॉ. सिंह ने छत्तीसगढ़ के अनेक पारम्परिक त्यौहारों का भी जिक्र किया, जिनमें खेती का कार्य शुरू होने के पहले ’अक्ती’, फसल बोने के समय ’सवनाही’, फसल उगने के समय ’भोजली’, फसल लहलहाने के समय ’हरेली’ और खरीफ फसलों के दूसरे चरण का कार्य निंदाई-गुड़ाई पूर्ण होने पर भाद्र आमावस्या के दिन मनाए जाने वाले ’पोला’ त्यौहार की भी बड़ी आत्मीयता से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पोला का पर्व किसानों के द्वारा बैलों की पूजा करके मनाया जाता है, जो खेती के कार्यों में बैलों के सहयोग के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और प्रेम भाव अर्पित करने का प्रतीक है। बारिश की कमी के चलते राज्य में अकाल की आशंका गहरा रही है। इसका अनुचित लाभ लेकर कोई यहां के किसानों और श्रमिकों को भ्रमित न कर पाए। मुख्यमंत्री ने ’रमन के गोठ’ में इसका भी पूरा ध्यान रखा। उन्होंने किसानों और मजदूरों की हिम्मत बढ़ाते हुए उन्हें यह विश्वास दिलाया कि संभावित अकाल से किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं, क्योंकि राज्य सरकार उनके साथ है। सभी गांवों में पर्याप्त संख्या में रोजगारमूलक कार्य खोले जाएंगे। इसके लिए कार्य योजना तैयार कर ली गई है। डॉ. रमन सिंह ने किसानों से यह भी वादा किया कि वे 15 सितम्बर को मंत्रिपरिषद की बैठक लेकर सूखे और अकाल से निपटने के लिए किसानों के हित में कई फैसले लेंगे। मुख्यमंत्री ने ‘रमन के गोठ’ के प्रसारण के दो दिन के भीतर 15 सितम्बर को मंत्रिपरिषद की बैठक लेकर अपना यह वादा निभाया। उन्होंने नजरी आंकलन के आधार पर 50 पैसे से कम फसल वाली 93 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने, किसानों के लिए गंगरेल बांध से पानी छोड़ने, उन्हें सिंचाई के लिए अस्थायी विद्युत कनेक्शन तत्काल देने, दो हेक्टेयर तक किसानों को डीजल पम्प पर प्रति हेक्टेयर दो हजार रूपए तक डीजल सब्सिडी देने जरूरतमंद ग्रामीणों को मनरेगा के तहत सालाना डेढ़ सौ दिनों का रोजगार देने, जैसे कई निर्णय लिए और उन पर अमल भी शुरू हो गया। उसी दिन शाम को गंगरेल बांध से पानी छोड़ना शुरू हो गया। खेतों की प्यास बुझने लगी। यह एक अच्छा और सुखद संयोग था कि मंत्रिपरिषद की बैठक में किसानों के हित में फैसले लिए गए, ठीक उसी दिन से राज्य के कई जिलों में अच्छी बारिश भी शुरू हो गई। किसानों को बड़ी राहत मिली। 
प्रदेश की आम जनता में रमन के गोठ को लेकर अच्छी और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया मिल रही है। लोगों ने इस कार्यक्रम को हाथों हाथ लिया है, जिसकी झलक यहां प्रस्तुत है:-

प्रदेश के प्रबुद्धजनों और आम लोगों की उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया

श्री हसन खान, सेवानिवृत्त केन्द्र निदेशक आकाशवाणी रायपुर- रमन के गोठ कार्यक्रम अच्छा प्रयास है। लोगों की भलाई के लिए यह एक अच्छी शुरूआत है। इसे निरंतर जारी रखना चाहिए। फिल्म अभिनेता श्री अनुज शर्मा- यह एक अच्छी पहल है, जिससे लोगों को मुख्यमंत्री से सीधे जुड़ाव महसूस हुआ है। श्री केयूर भूषण स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व लोकसभा सांसद- ’रमन के गोठ’ बहुत ही रोचक ढंग से अच्छी शैली में प्रस्तुत की गई। इसमें मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की संस्कृति, तीज-त्यौहारों, ठेठरी-खुरमी जैसे ठेठ छत्तीसगढ़ी पकवानों को याद किया और उनका महत्व सामने रखा। तीजा पर माताओं और बहनों को बधाई दी तो अकाल से आशंकित किसानों के लिए भी राहत कार्य एवं कृषि बीमा की बात की। मुख्यमंत्री का लोगों के साथ व्यक्तिगतरूप से जुड़ाव महसूस हुआ। मुख्यमंत्री जी ने शासकीय योजनाओं को भी व्यापक रूप में प्रस्तुत किया।
