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रमन के गोठ की दूसरी कड़ी में भी माटी की सोंधी महक और राज्य के विकास की प्रतिबद्धता : मुख्यमंत्री ने ‘पितरपाख’ में प्रदेश के महान पुरखों को याद किया
 Posted on 11/10/2015
 

प्रदेशवासियों को दी शारदीय नवरात्रि, दशहरा और राज्य स्थापना दिवस की बधाई

बचपन में पिता की उंगली पकड़कर मैं भी जाता था दशहरा देखने: डॉ. रमन सिंह

 दशहरे का अनूठा स्वरूप छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में

सरगुजा इलाके में सड़क और रेल सुविधाओं के विकास की सक्रिय पहल

कांकेर जिले में पुरातत्व संरक्षण के लिए सभी जरूरी कदम

रायपुर, 11 अक्टूबर 2015   

 

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज अपनी मासिक रेडियो वार्ता ’रमन के गोठ’ की दूसरी कड़ी में प्रदेश की ढाई करोड़ जनता को सीधे सम्बोधित करते हुए लोगों की बेहतरी के लिए अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया । उनके इस प्रसारण में भी छत्तीसगढ़ की माटी की सोंधी महक महसूस की गई। डॉ. सिंह ने अल्प वर्षा से उत्पन्न अकाल की स्थिति का जिक्र करते हुए किसानों और ग्रामीणों के हित में उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी, वहीं उन्होंने छोटे व्यवसायियों की मदद के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित मुद्रा योजना का भी विवरण दिया।  
आकाशवाणी के छत्तीसगढ़ स्थित सभी केन्द्रों से प्रसारित अपने इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सहज-सरल और आत्मीय छत्तीसगढ़ी भाषा में पितर-पाख (पितृ पक्ष) को याद करते हुए संत गुरू बाबा घासीदास पंडित सुंदरलाल शर्मा शहीद गेंद सिंह, ठाकुर प्यारे लाल सिंह, खूबचंद बघेल, स्वामी आत्मानंद, गहिरागुरू और राजमोहिनी देवी जैसी महान विभूतियों के प्रति न केवल अपनी श्रद्धा प्रकट की, अपितु छत्तीसगढ़ के इन पुरखों का चरण स्पर्श करते हुए उनके प्रति हृदय से सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न शक्तिपीठों का उल्लेख करते हुए लोगों को शारदीय नवरात्रि और दशहरा  (विजयादशमी) की भी बधाई और शुभकामनाएं दी। शारदीय नवरात्र का जिक्र करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ के जन-जीवन की भावनाओं को छूने का भी प्रयास किया और अपनी भावनाओं को इन शब्दों में व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ के लोग सहज-सरल और स्वाभिमानी जीवन शैली के होते हैं तथा सहज ही वे शक्ति की पूजा के साथ अपने आपको जोड़ लेते हैं, इसलिए छत्तीसगढ़ में शक्ति पीठों की एक अनूठी श्रृंखला है, जहां शक्ति की उपासना के साथ-साथ छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के गांवों में रावणभाठा हुआ करता है, जहां पर दशहरे के दिन रावण दहन किया जाता है। डॉ. सिंह ने अपने बचपन का स्मरण करते हुए यह रोचक संस्मरण भी सुनाया कि मैं भी बचपन में अपने पिता की उंगली पकड़कर नये-नये कपड़े और जूते पहनकर रावण दहन में जरूर शामिल होता था। उन्होंने कहा कि दशहरा पर्व का ऐतिहासिक महत्व है, जो केवल धर्म और आस्था से ही बंधा हुआ नहीं है। हर व्यक्ति में शुभ-अशुभ, सही-गलत, नैतिक और अनैतिक के बीच संघर्ष हर क्षण चलते रहता है और हम जब भी अशुभ प्रवृत्तियों का दमन करते हुए अपने-आप में शुभ्रता को स्थापित करते हैं, तो वही सही मायने में रावण दहन का क्षण होता है। 

