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‘रमन के गोठ’ : आकाशवाणी से प्रसारित होने वाला विशेष कार्यक्रम : दिनांक 11 अक्टूबर, 2015, समय प्रातः 10.45 से 11.00 बजे
 Posted on 11/10/2015
 

     

उद्घोषक की ओर से: श्रोताओं नमस्कार
    ‘‘डॉ. रमन के गोठ’’ कार्यक्रम की दूसरी कड़ी के प्रसारण के अवसर पर आज हम प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ पुनः आकाशवाणी में उपस्थित हैं। इस कार्यक्रम की पहली कड़ी का प्रसारण 13 सितम्बर को हुआ था, जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री ने प्रदेश के ढाई करोड़ से अधिक प्रदेशवासियों को सीधे संबोधित कर विभिन्न पहलूओं को स्पर्श किया था। 

  • पहले प्रसारण के बाद आकाशवाणी रायपुर को, प्रदेश के दूर-दराज अंचलों से, बड़ी संख्या में श्रोताओं के पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनसे यह पता चलता है, कि आकाशवाणी के श्रोताओं और प्रदेशवासियों ने, रमन के गोठ कार्यक्रम को कितनी शिद्दत से लिया है। इन पत्रों के माध्यम से, जहां मुख्यमंत्री जी के इस अभिनव प्रयास की भूरी-भूरी सराहना की गई है, वहीं अनेक सुझावों के साथ-साथ, लोगों ने जिस क्षेत्र में वे रहते हैं, वहां की समस्याओं और जरूरतों की ओर, भी मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया है। समयाभाव के कारण इन सभी पत्रों का उल्लेख करना संभव नहीं है अतः इनमें से कुछ को चुनकर हमने इस कार्यक्रम मेें शामिल किया है।
  • ऐसा ही एक पत्र, कांकेर जिले के भाठापारा, चारामा के श्री दिनेश वर्मा से मिला है, जिसमें उन्होेंने लिखा है, कि आकाशवाणी रायपुर से रविवार को प्रसारित, ‘‘रमन के गोठ’’ कार्यक्रम सुना। आपकी बात अवसर के अनुरूप थी, जो दिल की गहराई को छू गई। गोठ में अपार शक्ति होती है। आप सरलता व सहजता से अपने गोठ कह जाते है, जो प्रभावशील होती है। साथ ही यह सुझाव भी दिया है, कि हमारे कांकेर जिले के वनांचल क्षेत्रों में पुरातन महत्व के सैकड़ों स्थल हैं, जहां आदि मानवों द्वारा निर्मित शैल चित्र व अन्य दस्तावेज प्रमाणिक तौर पर उपलब्ध हैं। उनके संरक्षण पर आप कुछ कहेंगे, तो आम जनता उन स्थलों के प्रति जागरूक होकर उनके संरक्षण पर विचार करेगी। 
  • इसी प्रकार अंबिकापुर से श्री कमलेश सिंह ने सरगुजा में रेल और सड़क सुविधाओं के विस्तार के बारे में ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग 78 के उन्नयन की जरूरत पर भी बल दिया है। 
  •  सर्वप्रथम मैं आज के कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्रीजी से यह अनुरोध करना चाहूंगा, कि वे हमारे श्रोताओं के प्राप्त इन पत्रों के संबंध में कुछ कहें।
  • मुख्यमंत्री जी द्वारा: छत्तीसगढ़ी भाषा में
