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आकाशवाणी से ’रमन के गोठ’ की तीसरी कड़ी : प्रदेश के नौनिहालों के भविष्य को लेकर मैं पूरी तरह सतर्क: डॉ. रमन सिंह
 Posted on 08/11/2015
 

स्कूली बच्चों को सुरक्षा के बिना पर्यटन पर ले जाने की प्रवृत्ति पर मुख्यमंत्री ने जताई चिंता, शिक्षकों को किया सचेत
अभिभावकों और पंचायतों को दी समझाइश

अकाल-ओला पीड़ित किसानों को राहत पहुंचाने सभी जरूरी कदम

रायपुर 08 नवम्बर, 2015

 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज आकाशवाणी से प्रसारित अपनी मासिक रेडियो वार्ता ’रमन के गोठ’ की तीसरी कड़ी में जनता को यह विश्वास दिलाया कि छत्तीसगढ़ के नौनिहालो के भविष्य को लेकर वे पूरी तरह सतर्क हैं, ताकि उन्हें उच्च स्तर की उत्कृष्ट शिक्षा मिले और वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं में सफल हो सकें। डॉ. सिंह ने कहा कि कहीं न कहीं स्कूली बच्चों के सतत और समग्र मूल्यांकन में शायद हम सफल नहीं हो पाए हैं, जिसे ध्यान में रखकर स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नाम पर प्रदेश व्यापी शिक्षा गुणवत्ता अभियान शुरू किया गया है, जिसके अच्छे परिणाम आने की संभावना हैं। 
मुख्यमंत्री की यह रेडियो वार्ता जनसम्पर्क विभाग के सहयोग से आकाशवाणी के रायपुर सहित छत्तीसगढ़ स्थित सभी आकाशवाणी केन्द्रों से मीडियम वेब और एफएम चैनल पर एक साथ प्रसारित की गई। निजी एफ.एम. रेडियो चैनलों और टेलीविजन चैनलों से भी इसका प्रसारण हुआ। मुख्यमंत्री ने हिन्दी और छत्तीसगढ़ी भाषाओं में प्रदेशवासियों को सम्बोधित करते हुए सभी लोगों को दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, कार्तिक पूर्णिमा और गुरूनानक जयंती की बधाई और शुभकामनाएं दी। डॉ. रमन सिंह ने अपने रेडियो संदेश में कुछ शिक्षकों द्वारा स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखे बिना उन्हें टेªक्टर जैसे मालवाहक वाहन में पर्यटन पर ले जाने की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता भी प्रकट की। उन्होंने इस सिलसिले में गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर विकासखण्ड में पिछले की 17 तारीख को हुई दुर्घटना का भी उल्लेख किया और गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इस हादसे को लेकर अपने रेडियो प्रसारण में कई सवाल भी उठाए।  डॉ. रमन सिंह ने कहा कि शासकीय मिडिल स्कूल ग्राम रजकठ्ठी के शिक्षक गांव के ही एक किसान के टेªक्टर को किराए में लेकर अपने स्कूल के 73 बच्चों को सोनई-रूपई माता के मंदिर के दर्शन के लिए गए थे, लेकिन दुर्भाग्यवश घाटीनुमा मार्ग पर टेªक्टर-ट्रॉली पलट जाने से उसमें सवार 05 छात्र-छात्राओं की घटना स्थल पर ही मौत हो गई और गंभीर घायल 11 छात्र-छात्राओं को इलाज के लिए रायपुर भेजा गया। 

ट्रैक्टर हादसे में स्कूली बच्चों की मौत पर मेरे मन में उठे कई सवाल

मुख्यमंत्री ने कहा - इस दुर्घटना से मेरे मन में कई प्रश्न उत्पन्न हुए। क्या इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को टेªक्टर जैसे मालवाहक में यात्रा करवाना उचित था ? क्या संबंधित शिक्षक का यह आचरण नियमानुसार था ? क्या पालकों और पंचायत को इसे रोकना नहीं था ? क्या इस प्रकार की घटनाओं को रोका नहीं जा सकता था ? मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सारे प्रश्न आज मेरे मन को आंदोलित करते रहते हैं। असमय काल के गाल में समा गए तीन बेटियों और दो बेटों के पालकों ने उन्हें सुबह-सुबह पढ़ाई के लिए स्कूल भेजा था। तब उन्हें क्या पता था कि वे उनकी अंतिम बिदाई कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इन दिवंगत बच्चों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की। डॉ. रमन सिंह ने इस दर्दनाक घटना का जिक्र करते हुए अपने रेडियो प्रसारण में शिक्षकों से कहा कि इस प्रकार के लापरवाहीपूर्ण अवैधानिक आचरण का प्रदर्शन वे न करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने जिम्मेदार स्टाफ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। पुलिस में प्रकरण भी दर्ज किया गया है, लेकिन हमें यह संकल्प लेना होगा कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। 