दशहरे का अनूठा स्वरूप छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में

  बस्तर दशहरे का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दशहरे का एक अनूठा स्वरूप हमारे छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में देखने को मिलता है। जगदलपुर में मनाया जाने वाला यह दुनिया की सबसे लम्बी अवधि तक चलने वाला त्यौहार है, जो लगभग 75 दिनों तक विभिन्न धार्मिक विधि विधानों के साथ मनाया जाता है।  बस्तर का दशहरा केवल धार्मिक उत्सव न होकर सामाजिक, सांस्कृतिक एकता का सुंदर ताना-बाना भी दर्शाता है। डॉ. रमन सिंह ने प्रदेशवासियों को राज्य स्थापना की पन्द्रहवीं वर्षगांठ की भी अग्रिम बधाई और शुभकामनाएं दी। 

राज्य स्थापना में अटल जी के योगदान का स्मरण
डॉ. रमन सिंह ने राज्य स्थापना में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान का स्मरण  करते हुए कहा कि वाजपेयी जी ने छत्तीसगढ़ का एक राज्य के रूप में सृजन कर हमें उपहार स्वरूप प्रदान किया था। डॉ. सिंह ने कहा कि आज से 20 दिन बाद हम अपने राज्य का स्थापना दिवस मनाएंगे, लेकिन इस बार कमजोर मानसून के कारण अकाल की परिस्थिति से जूझते हमारे किसानों की पीड़ा को ध्यान में रखकर हमने स्थापना दिवस के आयोजन में मितव्ययता बरतने का निर्णय लिया है। इस साल राज्योत्सव केवल एक दिन के लिए राजधानी रायपुर में होगा, जिसमें राज्य अलंकरण प्रदान किए जाएंगे। 

अम्बिकापुर-जशपुर सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम में शामिल

      डॉ. रमन सिंह ने आज के कार्यक्रम में रमन के गोठ की पिछली कड़ी केे बारे में श्रोताओं से प्राप्त पत्रों का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के प्रति श्रोताओं की जागरूकता की प्रशंसा करते हुए धन्यवाद दिया। उन्होंने सरगुजा जिले के अम्बिकापुर निवासी श्रोता श्री कमलेश सिंह के पत्र के उत्तर में कहा कि सरगुजा इलाके में सड़क और रेल सुविधाओं के विकास के लिए राज्य सरकार पूरी सक्रियता और तत्परता से पहल कर रही है। मध्यप्रदेश के कटनी से छत्तीसगढ़ के कोरिया और सरगुजा, जशपुर अंचल से होते हुए  राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 78 पड़ोसी राज्य झारखण्ड के गुमला तक जाएगा। जिसके उन्नयन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार केन्द्र के स्तर पर लगातार पहल कर रही है। इस मार्ग का अम्बिकापुर से जशपुर तक छत्तीसगढ़ की सरहद तक का हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम में शामिल कर लिया गया है। इसके अलावा इस मार्ग  के अम्बिकापुर से सूरजपुर जिले की सरहद  तक 32 किलोमीटर सड़क उन्नयन के लिए केन्द्र द्वारा पिछले वर्ष 2014-15 में 105 करोड़ रूपए दिए जा चुके हैं। हाल के वर्षों में विश्रामपुर से अम्बिकापुर तक रेलमार्ग बनने के बाद अम्बिकापुर से रायपुर तक रेल सेवा मिलने लगी है। अम्बिकापुर से बरूआडीह (झारखण्ड) तक नयी रेल लाईन बिछाने के लिए केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है, जिससे सरगुजा क्षेत्र में रेल सुविधाओं का विस्तार होगा। 

