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‘रमन के गोठ’ : आकाशवाणी से प्रसारित होने वाला विशेष कार्यक्रम (दिनांक 13 दिसम्बर, 2015, समय प्रातः 10.45 से 11.00 बजे तक)
 Posted on 13/12/2015
 

श्रोताओं नमस्कार! 

(उद्घोषक की ओर से)

रमन के गोठ कार्यक्रम की चौथी कड़ी के प्रसारण के अवसर पर आज एक बार फिर हम राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ आकाशवाणी के स्टुडियो में उपस्थित हैं। 

  •    यह अत्यंत हर्ष की बात है कि इस कार्यक्रम को पूरे प्रदेश में भरपूर प्रतिसाद मिल रहा है और सभी जिलों से बड़ी संख्या में श्रोताओं के पत्र प्राप्त हुए हैं। इन पत्रों को पढ़ने से यह तथ्य सामने आया है कि श्रोताओं ने जहां अपने पत्रों में बड़ी संख्या में विभिन्न विभागों की योजनाओं और नीतियों के क्रियान्वयन के संबंध में अपने सुझाव और साथ ही व्यक्तिगत कठिनाई और समस्याओं के निराकरण करने बाबत् अनुरोध किया है। वहीं दूसरी ओर इन पत्रों के माध्यम से डॉ. रमन सिंह को महत्वपूर्ण रचनात्मक सुझाव भी प्रेषित किए हैं। जिससे यह स्पष्ट पता चलता है कि प्रदेश की जनता का “रमन के गोठ” कार्यक्रम में गहरी सहभागिता हो गई है। 
  •  सभी पत्रों एवं सुझावों का उल्लेख करना यहां संभव नहीं है। लेकिन आप सब यह जाने कि सभी पत्रों पर यथोचित कार्यवाही जरूर होगी।  
  •    बड़ी संख्या में श्रोताओं ने अपने व्यक्तिगत समस्याओं पर ध्यान आकृष्ट करने के साथ-साथ “रमन के गोठ” कार्यक्रम की सराहना भी की है, और कहा है, कि वास्तव में मुख्यमंत्री जी ने इस कार्यक्रम की शुरूआत करके जन-जन तक पहुँचने का सफल प्रयास करते हुए जनसामान्य को शासन की विभिन्न नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन से सीधे जोड़ने में सफल हुए हैं।
  •   तो आईये, श्रोताओं हम सभी सुनें डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री जी को जिन्हें सुनने के लिए आप प्रतीक्षा कर रहे हैं। ताकि अधिक से अधिक समय हम उन्हें दे सकें।

मुख्यमंत्री जी द्वारा-छत्तीसगढ़ी भाषा में

  •    छत्तीसगढ़  के मोर जम्मो भाई-बहिनी, सियान अऊ संगी जहुंरिया मन ला, मोर। “रमन के गोठ” कार्यक्रम म, आज मैं, हां चौथईया बार आप संग चर्चा करे बर, आए हंव। एखर पहिली, पिछले महीना आपसे चर्चा होए रहिसे, तेमा अब्बड़ अकन सुख-दुख ला, हमन गोठियाए रेहेन।
  •    काल मोर जम्मो कार्यकाल के 12 साल पूरा होइसे, ये आप सबके कृपा की वजह से आषीर्वाद की वजह से 12 साल के कार्यकाल में जतका आप सबके बेहतरी के लिए योजना बना सकत रहेंव,ओ योजना के क्रियान्वयन होथे, अउ आने वाले तीन साल में अउ मोर कोषिष होही की बेहतर तरीके से आप सबके सेवा करवं।
  •   आज मैं हं, बहुत बड़ संख्या में, मोर गोठ सुनईया मन के, जऊन चिट्ठी आए हे, तेखर चर्चा ल पहिली करिहौं।
  •    मैं एहू बताना चाहूं, कि सब्बो चिट्ठी ला, मैं हं पढ़े हावंव। समय के कमी के कारण, एक-एक चिट्ठी के चर्चा करना संभव नई हे। लेकिन अतका जरूर कहूं, कि सब्बो चिट्ठी मं, नियम प्रावधान के अनुसार, जऊन भी कार्यवाही संभव हे, ओहा जरूर होही, तेखरे सेती, कोनो भी चिट्ठी लिखईया मन ला, ओखर नाव के उल्लेख मै हं नई करे हववं, अईसे सोच के मन ला छोटे करे के जरूरत नई हे।

