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रमन के गोठ में ’रामचरित मानस’ : मुख्यमंत्री ने दिया मिट्टी परीक्षण पर जोर
 Posted on 13/12/2015
 

रायपुर, 13 दिसम्बर 2015

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ’रमन के गोठ’ की चौथी कड़ी में किसानों को मिट्टी की सेहत जांचने के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होेंने रामचरित मानस की इन पंक्तियों का विशेष रूप से उल्लेख किया-

क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा।
पंचतत्व यह अधम शरीरा।।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मिट्टी, पानी, अग्नि, आकाश और वायु के पंचतत्वों से मिलकर शरीर की रचना होती है। कहा जाता है कि माटी का कर्ज चुकाना सबका प्रथम कर्तव्य होता है, लेकिन किसी के लिए भी माटी का ऋण चुकाना संभव नहीं होता। रहवास, भोजन और ऊर्जा संरक्षण जैसे तमाम विषय मिट्टी के साथ जुड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री ने इस महीने की पांच तारीख को मनाए गए विश्व मृदा दिवस की चर्चा करते हुए अपने आज के रेडियो प्रसारण में कहा कि हमारे जीवन में मिट्टी के योगदान के प्रति समाज में और भी अधिक जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। डॉ. सिंह ने किसानों को सम्बोधित करते हुए कहा कि अगर धरती स्वस्थ नहीं होगी, तो खेत भी हरे नहीं हो सकते। खाद जितना भी डाल दें, बीज जितना भी उत्तम से उत्तम हो, पानी में जमीन को चाहे डुबाकर रखें, लेकिन अगर मिट्टी ठीक नहीं है तो फसल की पैदावार अच्छी नहीं होगी। इसलिए किसानों को पता होना चाहिए कि जिस मिट्टी पर वे मेहनत कर रहे हैं, उसकी सेहत कैसी है? कौन से पोषक तत्व कम और ज्यादा हैं? मिट्टी की तासीर कैसी है और वह अम्लीय है या क्षारीय?
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अगले तीन साल में आठ लाख 78 हजार मिट्टी के नमूनों के परीक्षण का लक्ष्य तय किया है। परीक्षण के लिए असिंचित जमीन पर दस हेक्टेयर में मिट्टी का एक नमूना और सिंचित भूमि पर प्रति हेक्टेयर एक नमूना लेने की प्रणाली है। उन्होंने कहा कि राज्य में मिट्टी के नमूनों की जांच के लिए आठ नई प्रयोगशालाएं खोली जाएंगी।

क्रमांक-4424/स्वराज्य