पुरातत्व संरक्षण में जन सहयोग भी जरूरी

मुख्यमंत्री ने कांकेर जिले के भाटापारा, (चारामा) निवासी श्री दिनेश  वर्मा के पत्र के जवाब रमन के गोठ में बताया -शासन को सर्वेक्षण से ज्ञात हुआ है कि कांकेर जिले के दुर्गम और दूरस्थ वन क्षेत्रों के, उड़कुड़ा, गाड़ागौरी, खैरखेड़ा, कुलगांव, गोटीटोला आदि स्थानों पर, गुफावासी मानव युग की शैल चित्रकारी, के प्रमाण मिले हैं। कांकेर जिले के वन क्षेत्रों में जितने भी पुरातात्विक महत्व के स्थान हैं, उनके संरक्षण और विकास के लिए संस्कृति और पुरातत्व विभाग को निर्देश दिए गए हैं। इसमें स्थानीय जनता का सहयोग भी बहुत जरूरी है। मुख्यमंत्री ने अपनी रेडियो वार्ता की दूसरी कड़ी की शुरूआत सभी लोगों को छत्तीसगढ़ी भाषा में ‘जय जोहार’ के अभिवादन करते हुए की। उन्होंने पिछले ‘रमन के गोठ’ में की गई चर्चा का लेखा-जोखा भी प्रदेशवासियों के समक्ष प्रस्तुत किया। डॉ. रमन सिंह ने कहा - अल्प वर्षा एवं सूखे की स्थिति पर पिछले समय मैंने यह कहा था, कि 15 सितम्बर को मंत्रि-मण्डल की बैठक लेकर इस संबंध में किसानों के हित में निर्णय लूंगा। मंत्रि-मण्डल में मेरी सरकार ने किसानों की स्थिति और सूखे से पड़ने वाले प्रभाव पर विस्तारपूर्वक 03 घंटे से भी अधिक अवधि तक चर्चा की। और अनेक निर्णय लिए। उन्होंने बताया कि - प्रदेश में नजरी आंकलन के आधार पर 93 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया। इन प्रभावित तहसीलों में आगामी आदेश तक राजस्व वसूली स्थगित की गई है। किसानों को डीजल पंपों के लिए 02 हेक्टेयर की दर से अधिकतम 2 हजार से 4 हजार रूपए तक का डीजल अनुदान भी दिया जा रहा है। विभिन्न प्राधिकरणों के माध्यम से 4 हजार किसानों को सिंचाई के लिए बिजली कनेक्शन देने 22 करोड़ 68 लाख रूपए मंजूर किए गए। सिंचाई पंपों के लंबित बिजली कनेक्शनों के मामलों का निराकरण करने की कार्यवाही की जा रही है। सभी पंचायतों के हर गांव में जरूरतमंद लोगों के लिए 01 क्विंटल अनाज सुरक्षित रखने का आदेश भी जारी कर दिया गया है, ताकि किसी को भी भूखा न रहना पड़े। महात्मा गांधी नरेगा के तहत् इन तहसीलों के गावों में अधिक से अधिक संख्या में रोजगारमूलक कार्य खोलने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि किसी को भी रोजगार हेतु पलायन न करना पड़े। इस बीच कुछ स्थानों पर वर्षा भी हुई है, जिससे स्थिति में थोड़ा सुधार भी हुआ हैं।

पितरपाख में पुरखों का स्मरण

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के पुरखों को  छत्तीसगढ़ी भाषा में इन शब्दों में स्मरण किया - अभी हमर ईहां पितर-पाख चलत हे। ए पाख मं हमन पितर ला सुरता करके अपन घर ओरिया में आय बर नेवता देथन, ताकि उंखर मन के आसीरवाद हमन ला मिलत राहय। तेखरे बर पितर-पाख के पहिली दिन ला पितर बैइठका कहिथे। अउ पितर मन के स्वागत मं हमन अपन घर के दुआरी अउ ओरवाती मं बड़े बिहिनिया ले छरा-छिटका देके अउ ओमा फूल चढा के अपन पुरखा मन ला नेवता देथन। उखर स्वागत-सत्कार में बरा, सोंहारी अउ बबरा बनाथन अउ होम जग देथन। काली जुअर पितर-खेदा होही। पन्द्रह दिन हमर पितर मन हमर संग रहिन अउ भरपूर आसिस देके कल बिदा हों ही। ए पुन्य के बेरा मं मैं हं, हमर छत्तीसगढ़ के ओ जम्मो पुरखा मन ला घला सुरता करत हववं। जउन मन हमर राज के नाव अउ गौरव ला बढ़ाये हांवय, जेमा सतनाम पंथ के प्रणेता सन्त बबा गुरू घासीदास, अमर बलिदानी शहीद बीर नारायण सिंह से ले के पंडित सुंदरलाल शर्मा, गेंद सिंह, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, खूबचंद बघेल, स्वामी आत्मानंद, गहिरा गुरू, राजमोहिनी देवी अउ अईसने कतको झन छत्तीसगढ़ महतारी के सपूत मन शामिल हवयं, ए जम्मो झन के मै हं पांव परत हववं। 