    पद्मश्री सम्मानित डॉ. महादेव प्रसाद पाण्डेय, (स्वतंत्रता सेनानी) रायपुर - ’रमन के गोठ’ राज्य सरकार के जनसम्पर्क विभाग का एक सकारात्मक प्रयास है। इसमें सभी वर्गों एवं समुदाय के लोग लोकहित की भावना समाहित है। इस कार्यक्रम के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि इसके अगले प्रसारण का इंतजार रहेगा। श्री बबन प्रसाद मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार रायपुर - मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की बहुआयामी सोच का यह प्रतीक है कि आज उन्होंने जनता से सीधे संवाद का माध्यम रेडियो को चुना और यह प्रतिबद्धता जतायी कि दीन-दुखियों के लिए पूरी संवेदना के साथ प्राप्त सूचनाओं के आधार पर वे जन्मोन्मुखी और सर्वहारा वर्ग के लिए प्रयास करते रहेंगे। आसन्न सूखे से प्रभावित छत्तीसगढ़ में खरीफ फसलों को बचाने, पलायन को रोकने, धार्मिक और तार्किक प्रतिबद्धता से जोड़ते हुए उन्होंने प्रदेशवासियों को शिक्षा और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने रेडियो के माध्यम से अपनी बात रखी।
श्री रमेश नैय्यर, निदेशक छत्तीसगढ़ हिन्दी ग्रंथ अकादमी रायपुर - ’रमन के गोठ’ में बहुत सारी बातें मेरे जैसे मध्यम वर्ग के व्यक्ति के मन को छूने वाली थी, परन्तु समय और परिस्थितियों के अनुसार उनका सम्बोधन मुख्यरूप से किसानों के लिए था। उन तमाम किसानों के लिए था जो, सूखे के मंडराते संकट को लेकर आंशकित हैं। मुख्यमंत्री ने उन्हें सरकार की पूरी तत्परता और स्वयं के संकल्प के साथ आश्वस्त किया कि सरकार सूखा प्रभावित परिवारों की राहत के लिए हरसंभव प्रयत्न करेगी। एक प्रकार से उनके आश्वासन में एक संकल्प की भावना गूंज रही थी। मैं समझता हूं कि ’रमन के गोठ ’ के पहले प्रसारण में ऐसी समस्याओं पर चर्चा की गई, जो लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। श्री दानेश्वर शर्मा, (दुर्ग) पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग- रमन के गोठ ‘सुनकर बहुत अच्छा लगा। मुख्यमंत्री द्वारा प्रारंभ किया गया यह प्रयास मर्म-स्पर्शी कहा जा सकता हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता के दर्द को महसूस करने का प्रयास किया है। ‘रमन के गोठ‘  में तीज त्यौहार की बात कही गई है जिसकी आवश्यकता आज के युवा पीढ़ी़ में अपने संस्कृति और परम्परा के प्रति जागरूकता लाने जरूरी था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को आगे प्रकृति के सरंक्षण की दिशा में तथा युवाओं के स्वरोजगार के लिए मार्गदर्शन देने बात रखनी चाहिए। 
श्री श्याम लाल चतुर्वेदी (बिलासपुर) पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग- डॉ. रमन सिहं ह आम जनता के मन के बात कहिस। रमन सिंह ह आज रेडियो म मन ला छू लेने वाला बात कहिस। तिहार-बार, रोटी-पीठा अउ दुकाल के आम जनता के बात कहिस। अच्छा प्रयास हे। ’रमन के गोठ’ म जस दिन जाही तस दिन जनता के बिचार जोड़े ले ओखर नतीजा सामने आही।

