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‘रमन के गोठ’ : आकाशवाणी से प्रसारित होने वाला विशेष कार्यक्रम(दिनांक 08 नवम्बर, 2015, समय प्रातः 10.45 से 11.00 बजे तक)
 Posted on 08/11/2015
 

(उद्घोशक की ओर से)
श्रोताओं नमस्कार!


रमन के गोठ कार्यक्रम की तीसरी कड़ी के प्रसारण के अवसर पर आज हम पुनः प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ आकाशवाणी रायपुर में उपस्थित हैं।

  •     हमें यह बताते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है, कि इस कार्यक्रम को संपूर्ण प्रदेश में भारी प्रतिसाद प्राप्त हो रहा है तथा कार्यक्रम की प्रतिक्रिया के रूप में विभिन्न अंचलो से सैकड़ों पत्र प्राप्त हुए हैं।
  •     अनेक श्रोताओं ने जहॉ इस कार्यक्रम हेतु मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देते हुए यह व्यक्त किया है, कि वे सही मायनोें में इस कार्यक्रम के माध्यम से ढाई करोड़ जनता के साथ सहज सीधे जुड़ गये है। वहीं इस कार्यक्रम के लिए रेडियो जैसा सस्ता माध्यम चयन करने की सराहना करते हुए लिखा है कि यदि टी.वी. के माध्यम से यह कार्यक्रम प्रसारित होता तो षायद उतना प्रभावशाली और व्यापक नहीं होता, क्योंकि इसे गरीब लोग भी सुन सकते है।
  •     वहीं ऐसे पत्र भी हैं, जिसमें श्रोताओं ने कार्यक्रम को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए अपने सुझाव प्रेशित किए हैं। साथ ही कुछ श्रोताओं ने स्थानीय शिकायत एवं समस्याओं का उल्लेख भी किया है।
  •     श्रोताओं, सभी पत्रों की चर्चा करना संभव नहीं है। कुछ पत्रों को हम आज मुख्यमंत्री जी के सामने ला रहे हैं।
  •     श्री रमेश आचला, ग्राम तुमड़ीकसा, तहसील अंबागढ़ चौकी, जिला राजनांदगांव ने सुझाव दिया है, कि राज्य के वनांचल श्रेत्रों में गोण्डी भाषा की बहुतायत है, इसलिए रमन के गोठ कार्यक्रम को गोण्डी भाषा में भी प्रसारित किया जाए। वहीं दुर्गेश शर्मा, ग्राम मेघा, तहसील मगरलोड, जिला धमतरी ने यह लिखा है कि ‘‘इस कार्यक्रम से आपने मुख्यमंत्री पद की परिभाषा ही बदलने की कोशिश की है, पहले सरकार और जनता में दूरियां अधिक थी, जिसे आपने दूर कर दिया है।‘‘ साथ ही सुझाव दिया है, कि यह मासिक के बजाय हर 15 दिन में प्रसारित हो। 
  •     डा. पी.सी.लाल यादव, गंडई-पंडरिया, जिला राजनांदगांव का सुझाव है, कि ग्रामीण श्रेत्र के बच्चों में लोक कला के प्रति बड़ा अनुराग रहता है। उचित मार्गदर्षन व प्रोत्साहन के अभाव में वे बच्चे आगे नहीं बढ़ पाते। इसलिए प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में कला और संगीत षिक्षकों के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों के परम्परागत लोक-कलाकारों की नियुक्ति की जाए। इससे हमारे लोककला,संस्कृति और साहित्य का संरक्षण-संवर्धन को जहां संबल मिलेगा,वहीं ग्रामीण बच्चों की प्रतिभा भी परिष्कृत होगी।
  •     यह सुझाव भी प्राप्त हुआ है कि यद्यपि डा. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम स्मृति शिक्षा गुणवत्ता अभियान से षिक्षा स्तर में वृद्धि होगी, फिर भी कक्षा आठवीं तक के बच्चों को उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता समाप्त की जाए। 
  •     इसी प्रकार दामेशवर सिन्हा, ग्राम थानाबोड़ी, जिला कांकेर ने अपने गांव में पक्के शौचालय ठीक से नहीं बनने तथा रोजगार गारंटी व नरेगा योजना की मजदूरी लंबित होने बाबत् शिकायत की है। चरौदा, जिला दुर्ग की रहने वाली लक्ष्मी ठाकुर ने अनुरोध किया है कि उसके पति विकलांगता के कारण फौज की नौकरी से हटाए गए हैं तथा आजीविका के अभाव मेें बच्चों की पढ़ाई आगे नहीं हो पा रही है, उसे मदद की जाए। 
  •     ग्राम टेडेसरा, जिला राजनांदगांव के जलेष्वर ने षिकायत की है, कि टेडेसरा में स्थित कारखानों में मजदूरों का भुगतान कम कर शोषण होता है।  

आइए! हम सुने मुख्यमंत्री जी को 

मुख्यमंत्री जी द्वारा-छत्तीसगढ़ी भाषा में  
छत्तीसगढ़ के जम्मो भाई-बहिनी, सियान अऊ जम्मो संगी जहुंरिया मन ला मोर कोती ले जोहार। आकाशवाणी के ए कार्यक्रम म आज मैं तीसरइया बार आप मन संग चर्चा करत हववं। पिछले महीना के 11 तारीख के चर्चा म शासन के अनेक योजना के संबंध में आपसे चर्चा होए रिहिसे। आज अपन बात ल आघू बढ़ाए के पहिली मैं हां श्रोता मन के जऊन चिट्ठी आए हे, ओखर मन के संबंध में सब ले पहिली गोठियाहूं।