मुख्यमंत्री जी द्वारा-हिंदी भाषा में

  •     श्रोताओं ! मैं आप सभी को हृदय से धन्यवाद देता हूं, कि इस कार्यक्रम में मेरी बातों को आपने ध्यान से सुना है, और इतना ही नहीं, प्रदेश के चहुंमुखी विकास में, शासन के साथ कदमताल करते हुए, विभिन्न योजनाओं और नीतियों के बेहतर क्रियान्वयन के लिए आपसे बड़ी संख्या में बहुमूल्य सुझाव भी प्राप्त हुए हैं।
  •    मुझे खुशी है, अनेक श्रोताओं ने, ‘‘नदियों को जोड़ने‘‘ के कार्यों, ‘‘छत्तीसगढ़ी लोक कला आयोग‘‘ के गठन, तथा महिला सशक्तिकरण को और अधिक, प्रभावशाली ढंग से लागू करने के लिए, महिलाओं हेतु ‘‘विशेष ग्राम सभा‘‘ का आयोजन जैसे, अनेक सुझाव भी दिए हैं।
  •    मुझे इस बात की विशेष खुशी है, कि राज्य की विभिन्न जेलों में बंद कैदियों ने मुझे सुना है, तथा उन्होंने अपने आश्रितों के भरण-पोषण के लिए कोई योजना की पहल करने, तथा जेल के परिरूद्ध बंदियों के लिए परिजनों से सम्पर्क हेतु एस.टी.डी.-पी.सी.ओ. की सुविधा प्रदान करने का अनुरोध किया है।  
  •    मैं यह आश्वस्त करता हूं, कि प्राप्त सभी सुझावों का परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही जरूर की जाएगी। 
  •    बड़ी संख्या में मेरे बुजुर्गों का यह आशीर्वाद भी प्राप्त होने का सौभाग्य इन पत्रों के माध्यम से मिला है, जिसमें उन्होंने सरकार की “मुख्यमंत्री तीर्थ योजना” के तहत विभिन्न तीर्थों की यात्रा करने पर दिया है।
  •    मै अपने बुजुर्गों से इतना  कहना चाहता हूं, कि मुख्यमंत्री होने के कारण स्वयं को ‘‘छŸाीसगढ़ का प्रथम-जनसेवक‘‘ मानता हूं और इस नाते मैं भी आपके बेटे की तरह हूं, तो बुढ़ापे में, मैं आपको तीर्थयात्रा क्यों नहीं करा सकता? आपने आशीर्वाद दिया है, जिसके लिए मैं नतमस्तक हूं।
  •    कल 12 दिसम्बर को मैंने अपने तीसरे कार्यकाल के 02 साल की अवधि पूर्ण की है। आप सब ने जो जनादेश दिया है, उसमें 03 साल का समय शेष है।  
  •     मै इस अवसर पर आपको आश्वस्त करता हूं, कि मैं आपकी भावनाओं के अनुरूप हर क्षण आपकी सेवा में तत्पर रहूंगा, ताकि प्रदेश की ढ़ाई करोड़ जनता द्वारा दिए गए जनादेश के प्रति पूर्णतः समर्पित रहते हुए न्याय कर सकूं। 
  •     दिसम्बर का महीना ‘‘सर्व-धर्म समभाव‘‘ की हमारी विरासत को आगे और मजबूत बनाने का अवसर लेकर आता है। छत्तीसगढ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर नारायण सिंह जी की शहादत दिवस हमने 10 दिसम्बर को मनाया, आगामी 18 दिसम्बर को संत गुरू बाबा घासीदास की जयंती है, जिन्होंने सामाजिक बुराइयों को दूर करने और चेतना जगाकर आगे बढ़ने की राह हमें दिखाई थी।  मैं ऐसे  महापुरुष  के जन्मदिन पर आप सभी को बधाई देता हूं।
  •   24 दिसम्बर को ईद-उल-मिलाद है, वहीं 25 दिसम्बर को हमारे मसीही समाज का प्रमुख त्यौहार क्रिसमस है। मैं मुस्लिम और ईसाई समाज के भाई और बहनों को इन महान् पर्वों पर बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।