श्री सुधीर सक्सेना (नई दिल्ली) वरिष्ठ पत्रकार - छत्तीसगढ़ के सी.एम. डॉ. रमन सिंह के आकाशवाणी रायपुर से प्रसारित ’रमन के गोठ’ देश के किसी भी प्रांत में प्रारंभ अपनी तरह का अभिनव व सार्थक प्रयास है। महात्मा गांधी ने कहा था कि ’’आकाशवाणी में मैं शक्ति देखता हूँ। वाणी के माध्यम से अपने सरोकारों और अभिष्ठ को व्यक्त करने की दृष्टि से कार्यक्रम उपयोगी हो सकता है’’। ’रमन के गोठ’ में मुख्यमंत्री के सम्बोधन के साथ ही अंत में दो तीन श्रोताओं के प्रश्नों का भी समावेश किया जाना चाहिए। इससे कार्यक्रम अंतर्संवादी व अधिक जनोपयोगी होगा।
डॉ. मन्नूलाल यदु (रायपुर) भाषा वैज्ञानिक और समाजसेवी - यह मुख्यमंत्री का आम जनता से जुड़ाव का अभिनव कार्यक्रम है। इसमें मुख्यमंत्री ने जनहित के अनेक मुद्दों पर बात की। उन्होंने छत्तीसगढ़ के तीज-त्यौहारों का विशेष उल्लेख करते हुए माताओं एवं बहनों को तीजा की छत्तीसगढ़ी में बधाई दी, जिसमें उनकी आत्मीयता झलकती है। यह जनसम्पर्क विभाग का अच्छा प्रयास है और इसके निरंतर बनाए रखना चाहिए। डॉ. प्रताप नारायण अग्रवाल (जगदलपुर) वरिष्ठ अधिवक्ता- मुख्यमंत्री का यह सराहनीय प्रयास है। ऐसे कार्यक्रम यदि साक्षात्कार शैली में होते हैं तो एक ओर शासन को जनता का अच्छा फीड बैक मिलेगा, वहीं इससे प्रशासकीय कार्यों में भी मजबूती आएगी।

श्री नरेन्द्र पाढ़ी (जगदलपुर) वरिष्ठ रंगकर्मी- ऐसे कार्यक्रम लगातार होते रहना चाहिए, साथ ही इसकी समय अवधि भी बढ़ायी जानी चाहिए। यह कार्यक्रम समाज के विभिन्न पहलुओं को छुआ है। इसमें साहित्य और कला जैसे विषयों को भी जोड़ना चाहिए। 
श्रीमती मोहनी ठाकुर (जगदलपुर) साहित्यकार- इस कार्यक्रम में किसानों और विद्यार्थियों के हित में अच्छी बातें बतायी गई है। ऐसे प्रयास करना चाहिए जिससे प्रदेश में खेती-किसानी उन्नत हो और किसानों की कठिनाई कम हो।
श्री आर.पी. मिश्र (दुर्ग) वरिष्ठ शिक्षाविद्- छत्तीसगढ़ प्रदेश के वासी बहुत ही सहज, सरल और स्वाभिमानी होते हैं। यहां के वासी धीर गंभीर होने के साथ ही अपनी बोली, भाषा, संस्कृति और खान-पान में सदाचार का व्यवहार रखते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह में इन सभी बातों की झलक देखने को मिलती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ के चहुमुंखी विकास के साथ ही सभी वर्गों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए कार्य कर रहे हैं। आज ‘रमन के गोठ ‘ में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की छत्तीसगढ़ प्रदेश की तरक्की के लिए ललक की झलक देखने को मिली है।

श्री संजीव तिवारी (दुर्ग) ब्लॉगर और वरिष्ठ अधिवक्ता- बने लागिस, ये ह अभिनव पहल रहिस हे। सरकार अउ और जनता के बीच संवाद के प्रयास होईसे। सरकार के उद्देश्य और योजना ला बताईस हे। हमर प्रदेश के परम्परा के बात ला कहीसेे। छत्तीसगढ़ के तीजा-त्यौहार म महिला मन ला बधाई दे के महिला मन के सम्मान करीसे। श्री बाबूलाल शर्मा (वरिष्ठ पत्रकार रायपुर) - जनता ने इस कार्यक्रम को इस रूप में लिया है कि प्रदेश के मुखिया स्वयं प्रदेश की सूखे की स्थिति पर खुद उनके सामने आकर यह सांत्वना दे रहे हैं कि आपके साथ मैं खड़ा हूं। आप किसी भी प्रकार की चिन्ता न करें। इससे जनता में उनके व उनकी सरकार के प्रति विश्वास और बढ़ा है। 
श्री अशोक बजाज संयोजक छत्तीसगढ़ रेडियो श्रोता संघ - ‘रमन के गोठ’ कार्यक्रम जनता के लिए दर्द निवारक साबित होगा।