  •  छत्तीसगढ़ के जम्मो भाई-बहिनी, महतारी, सियान अऊ जम्मो संगी जहुरियां मन ला, मोर जोहार। 
  • आकाशवाणी के ए विशेष कार्यक्रम मं, मैं आज दूसर बार, आप मन संग चर्चा करत हाववं। 
  • पिछले महीना के दूसर ईतवार, 13 सितम्बर के जब बात करे रेहेंवं, तेन समय मुख्य रूप से, खेती-किसानी से चर्चा शुरू करे रेहेंवं। अपन बात ल आघू बढ़ाए के पहिली, मैं हं श्रोता मन के जऊन चिट्ठी आए हे, तेखर बारे मं गोठियाना चाहत हावंवं 
  • सबसे पहले, मैं श्रोताओं को धन्यवाद देना चाहूंगा, कि उन्होंने इस कार्यक्रम को सुनकर, अपने विचारों से मुझे अवगत कराया है। मैं भाठापारा, चारामा के श्रोता श्री दिनेश वर्मा जी की इस बात के लिए प्रशंसा करता हूं, कि उन्होंन,े राज्य के धरोहरों के संरक्षण हेतु, जन-सहभागिता की आवश्यकता की बात लिखी है। मेरा समस्त राज्यवासियों से अनुरोध है, कि पुरातात्विक धरोहरों से समृद्ध हमारे राज्य में, इन धरोहरों के संरक्षण का कार्य, शासन अपने स्तर पर कर ही रहा है किन्तु आम जनता की जागरूकता और सहयोग से ही यह बेहतर संभव हो पाएगा।
  • दिनेश जी, शासन को सर्वेक्षण से ज्ञात है, कि कांकेर जिले के दुर्गम और दूरस्थ वन क्षेत्रों के, उड़कुड़ा, गाड़ागौरी, खैरखेड़ा, कुलगांव, गोटीटोला आदि स्थानों पर, गुफावासी मानव युग की चित्रकारी, के प्रमाण मिले हैं। उनके संरक्षण और विकास के लिए, राज्य सरकार के संस्कृति और पुरातत्व विभाग को हमने निर्देश दे दिए हैं। 
  • अंबिकापुर के कमलेश सिंह जी को मैं जानकारी देना चाहूंगा, कि सरगुजा इलाके में, सड़क और रेल सुविधाओं का विकास और विस्तार, हमारी प्राथमिकता में है। 
  • हाल के वर्षों में, विश्रामपुर से अंबिकापुर तक, रेलमार्ग बन चुका है। इससे अब, अंबिकापुर से रायपुर तक रेल सेवा मिलने लगी है। अंबिकापुर से बरूआडीह (झारखंड) तक, नई रेल लाईन बिछाने के संबंध में, भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है, जिससे सरगुजा क्षेत्र मे,ं रेल सुविधाओं का विस्तार होगा। 
  • राष्ट्रीय राजमार्ग 78, जो मध्यप्रदेश के कटनी से झारखंड के गुमला तक जाएगी, और जिसका एक बड़ा हिस्सा, सरगुजा संभाग से होकर गुजरेगा, उसके उन्नयन के लिए केन्द्र सरकार के स्तर पर हम लगातार पहल कर रहे हैं। 
  • यह मार्ग लगभग 353 किलोमीटर की लंबाई में छŸाीसगढ़ से गुजरेगी और इसमें से मनेन्द्रगढ़ से अम्बिकापुर तक लगभग 118 किलोमीटर का हिस्सा केन्द्र सरकार की कॉरीडोर योजना में शामिल है। 
  • साथ ही अम्बिकापुर से सूरजपुर जिले की सरहद तक 32 किलोमीटर मार्ग के उन्नयन के लिए केन्द्र सरकार से 105 करोड़ रूपए प्राप्त हुए हैं। 
  • मैं आपको यह भी बताना चाहूंगा कि, अम्बिकापुर से जशपुर जिले तक की सड़क, राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम में शामिल है। 