(विश्व मृदा दिवस/ कृषि )

  •  आज की चर्चा की शुरूआत मैं सबसे पहले किसान भाईयों से करना चाहता हूं। किसान भाईयों मैं भी किसान का बेटा हूं और आपकी पीड़ा को समझता हूं और उस पीड़ा को कम करने के लिए हमने तत्काल सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं।    आर.बी.सी. की धारा-6 के प्रावधानो के तहत तत्काल राहत राशि का वितरण का काम प्रारंभ करें, ताकि आपको प्राथमिक अवस्था में तत्काल राहत मिले। 
  •     पांच दिसम्बर, 2015 को हमने “विश्व मृदा दिवस” मनाया। जिसका उद्देश्य लोगों को मिट्टी के साथ जोड़ना और हमारे जीवन में मिट्टी के योगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। 
  •   आप सभी जानते हैं, कि हमारी परम्परा में पंचतत्वों का जिक्र होता है। रामचरित मानस मंे उल्लेख है- ‘‘क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा। पंचतत्व यह अधम शरीरा।।‘‘ अर्थात् मिट्टी, पानी, अग्नि, आकाश तथा वायु। इन पंचतत्वों से ही शरीर की रचना होती है। 
  •    कहा जाता है, कि माटी का कर्ज चुकाना सभी का प्रथम कर्Ÿाव्य होता है, लेकिन किसी के लिए भी माटी का ऋण चुकाना संभव नहीं होता। रहवास, भोजन, ऊर्जा संरक्षण जैसे तमाम विषय मिट्टी के साथ जुड़े हैं। 
  •     मुझे यह कहते हुए बहुत खुशी हो रही है, कि हमारे प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्तर पर “मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड योजना” लागू कर ‘‘स्वस्थ धरा, खेत हरा‘‘ का नारा दिया। इसमें दो राय नहीं कि मिट्टी से जितना सीधा संबंध किसानों का है, उतना किसी और का नहीं हो सकता।
  •     इस योजना में असिंचित भूमि में प्रति 10 हेक्टेयर में एक, व सिंचित भूमि में प्रति हेक्टेयर में एक नमूना लेने की प्रणाली है, जिसके तहत् 3 वर्षों में 08 लाख 78 हजार नमूने लिए जाएंगे। 
  •     मिट्टी के नमूने लेकर किसानों को बताया जाएगा कि उसकी जमीन की उर्वरा क्षमता कैसी है? जमीन को किस तरह के खाद की जरूरत है?
  •    अगर धरती स्वस्थ नहीं होगी तो, खेत हरा नहीं हो सकता। खाद जितना भी डाल दें, बीज जितना भी उŸाम से उŸाम हो, पानी में जमीन को चाहें डूबा कर रखें, लेकिन अगर मिट्टी ठीक नहीं है, तो फसल की पैदावार अच्छी नहीं होगी। इसलिए किसानों को पता होना चाहिए कि जिस मिट्टी पर वे मेहनत कर रहे हैं, उसकी सेहत कैसी है? कौन से पोषक तत्व कम और ज्यादा हैं? मिट्टी की तासीर कैसी है? यह अम्लीय है या क्षारीय है? 
  •   नमूनों की जॉच प्रयोगशाला में की जायेगी, जिसके लिए हमने 08 नई प्रयोगशालाएं खोलने का निर्णय भी लिया है। मिट्टी के पोषक तत्वों की जानकारी मिलने से किसानों को बहुत लाभ मिलेगा। क्योंकि, अभी तक किसान भाई अंदाज से ही पोषक तत्व, खाद, दवाई वगैरह डालकर खेती करते थे।   
  •   मुझे ऐसा लगता है, कि मिट्टी का स्वास्थ्य सुधारने का यह एक ऐतिहासिक अभियान है। कृषि को टिकाऊ और लाभप्रद बनाने के लिए मिट्टी के स्वास्थ्य का संरक्षण एवं सुधार आवश्यक है।
  •     पौधों की संतुलित वृद्धि के लिए 16 प्रमुख तत्वों की जरूरत होती है। जिनमें से तीन पोषक तत्व कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन पौधे वायुमण्डल और जल से ग्रहण करते हैं। शेष 13 पोषक तत्व पौधे भूमि से ग्रहण करते हैं। इनमें से किसी भी तत्व की कमी या अधिकता होने पर फसल की बढ़वार एवं उत्पादकता प्रभावित होती है।
  •   असंतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग से भूमि और जल प्रदूषित हो रहे हैं। जैविक खाद के उपयोग न करने से मिट्टी की संरचना, जलधारण क्षमता और स्वास्थ्य में विपरीत प्रभाव पड़ा है।