श्री हिड़मा पोड़ियामी दंतेवाड़ा - रमन के गोठ में मुख्यमंत्री ने तीज-त्यौहारों पर अपना बधाई संदेश दिया। यह खुशी की बात है। इस तरह का संवाद मन को खुश कर देता है। किसान श्री लतेल साहू, श्री मिठाई लाल और श्री मोतीलाल साहू ग्राम मोहतरा बलौदाबाजार-भाटापारा -  मुख्यमंत्री डॉ. रमन का यह संवाद जनता से जुड़ने के लिए लाभकारी साबित होगा।  छात्र रविकुमार बालोद एवं छात्रा अंजू ध्रुर्वे कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय कवर्धा - रमन के गोठ से छत्तीसगढ़ में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी मिली। मुख्यमंत्री का प्रयास सार्थक साबित होगा।
श्री नन्दलाल यादव किसान सूरजपुर - रमन के गोठ में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से किसानों के लिए राहत भरी बातें सुनकर अच्छा लगा।
श्री भरतलाल साहू, ग्राम बुदेली जिला कोरबा - रमन के गोठ कार्यक्रम जनता से जुड़ने का अच्छा माध्यम है। श्री विजय सिन्हा अध्यक्ष नगर पालिका परिषद बेमेतरा - रमन के गोठ के द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जनता के साथ जो संवाद किया है, उसका लाभ जनता को भविष्य में और अधिक मिलेगा। श्रीमती शगीना बेगम, बिलासपुर - इस कार्यक्रम को सुनने के लिए मन में बड़ी उत्सुकता थी। रेडियो सुनते समय ऐसे लग रहा था, जैसे मुख्यमंत्री आस-पास में ही खड़े होकर भाषण दे रहे हैं। श्री रेजा बाई, बिलासपुर - रमन के गोठ बहुत अच्छा लागीस, ओखर राज में छत्तीसगढ़ ह आगे बढ़त हे, मै ह ओला चिट्ठी लिखहूॅं। 
श्रीमती पूर्णिमा देव, देवडोंगर, राजनांदगांव - मुख्यमंत्री ने इस संवाद के माध्यम से किसानों के प्रति सहानुभूति प्रकट की है। श्रीमती मालती देवी रात्रे, अध्यक्ष नगर पालिका जांजगीर चांपा - मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के तीज-त्यौहारों विशेष रूप से तीजा-पोरा और छत्तीसगढ़ी पकवानों ठेठरी-खुरमी की बात कर महिलाओं को सम्मान दिया है। श्री राजकुमार कश्यप, सरपंच ग्राम पंचायत नवागढ़ पेड़री, जिला जांजगीर चांपा- रमन के गोठ में मुख्यमंत्री से खेती-किसानी की बातें सुनकर बहुत खुशी हुई। मुख्यमंत्री खुद किसान परिवार से हैं। किसानों की भलाई के लिए उनके द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। 
श्री राजेन्द्र कुमार छात्र, लाइवलीहुड कॉलेज, जांजगीर चांपा - युवाओं के कौशल विकास के लिए शुरू किए गए रोजगार मूलक प्रशिक्षण से युवाओं की जिन्दगी संवरेगी। श्रीमती बागो बघेल और श्रीमती पद्मा कश्यप बस्तर - रमन के गोठ सुनकर कहा कि वे अपने गांवों को साफ-सुथरा बनाने के लिए स्वयं प्रयास करेंगे।
श्री पूरन चौहान और श्री मालाकार रायगढ़ - रमन के गोठ में छत्तीसगढ़ में बच्चों की शिक्षा व्यवस्था तथा गांवों को साफ-सुथरा बनाने के लिए की गयी बातें विशेष सराहनीय है। ग्रामीण- ग्राम पंचायत लोइंग, जिला रायगढ़ - रमन के गोठ सुनकर ग्राम पंचायत को खुले में शौच मुक्त बनाने का संकल्प लिया। श्रीमती कमलीन साहू, सरपंच ग्राम पंचायत धनेली धरसीवां जिला रायपुर- डॉ. रमन सिंह देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जो लोगों तक रेडियो के माध्यम से भी पंहुच रहे हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से हम अपनी बातें सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचा सकते हैं। श्रीमती प्रेमा शास्त्री, ग्राम धनेली धरसीवां जिला रायपुर - तीजा पोला की बातें सुनकर बहुत खुशी हुई। मुख्यमंत्री को हमारे सुख-दुःख की चिन्ता है। वे जनता के हित को ध्यान में रखकर योजनाएं बना रहे हैं। 