  • अल्प वर्षा एवं सूखे की स्थिति पर पिछले समय मैंने यह कहा था, कि 15 सितम्बर को मंत्रि-मण्डल की बैठक लेकर इस संबंध में किसानों के हित में निर्णय लूंगा। 
  • इसके बारे में आप लोगों ने समाचार पत्रों व अन्य माध्यम से जाना होगा, कि मंत्रि-मण्डल में मेरी सरकार ने किसानों की स्थिति और सूखे से पड़ने वाले प्रभाव पर विस्तारपूर्वक 03 घंटे से भी अधिक अवधि तक चर्चा की। और अनेक निर्णय लिए। 
  • प्रदेश में नजरी आंकलन के आधार पर 93 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया। इन प्रभावित तहसीलों में आगामी आदेश तक राजस्व वसूली स्थगित की गई है। 
  • किसानों को डीजल पंपों के लिए 02 हेक्टेयर की दर से अधिकतम 2 हजार से 4 हजार रूपए तक का डीजल अनुदान भी दिया जा रहा है। 
  • विभिन्न प्राधिकरणों के माध्यम से 4 हजार किसानों को सिंचाई के लिए बिजली कनेक्शन देने 22 करोड़ 68 लाख रूपए मंजूर किए गए।
  • सिंचाई पंपों के लंबित बिजली कनेक्शनों के मामलों का निराकरण करने की कार्यवाही की जा रही है। 
  • सभी पंचायतों के हर गांव में जरूरतमंद लोगों के लिए 01 क्विंटल अनाज सुरक्षित रखने का आदेश भी जारी कर दिया गया है, ताकि किसी को भी भूखा न रहना पड़े। 
  • महात्मा गांधी नरेगा के तहत् इन तहसीलों के गावों में अधिक से अधिक संख्या में रोजगारमूलक कार्य खोलने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि किसी को भी रोजगार हेतु पलायन न करना पड़े।
  • इस बीच कुछ स्थानों पर वर्षा भी हुई है, जिससे स्थिति में थोड़ा सुधार भी हुआ हैं।
  • अभी हमर ईहां पितर-पाख चलत हे। ए पाख मं हमन पितर ला सुरता करके अपन घर ओरिया में आय बर नेवता देथन, ताकि उंखर मन के आसीरवाद हमन ला मिलत राहय। 
  • तेखरे बर पितर-पाख के पहिली दिन ला पितर बैइठका कहिथे। अउ पितर मन के स्वागत मं हमन अपन घर के दुआरी अउ ओरवाती मं बड़े बिहिनिया ले छरा-छिटका देके अउ ओमा फूल चढा के अपन पुरखा मन ला नेवता देथन। उखर स्वागत-सत्कार में बरा, सोंहारी अउ बबरा बनाथन अउ होम जग देथन। 
  • काली जुअर पितर-खेदा होही। 15 दिन हमर पितर मन हमर संग रहिन अउ भरपूर आसिस देके कल बिदा हों ही। ए पुन्य के बेरा मं मैं हं, हमर छत्तीसगढ़ के ओ जम्मो पुरखा मन ला घला सुरता करत हववं। 
  • जउन मन हमर राज के नाव अउ गौरव ला बढ़ाये हांवय, जेमा सतनाम पंथ के प्रणेता सन्त बबा गुरू घासीदास, अमर बलिदानी शहीद बीर नारायण सिंह से ले के पंडित सुंदरलाल शर्मा, गेंद सिंह, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, खूबचंद बघेल, स्वामी आत्मानंद, गहिरा गुरू, राजमोहिनी देवी अउ अईसने कतको झन छत्तीसगढ़ महतारी के सपूत मन शामिल हवयं, ए जम्मो झन के मै हं पांव परत हववं। 