( दंतेवाड़ा जिला: जैविक कृषि)

  •  इस कड़ी में, मैं हमारे दंतेवाड़ा जिले में किसानों द्वारा किए जा रहे जैविक खेती का उल्लेख करना चाहता हूं, जिसके अंतर्गत पिछले दो सालों में 300 किसानों द्वारा जैविक खेती की शुरूआत हुई और आज इस जिले में 128 गांवों के 1000 से भी अधिक किसान लगभग 1000 एकड़ रकबे की मिट्टी के मर्म को समझकर जैविक खेती कर रहे हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता व उत्पादन दोनों बढ़ा है, जिसके लिए मैं वहॉ के किसानों को बधाई देता हूं।

(श्रमिक कल्याण)

  •    हमारे राज्य की बहुत बड़ी जनसंख्या श्रमिकों की है। हमारे श्रमिक भाई-बहन दिन-रात कठिन परिश्रम करके अपनी आजीविका का निर्वहन करते हैं। लेकिन श्रमिकांे की मृत्यु हो जाने पर उनके परिवार का कोई सहारा नहीं रहता।
  •   हमारे प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी द्वारा “प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना” ऐसे श्रमिकों के लिए ही लागू की गई है। राज्य में पंजीकृत 10 लाख निर्माण श्रमिकों को इससे लाभ होगा। योजना के तहत् 18 से 50 वर्ष आयु समूह के निर्माण श्रमिक प्रत्येक वर्ष 330 रू. का प्रीमियम जमा करने पर बीमित होंगे जिनकी सामान्य मृत्यु की दशा में 2 लाख उनके आश्रितों को प्राप्त होगा। इस योजना के क्रियान्वयन में लगने वाली प्रीमियम की आधी राशि श्रम विभाग द्वारा और शेष 165 रू. निर्माण श्रमिकों द्वारा देय होगी।
  •   श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के लिए “अटल पेंशन योजना” भी लागू की गई है। इसमें श्रमिकों को 8 सौ रू. प्रति वर्ष का अंशदान करने पर शेष राशि सरकार द्वारा जमा कर 60 वर्ष की आयु के पश्चात् आजीवन 4 हजार रूपये पेंशन प्रतिमाह दिया जायेगा।

( P.V.T.G / विषेष पिछड़ी जनजातियां )