सूखा प्रभावित किसानों को राहत दिलाने सरकार जागरूक

डॉ. रमन सिंह ने आज की अपनी रेडियो वार्ता में एक बार फिर प्रदेश के अकाल पीड़ित और ओला पीड़ित किसानों के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट करते हुए उन्हें यकीन दिलाया कि उन्हें राहत पहुंचाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। डॉ. सिंह ने कहा - प्रदेश की 93 तहसीलों को पहले ही हमने सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। इसके अतिरिक्त नजरी आनावारी रिपोर्ट के आधार पर 17 और तहसीलों को भी सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। केन्द्रीय अध्ययन दल का भ्रमण भी सूखाग्रस्त क्षेत्रों में हो चुका है। हमारे द्वारा लगभग 4 हजार करोड़ रूपए का राहत पैकेज तैयार कर भारत सरकार से राशि की मांग की गई है। जहां तक सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानो को राहत पहुंचाने का विषय है, सरकार स्थिति के प्रति पूरी तरह जागरूक है। आगामी खरीफ फसल में सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों को बीज की कोई समस्या न हो, इसके लिए प्रभावित क्षेत्र के लगभग 22 लाख किसानों को एक क्विंटल तक धान का बीज निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे शासन पर करीब 250 से 300 करोड़ रूपये तक वित्तीय भार आयेगा। इसके साथ ही सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को ‘‘कृषक जीवन ज्योति योजना‘‘ के तहत 7500 यूनिट मुफ्त बिजली के स्थान पर 9000 यूनिट बिजली निःशुल्क दी जाएगी। यानी उन्हें 1500 यूनिट अतिरिक्त बिजली मुफ्त दी जाएगी। प्रत्येक सूखा प्रभावित किसान को कुल मिलाकर लगभग 30 हजार रूपये की बिजली निःशुल्क मिलेगी। लगभग चार लाख सिंचाई पम्पधारक किसानों को यह लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा - सूखा प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार के अभाव में पलायन की स्थिति न हो, इस उद्देश्य से अतिरिक्त रोजगाार के अवसर भी उपलब्ध कराये जा रहे है, जिसमें मनरेगा के तहत 100 दिन के स्थान पर 150 दिन का रोजगार दिया जाएगा।

ओला प्रभावितों को मिलेगा उचित मुआवजा

उन्होंने कहा-सरगुजा इलाके में ओलावृष्टि के कारण फसलों की क्षति होने की सूचना भी प्राप्त हुई है। ऐसे प्रभावित किसानों को आर.बी.सी. 6-4 के प्रावधानों के तहत उचित मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए मैनें अधिकारियों को निर्देशित कर दिया है।

ढाई माह तक होगी धान खरीदी

 उन्होंने धान खरीदी की व्यवस्था की भी जानकारी दी और कहा कि प्रदेश के किसानों को धान के एक-एक दाने का समर्थन मूल्य प्राप्त हो, इसके लिए हमने चौकस व्यवस्था की है। चालू खरीफ विपणन वर्ष 2015-16 में धान खरीदी 16 नवम्बर 2015 से 31 जनवरी 2016 तक (लगभग ढाई माह तक) की जाएगी। यह खरीदी सहकारी समितियों के एक हजार 976 केन्द्रों में नगद और लिंकिंग में होगी। उन्होंने श्रोताओं को बताया कि धान खरीदी के लिए एक सितम्बर से 15 अक्टूबर 2015 तक किसानों का पंजीयन किया जा चुका है। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष 71 हजार ज्यादा किसान पंजीकृत हुए हैं। उन्हें मिलाकर कुल 13 लाख 23 हजार किसानों का पंजीयन किया गया है। मुख्यमंत्री ने किसानों से धान साफ और सूखाकर खरीदी केन्द्रों में लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस वर्ष कॉमन धान के लिए समर्थन मूल्य 1410 रूपए प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान के लिए 1450 रूपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। किसानों से धान खरीदी उनकी ऋण पुस्तिकाओं के आधार पर की जाएगी। धान की राशि का भुगतान किसानों के खाते में ऑनलाईन किया जाएगा। धान उपार्जन की समस्त कार्रवाई कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था के माध्यम से की जाएगी। खरीदी की अधिकतम सीमा प्रति एकड़ 15 क्विंटल निर्धारित की गई है। 

ग्रामीण स्कूलों में कला-संगीत शिक्षक के रूप में 
लोक-कलाकारों की नियुक्ति का सुझाव सराहनीय