  • हमारे छत्तीसगढ़ में शक्तिपूजा की सुदीर्घ परम्परा है। छत्तीसगढ़ के लोग सहज जीवन जीने वाले और भोले-भाले व्यक्तित्व के धनी हैं, जिनमें स्वाभिमान कूट-कूटकर भरा होता है, और उनकी संस्कारगत् प्रवृत्ति ही उन्हें शक्तिपूजा से जोड़ती है। इसी कड़ी में मां बम्लेश्वरी, महामाया, दंतेश्वरी, झलमला की गंगा मैय्या, चंद्रहासिनी आदि शक्ति के अनेक आराधना केन्द्र प्रदेश में हैं। 13 अक्टूबर से शक्ति आराधना का पर्व ‘‘नवरात्र’’ प्रारंभ होगा। गांव-गांव में ग्रामीणों द्वारा जसगान से देवी की आराधना होगी। छत्तीसगढ़ के लोग अपनी मनोकामना की पूर्ति हेतु ज्योति और जंवारा भी स्थापित करेंगे। 
  • मैं सर्वशक्तिशाली मां से यह प्रार्थना करता हूं, कि मेरे सभी भाई-बहनों की मनोकामना वे अवश्य पूरी करें तथा हम सभी सुखी और स्वस्थ छत्तीसगढ़ महतारी की कल्पना के साथ सदैव आगे बढ़ते रहें।
  • इसी महीने में महाअष्टमी तथा विजयादशमी का पर्व भी होगा, जिसे, हम बुराई पर अच्छाई के विजय के प्रतीक के रूप में मनाते हैं। छत्तीसगढ़ में गांव-गांव में रावणभांठा होता है। जहां दशहरे के दिन रावण दहन किया जाता है। 
  • मैं भी अपने बचपन में अपने पिता की ऊंगली पकड़कर, नए-नए कपड़े और जूते पहन कर रावण दहन में जरूर शामिल होता था।
  • दशहरे का एक अनूठा स्वरूप हमारे छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में देखने को मिलता है। जगदलपुर में मनाया जाने वाला बस्तर दशहरा दुनिया की सबसे लंबी अवधि तक चलने वाला त्यौहार है। 75 दिनों तक विभिन्न धार्मिक विधि विधानों के साथ यह मनाया जाता है। 
  • इसमें पूरे बस्तर अंचल के सभी वर्गों के लोग बड़े उत्साह और उमंग के साथ माई दंतेश्वरी के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं और मिलजुल कर यह त्यौहार मनाते हैं। 
  • बस्तर का दशहरा केवल धार्मिक उत्सव न होकर सामाजिक, सांस्कृतिक एकता का सुंदर ताना-बाना भी दर्शाता है।
  • भाईयों और बहनों, इस पर्व का अपने आप में एतिहासिक महत्व है, जो धर्म और आस्था से ही बंधा हुआ नहीं है। हर व्यक्ति में शुभ-अशुभ, सही-गलत, नैतिक और अनैतिक के बीच संघर्ष हर क्षण चलता रहता है और हम जब भी अशुभ प्रवृत्तियों का दमन करते हुए अपने आप में शुभ्रता को स्थापित करते हैं, वही सही मायने में रावण दहन का क्षण होता है।
  • इस परिप्रेक्ष्य में आईये हम सब इस एतिहासिक पर्व के क्षण में अपने-अपने मन में व्याप्त आसुरी प्रवृत्तियों का नाश करने का संकल्प करते हुए सद्प्रवृत्तियों की ओर अग्रसर होने का संकल्प लें। मैं आप सभी को इस एतिहासिक दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।
  • प्रश्न -     प्रदेश वासियों के आर्थिक उन्नयन तथा जीवन-स्तर में सुधार के लिए सरकार नित नए कार्यक्रम बना रही है। क्या ऐसी कोई नई योजना के बारे में आप प्रदेश वासियों को अवगत कराना चाहेंगे?