छत्तीसगढ़िया स्वाभिमानी और शक्ति के उपासक

मुख्यमंत्री ने शारदीय नवरात्रि के संदर्भ में छत्तीसगढ़ में शक्तिपूजा की सुदीर्घ परम्परा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा - छत्तीसगढ़ के लोग सहज जीवन जीने वाले और भोले-भाले व्यक्तित्व के धनी हैं, जिनमें स्वाभिमान कूट-कूटकर भरा होता है, और उनकी संस्कारगत् प्रवृत्ति ही उन्हें शक्तिपूजा से जोड़ती है। इसी कड़ी में मां बम्लेश्वरी, महामाया, दंतेश्वरी, झलमला की गंगा मैय्या, चंद्रहासिनी आदि शक्ति के अनेक आराधना केन्द्र प्रदेश में हैं। आगामी 13 अक्टूबर से शक्ति आराधना का पर्व ‘‘नवरात्र’’ प्रारंभ होगा। गांव-गांव में ग्रामीणों द्वारा जसगान से देवी की आराधना होगी। छत्तीसगढ़ के लोग अपनी मनोकामना की पूर्ति हेतु ज्योति और जंवारा भी स्थापित करेंगे। मैं सर्वशक्तिशाली मां से यह प्रार्थना करता हूं, कि मेरे सभी भाई-बहनों की मनोकामना वे अवश्य पूरी करें तथा हम सभी सुखी और स्वस्थ छत्तीसगढ़ महतारी की कल्पना के साथ सदैव आगे बढ़ते रहें। इसी महीने में महाअष्टमी तथा विजयादशमी का पर्व भी होगा, जिसे, हम बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में मनाते हैं। 

मुद्रा बैंक योजना का मकसद समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना

डॉ. रमन सिंह ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मुद्रा बैंक योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि इस क्रांतिकारी योजना के माध्यम से राज्य में छह महीने के भीतर लाख 60 हजार से अधिक लोगों को एक हजार 307 करोड़ रूपए का ऋण वितरित करने का लक्ष्य है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों को आसानी से ऋण मिलेगा तो इसका सीधा असर न केवल हमारे राज्य बल्कि देश के सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) पर भी पड़ेगा। इस योजना का मकसद युवा शिक्षित और प्रशिक्षित उद्यमियों की मदद करना और उन्हें विकास के पथ पर आगे बढ़ाना है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना और विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना, गरीब लोगों को छोटे-छोटे व्यवसाय से जोड़ने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अन्त्योदय दर्शन को हमने आदर्श माना है। मुख्यमंत्री ने छोटे व्यवसाय करने वालों से आग्रह किया है कि वे नजदीकी बैंकों में जाकर इस योजना का लाभ उठाएं। 

चिरायु योजना में 60 लाख बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण

डॉ. रमन सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिरायु योजना शुरू की गई है, जिसमें इस वर्ष छत्तीसगढ़ के 60 लाख स्कूली बच्चों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। चिरायु प्लस योजना के तहत अब तक 56 लाख 87 हजार स्कूली बच्चों के सेहत की जांच की जा चुकी है। उन्होंने प्रदेश में नजरी आंकलन के आधार पर सूखाग्रस्त घोषित 93 तहसीलों में किसानों और ग्रामीणों के हित में उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी। डॉ. सिंह ने बताया कि इन तहसीलों में राजस्व वसूली स्थगित कर दी गई है। किसानों को डीजल पम्पों के लिए दो हेक्टेयर पर अधिकतम दो हजार से चार हजार रूपए तक डीजल अनुदान दिया जा रहा है। सरगुजा और बस्तर सहित दो अन्य प्राधिकरणों की राशि से चार हजार किसानों को सिंचाई पम्पों के लिए बिजली का कनेक्शन देने 22 करोड़ 68 लाख रूपए मंजूर किए गए हैं। हर ग्राम पंचायत के हर गांव में जरूरतमंदों के लिए एक क्विंटल अनाज सुरक्षित रखने का आदेश भी जारी कर दिया गया है, ताकि किसी को भी भूखा न रहना पड़े। महात्मा गांधी नरेगा के तहत इन तहसीलों में अधिक से अधिक रोजगारमूलक कार्य खोलने के भी निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बीच कुछ स्थानों पर वर्षा हुई है, जिससे स्थिति में सुधार हुआ है। 
 

क्रमांक- 3359/स्वराज्य