  •    हमारे राज्य में अभी भी बैगा, कमार, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, अबूझमाड़िया, पण्डो और भुंजिया ऐसी विशेष पिछड़ी जनजातियां हैं, जिनकी संख्या राज्य में 1 लाख 94 हजार से अधिक है।
  •    हमारे इन भाईयों के विकास के लिए हमने एक ‘‘विशेष समयबद्ध अभियान‘‘ चलाने का निर्णय लिया है, जिसके तहत उन्हें अन्य लोगों की तरह जीवन की सभी मूलभूत सुविधाएं 03 वर्ष के भीतर उपलब्ध हो सकेगी। ये जनजातियां अभी भी अपनी आजीविका के लिए वनोपज संग्रह, पारम्परिक कृषि, कन्दमूल और जड़ी-बूटी जैसे साधनांे पर निर्भर हैं।
  •    इनके विकास हेतु समयबद्ध कार्यक्रम के तहत ‘‘11 सूत्रीय कार्यक्रम‘‘ की योजना तैयार की गई है, जिसके अंतर्गत समस्त आवासहीन परिवारों के लिए आवास की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था, सभी बसाहटों का विद्युतीकरण, सभी का स्वास्थ्य परीक्षण एवं हेल्थ कार्ड प्रदाय, परिवार के न्यूनतम एक सदस्य को कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण दिया जायेगा ताकि वे हुनरमंद होकर अपनी आजीविका चला सकें। साथ ही सभी परिवारों को सामाजिक एवं खाद्य सुरक्षा का कवरेज तथा राशन कार्ड व पोषण आहार प्रदाय, वन अधिकार पत्र तथा जाति प्रमाण पत्र एवं निवास प्रमाण पत्रों का वितरण, ताकि इनके लिए उन्हें भटकना ना पड़े और उन्हें बाहरी दुनिया से जोड़ने व जागरूकता लाने के उद्देश्य से सूचना के सबसे सुलभ माध्यम के रूप में एक रेडियो और धूप और बरसात से, ठंड से बचने के लिए छाता एवं कंबल निःशुल्क प्रदान करना शामिल है।  
  •   इन जनजातियों में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से 300 नई फुलवारी केंद्रों की स्थापना भी की जाएगी।

( प्रेरक पहल: नारायणपुर जिला)

  •   आज के गोठ में मुझे एक प्रेरक जानकारी आप सबसे साझा करने में विशेष खुशी हो रही है, जिससे पता चलता है कि हमारे आदिवासी अंचल के साथी जनहितकारी कार्यों के प्रति कितने जागरूक व उदार हैं। यह बात धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र नारायणपुर जिले का है। इस जिले में नक्सल प्रभावित अंदरूनी क्षेत्र में सड़क बनाने का कार्य लंबे समय से नहीं हो पा रहा था। क्योंकि निजी भूमि सड़क पर आ रही थी। ऐसे में ग्राम मुंडापाल निवासी आदिवासी किसान मंगलसाय ने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया तथा स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि को सड़क निर्माण हेतु शासन को दे दिया। मंगलसाय जैेसे किसान भाई की उदारता की जितनी तारीफ की जाए, कम है।  
  •    इस सड़क के निर्माण हो जाने से झाराघाटी की घुमावदार 3 किलोमीटर लंबी दूरी अब मात्र 01 किलोमीटर सीधी सड़क के रूप में क्षेत्रवासियों को उपलब्ध होगी।
  •  भाईयों और बहनों आपसे पुनः अगले माह की 10 जनवरी को ‘‘रमन के गोठ‘‘ कार्यक्रम में मिलूंगा। तब तक के लिए मुझे आज्ञा दीजिए।
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जय जोहार जय छत्तीसगढ़ 
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 ( अंत में उद्घोषक द्वारा )

डॉ. रमन सिंह जी रमन के गोठ कार्यक्रम के माध्यम से जो आकाशवाणी का महत्वपूर्ण प्रसारण है, आप प्रदेश की जनता से सीधे और सहज जुडे़, अपनी बात रखी, पत्रों के जवाब दिए और आज के अपने कार्यक्रम में कृषकों की बात की, श्रमिको की बात की, आदिवासी भाईयों की बात की, प्रदेष में धार्मिक समभाव की बात की, शहीद वीरनारायण सिंह,  बाबा गुरूघासीदास और गुरू गोविन्द सिंह जी की बात की। आपको बहुत - बहुत धन्यवाद।
श्रोताओं ! अभी हमने ‘‘रमन के गोठ‘‘ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को सुना, जिसमें उन्होंने विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुए अपने संवाद की अनूठी शैली में हमें उपयोगी जानकारियां भी दी। आशा है, आप सब को पूरे देश में अपने प्रकार का यह पहला कार्यक्रम जो आकाशवाणी द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार जनसम्पर्क विभाग के सहयोग से प्रसारित होता है, पसंद होगा। हम अगले माह के दूसरे रविवार, 10 जनवरी को पुनः उपस्थित होंगे।


धन्यवाद