  • उत्तर -     यह आपने बहुत अच्छा प्रश्न किया है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा अनेक नई-नई योजनाएं सामने लाई जा रही हैं, जिससे नागरिकों के जीवन स्तर में त्वरित सुधार आ सकेगा। 
  • इस दृष्टि से 25 सितम्बर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि के     अवसर पर प्रारंभ की गई ‘‘प्रधानमंत्री मुद्रा बैंक योजना’’ का उल्लेख मैं करना चाहूंगा, ताकि इसका लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिल सके। 
  • इस योजना के माध्यम से प्रदेश के सभी छोटे-मोटे व्यवसाइयों को, जो अपने खोमचे, ठेला, फल, सब्जी आदि जैसे छोटे-छोटे व्यवसाय एवं दुकान चलाने के लिए धनाभाव से जूझते थे, या जिन्हें इन कार्यों के लिए साहूकार से कर्ज लेना पड़ता था, उनके लिए रू. 50 हजार से लेकर 10 लाख तक की ऋण सुविधा कम ब्याज दर पर उपलब्ध कराने का प्रावधान है। 
  • इस क्रांतिकारी योजना के माध्यम से आने वाले 6 माह में 3 लाख 60 हजार से अधिक लोगों को एक हजार 307 करोड़ रूपए से अधिक ऋण देने का लक्ष्य रखा है। 
  • इन सुधारों के माध्यम से हजारों परिवार, जो बैंकों के दरवाजे तक जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते थे, उन्हें बिना किसी गारंटी के बैंकों से ऋण सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 
  • इस योजना का मकसद युवा, शिक्षित और प्रशिक्षित उद्यमियों को मदद कर, उन्हें विकास के पथ पर आगे बढ़ाना है।
  • जब इतनी बड़ी संख्या में लोगों को आसानी से ऋण मिलेगा, तो इसका सीधा असर न केवल हमारे राज्य बल्कि, हमारे देश के सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) पर भी पड़ेगा। 
  • समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना, विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना और गरीब लोगों को छोटे-छोटे व्यवसाय से जोड़ने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्षन को हमने आदर्श माना है। 
  • मैं आकाशवाणी के माध्यम से आज यह अपील करता हूं कि छोटे-छोटे व्यवसाय करने वाले लोग अपने नजदीकी बैंकों में जाएं और जीवन में खुशहाली लाने वाली इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
  • इसी प्रकार मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी विषय हैं, और मेरा यह मानना है कि, राज्य के बच्चों की सेहत जब तक अच्छी नहीं होगी, तब तक राज्य स्वस्थ नहीं हो सकता। 
  • इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरूआत ‘‘चिरायु योजना’’ के रूप में की है। योजना के अंतर्गत हमने प्रदेश के 146 विकासखंडों में 292 मोबाईल यूनिट दिए हैं, जो प्रत्येक विकासखंडों के चिन्हांकित स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचकर बच्चों की सेहत की जांच व तुरंत उपचार के लिए काम कर रही है। अच्छी शिक्षा के लिए, अच्छी सेहत, के मूलमंत्र के साथ शुरू की गई इस योजना के एक साल में ही हमें उत्साहजनक परिणाम मिले हैं।
  • छत्तीसगढ में इस वर्ष लगभग 60 लाख स्कूली विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की जांच व उपचार का काम चिरायु के तहत् निःशुल्क किया जा रहा है। चिरायु प्लस योजना के तहत् अब तक 56 लाख 87 हजार स्कूली बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है। 
  • इन बच्चों में प्रमुख रूप से आंखों से कमजोर, दांत संबंधी परेशानी, विटामिन-ए की कमी, त्वचा संबंधी रोग तथा कुछ बच्चों को छोटे ऑपरेशन की आवश्यकता है, जिन्हें लाभ पहुंचाया जा रहा है। चिरायु योजना के अंतर्गत ऑपरेशन योग्य पाए गए बच्चों का ऑपरेशन अगले वर्ष जून माह तक किए जाएंगे।
  • हमारे लोकप्रिय पूर्व प्रधानमंत्री माननीय श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी ने छत्तीसगढ़ का एक राज्य के रूप में सृजन कर हम छत्तीसगढ़ वासियों को एक अमूल्य उपहार दिया था, जिससे हमारे प्रदेश में विकास के एक नए दौर के शुरूआत हुई।
  • आज से बीस दिन बाद हम अपने राज्य का स्थापना दिवस मना रहे होंगे। 
  • इस बार कमजोर मानसून के कारण अकाल की परिस्थिति से जूझते हमारे किसान भाइयों की पीड़ा को ध्यान में रखकर हमने स्थापना दिवस के आयोजन में मितव्ययता बरतने का निर्णय लिया है। 
  • इस साल राज्योत्सव एक दिन के लिए ही राजधानी में आयोजित होगा, जिसमें केवल राज्य अलंकरण प्रदान किये जायेंगे।
  • राज्य की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर मैं सभी राज्य वासियों को अपनी शुभकामनाये देता हूं, और राज्य तथा राज्यवासियों की खुशहाली और समृद्धि की कामना करता हूं।