डॉ. रमन सिंह ने अपनी मासिक रेडियो वार्ता को लेकर प्रदेशवासियों से मिल रही उत्साहजनक प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए उन्हें धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा - श्रोताओं ! मैं आप सभी को धन्यवाद देता हूं कि मेरे इस कार्यक्रम को सुनकर आपने मुझे अपने विचारों से अवगत कराया और कार्यक्रम को अधिक उपयोगी बनाने के लिए कई सुझाव भी दिए। गंडई-पंडरिया (जिला राजनांदगांव) के डॉ. पी.सी. लाल यादव ने मुख्यमंत्री को लोक-कला के प्रति ग्रामीण बच्चों के अनुराग को देखते हुए प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में कला और संगीत शिक्षक के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों के पराम्परागत लोक कलाकारों की नियुक्ति का सुझाव दिया था । मुख्यमंत्री ने उनके इस सुझाव की प्रशंसा की। डॉ. यादव ने लिखा था कि इससे जहां हमारी लोक-कला, संस्कृति और साहित्य का संरक्षण और संवर्धन होगा, सम्बल मिलेगा, वहीं ग्रामीण बच्चों की प्रतिभा भी परिष्कृत होगी। ग्राम तुमड़ीकसा, तहसील अम्बागढ़ चौकी, जिला राजनांदगांव के श्री रमेश आचला ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री को सुझाव दिया है कि राज्य के वन क्षेत्रों में गोंड़ी भाषा की बहुतायत को देखते हुए ’रमन के गोठ’ का प्रसारण गोंड़ी भाषा में भी किया जाए। धमतरी जिले के ग्राम मेघा, तहसील मगरलोड निवासी श्री दुर्गेश शर्मा ने ’रमन के गोठ’ कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए डॉ. सिंह को लिखा-इस कार्यक्रम के जरिए आपने मुख्यमंत्री पद की परिभाषा ही बदलने की कोशिश की है। पहले सरकार और जनता में दूरियां अधिक थी, जिसे आपने दूर कर दिया है।  

जन शिकायतों पर होगी उचित कार्रवाई

ग्राम थानाबोड़ी, जिला कांकेर के श्री दामेश्वर सिन्हा ने अपने गांव में पक्के शौचालय ठीक से नहीं बनने और मनरेगा की मजदूरी लंबित होने की जानकारी दी, वहीं चरौदा जिला दुर्ग की सुश्री लक्ष्मी ठाकुर ने अपने पति की विकलांगता के कारण उन्हें फौज की नौकरी से हटा दिए जाने की जानकारी देकर बताया कि आजीविका के अभाव में बच्चों की पढ़ाई आगे नहीं हो पा रही है। सुश्री लक्ष्मी ने कहा कि उन्हें मदद की जरूरत है। ग्राम टेडेसरा, जिला राजनांदगांव के श्री जलेश्वर ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में बताया कि टेडेसर स्थित कारखानों में मजदूरों को कम भुगतान कर उनका शोषण किया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे इन श्रोताओं के पत्रों को जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित कलेक्टरों को भेजेंगे और परीक्षण के बाद जो भी उचित कार्रवाई संभव होगी जरूर की जाएगी। 

शिक्षा गुणवत्ता अभियान को लोगों ने पसंद किया

मुख्यमंत्री को ’रमन के गोठ’ में यह भी सुझाव मिला है कि यद्यपि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम स्मृति शिक्षा गुणवत्ता अभियान से शिक्षा के स्तर में वृद्धि होगी, फिर भी कक्षा आठवीं तक बच्चों को उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता समाप्त की जाए। मुख्यमंत्री ने इस सुझाव पर कहा- मुझे खुशी है कि स्कूली बच्चों की शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिए प्रदेश के लोगों ने शिक्षा गुणवत्ता अभियान को पसंद किया है और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए परीक्षा प्रणाली को पुनः स्थापित करने का सुझाव प्राप्त हुआ है। उन्होंने इस संबंध में श्रोताओं के समक्ष वस्तुस्थिति को साझा करते हुए कहा- शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009, जो कि 01 अप्रेल, 2010 से छŸाीसगढ़ राज्य में प्रभावशील है, इसके अंतर्गत 6 से 14 वर्ष के समस्त बच्चों को शिक्षा दिया जाना अनिवार्य करते हुए इसका दायित्व राज्य सरकार को सौंपा गया था। अधिनियम के अंतर्गत यह प्रावधान है कि कक्षा पहली से आठवीं तक कोई भी बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं होगी तथा बच्चों में निर्धारित योग्यता हासिल करने हेतु सतत् एवं समग्र मूल्यांकन का प्रावधान रखा गया था, इससे 5वीं तथा 8वीं बोर्ड की परीक्षाएं समाप्त हो गईं हैं। कक्षा 1ली से 8वीं तक के बच्चों को अगली कक्षा में प्रवेशित किए जाने हेतु रोक नहीं होगी, व मात्र 9वीं से 12वीं तक की स्थानीय एवं बोर्ड परीक्षाएं सम्पन्न होती हैं। बच्चों में अनुŸाीर्ण होने का भय समाप्त हो, ताकि उनमें निराशा की स्थिति उत्पन्न होने के कारण ऐसे बच्चे अनुŸाीर्ण होने से बीच सत्र में पढ़ाई न छोड़ दें, इस उद्देश्य से यह व्यवस्था की गई थी। लेकिन कहीं न कहीं सतत् एवं समग्र मूल्यांकन करने में शायद हम सफल नहीं हो पाए हैं, जिसे ध्यान में रखकर हमने शिक्षा गुणवŸाा अभियान प्रारंभ किया है, और उसके अच्छे परिणाम आने की संभावना है। मैं नौनिहालों के भविष्य को लेकर पूर्णतः सतर्क हूं, ताकि उन्हें उच्च स्तर की उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त हो और वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में सफल हो सकें। 


क्रमांक-3875/स्वराज्य