श्री राजकुमार व्यास, पार्षद, बूढ़ापारा वार्ड नगर निगम रायपुर - यह निश्चित रूप से प्रदेश की जनता के लिए अच्छा संदेश है। रेडियो के माध्यम से जनकल्याणकारी योजनाओं और महत्वपूर्ण जानकारियों को लोगों तक पहूँचाने का अच्छा प्रयास है। मुख्यमंत्री की सोच हम तक पहुचेगी। श्री आर.के. पवार, अध्यक्ष, व्यापार प्रकोष्ठ सदर बाजार मण्डल रायपुर - रमन के गोठ कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के तीज-त्यौहारों सहित बहुत सी जानकारियां रेडियो पर सुनने को मिली। श्रीमती किरण दिलीप सारथी, पार्षद शहीद हेमू कलाणी नगर पालिक निगम रायपुर - रमन के गोठ कार्यक्रम मुख्यमंत्री के साथ जनता को जोड़ने के दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। राज्य सरकार और जनता के रिश्ते में अधिक मजबूती आएगी। छत्तीसगढ़ की संस्कृति और तीज-त्यौहारों के प्रति मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का अपनापन मन को छू लिया। श्री के.पी. पाण्डेय, देवेन्द्र नगर रायपुर - प्राकृतिक आपदा के समय में सी.एम. की खेती-किसानी के प्रति चिन्ता स्पष्ट रूप से समझ आयी। 
श्री लीलाधर चन्द्राकर, पार्षद रानी दुर्गावती वार्ड, नगर निगम रायपुर एवं श्री एन.के. अग्रवाल, अध्यक्ष, ग्रीन लैण्ड रेसीडेंट्स एसोसिएशन रायपुर - मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह देश के पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने रेडियो के माध्यम से आम जनता से जुड़ने की पहल की है। श्रीमती गौरी राव, अधिवक्ता, मदर टेरेसा वार्ड रायपुर - इस कार्यक्रम से आम लोगों को सरकार के सामाजिक सरोकारों का पता चला। मुख्यमंत्री से हरेली, तीजा, पोरा जैसे छत्तीसगढ़ी त्यौहारों और ठेठरी खुरमी जैसे पकवानों की चर्चा सुनकर प्रदेश के शहरी युवा भी छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति से परिचित हुए। श्री छगन साहू, व्यवसायी राजेन्द्र नगर रायपुर - रमन के गोठ सुनकर आज किसानों को अवश्य ही बड़ा सहारा मिला होगा कि प्रदेश सरकार उनके हर सुख-दुःख में साथ है। सूखे की समस्या से जूझ रहे किसानों को सरकार हर संभव और मदद देने जा रही है। मुख्यमंत्री का संवाद आम लोगों से जुड़ा हुआ है। श्री गिरिधारी लाल साहू, कुली रेल्वे स्टेशन रायपुर - मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ की महिलाओं का उनके मायके जाने के त्यौहार तीजा की बात सुनकर बहुत खुशी हुई। छत्तीसगढ़ की संस्कृति और रीति-रिवाजों के संरक्षण की दिशा में प्रयास सराहनीय है।  
श्री उमेश कुमार ध्रुव और श्री श्रवण साहू आटो चालक रेल्वे स्टेशन रायपुर - सी.एम. ने छत्तीसगढ़ी तीज त्यौहारों और संस्कृति पर जो बातें कही वह आम लोगों को आपस में जोड़ने का काम करेगी।  श्री देवेन्द्र तिवारी पत्रकार नई दिल्ली (स्थान रेल्वे स्टेशन रायपुर-ट्रेन का इंतजार करते) - रमन के गोठ कार्यक्रम का होर्डिंग देख काफी प्रभावित हुआ। चूंकि मैं पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं इसलिए कह सकता हूं कि आकाशवाणी से प्रसारित रमन के गोठ के कार्यक्रम आम लोगों से सीधा संवाद करने, जुड़ने और उनकी समस्याओं को जानने-समझने का अच्छा माध्यम है। यह सरकार का लोगों से संवाद करने की बेहतर पहल है, जो लगातार प्रसारित होते रहना चाहिए। (क्रमांक- 2952/ स्वराज्य)