हिंदी भाषा में

  •     श्रोताओं मैं आप सभी को धन्यवाद देता हूं कि मेरे इस कार्यक्रम को सुनकर आप सभी ने मुझे अपने विचारों से अवगत कराते हुए इस कार्यक्रम को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए विभिन्न सुझाव भी दिए हैं, जिसमें कार्यक्रम को एक माह के स्थान पर हर 15 दिन में प्रसारित करने व छत्तीसगढ़ी, हिंदी के साथ-साथ गोण्डी व अन्य भाषाओं में भी संवाद करने की बात मुख्य है। मै, इस पर विचार करूंगा। 
  •     इसी प्रकार गंडई-पंडरिया के डा. पी.सी.लाल यादव सुझाव भी बहुत अच्छा है। भाई दामेशवर सिन्हा, जिला कांकेर, भाई जलेशवर, ग्राम टेडेसरा तथा बहन लक्ष्मी ठाकुर, चरौदा से प्राप्त विषयों की भी मैं जांच कर आवशयक कार्यवाही हेतु संबंधित कलेक्टरों को भेज रहा हूं। जिस पर परीक्षण उपरांत जो भी उचित कार्यवाही संभव होगी, जरूर की जाएगी।
  •     मुझे खुशी है, कि स्कूली बच्चों की षिक्षा में गुणवत्ता सुधार हेतु डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम शिक्षा गुणवत्ता अभियान को प्रदेश के लोगों ने पसंद किया है तथा यह भी सुझाव प्राप्त हुआ है कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु परीक्षा प्रणाली को पुनः स्थापित किया जाए। इस संबंध में, मैं आपके समक्ष वस्तुस्थिति को साझा करना चाहता हूं। 
  •     शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009, जो कि 01 अप्रेल, 2010 से छत्तीसगढ़ राज्य में प्रभावषील है, इसके अंतर्गत 6 से 14 वर्ष के समस्त बच्चों को शिक्षा दिया जाना अनिवार्य करते हुए शिक्षा देने का दायित्व राज्य सरकार को सौंपा गया था। 
  •     अधिनियम के अंतर्गत यह प्रावधान है कि कक्षा 1 से 8 तक कोई भी बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं होगी तथा बच्चों में निर्धारित योग्यता हासिल करने हेतु सतत् एवं समग्र मूल्यांकन का प्रावधान रखा गया था, इससे 5वीं तथा 8वीं बोर्ड की परीक्षाएं समाप्त हो गईं हैं। 
  •     कक्षा 1ली से 8वीं तक के बच्चों को अगली कक्षा में प्रवेषित किए जाने हेतु रोक नहीं होगी, व मात्र 9वीं से 12वीं तक की स्थानीय एवं बोर्ड परीक्षाएं सम्पन्न होती हैं। 
  •     बच्चों में अनुत्तीर्ण होने का भय समाप्त हो, ताकि उनमें निराशा की स्थिति उत्पन्न होने के कारण ऐसे बच्चे अनुत्तीर्ण होने से बीच सत्र में पढ़ाई न छोड़ दें, इस उद्देशय से यह व्यवस्था की गई थी। 
  •     लेकिन कहीं न कहीं सतत् एवं समग्र मूल्यांकन करने में षायद हम सफल नहीं हो पाए हैं, जिसे ध्यान में रखकर हमने शिक्षा गुणवता अभियान प्रारंभ किया है, और उसके अच्छे परिणाम आने की संभावना है। मैं नौनिहालों के भविष्य को लेकर पूर्णतः सतर्क हूं, ताकि उन्हें उच्च स्तर की उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त हो और वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में सफल हो सकें। 

छत्तीसगढ़ी भाषा में

  •     आज ले दू दिन बाद हमन देवारी तिहार मनाबो, जेखर तैयारी आप सब मन कर डारे होहू। अपन-अपन घर दुआर के साफ-सफई, लिपई-पोतई सब होगे होही। मैं हं छत्तीसगढ़ के सब्बो भाई-बहिनी मन ला साल भर के ऐ सबले बड़े तिहार के बहुत बहुत बधाई देवत हवंव। 
  •     हम सब ला पता हे कि ए देवारी के तिहार भगवान मर्यादा पुरूषोत्तम राम के लंका जीत के अयोध्या आए के खुशी में अयोध्या के जनता-जनार्दन  द्वारा मनाए गे रिहिसे। तेन परंपरा ह अब तक चलत हे। 
  •     देवारी के दूसर दिन हमर प्रदेष म गोवर्धन पूजा धूमधाम से मनाए के रिवाज हे, जेमा गोधूलि बेला में गोवंष के गोबर से गोवर्धन पहाड़ बना के हमर अहीर/यादव भाई मन द्वारा गोवर्धन खुंदाए के नेग गोर्रा-कोठा में करे जाथे अऊ उही दिन सांझ के गांव के धरसा में तिहार मना के गोवर्धन खुंदाए गोबर के टीका ल हमन एक दूसर ल लगाथन। ऐ हा हमर खेती किसानी अऊ गोपालन संस्कृति के बहुत बड़े प्रतीक अऊ चिन्हा आय। गोवर्धन पूजा के बिहान दिन भाई दूज हमर बहिनी मन के तिहार ए। मैं हं अपन सब्बो बहिनी मन ल ए अवसर म बहुत बहुत बधाई देवत हवंव कि ऊॅंखर भाई-बहिनी के मया ह हमेषा सुघ्घर बने राहै।
  •     देवारी, गोवर्धन पूजा अऊ भाई दूज के संगे-संग कातिक के महीना में मेला-मड़ई अऊ नदिया, नरवा, तरिया में नहाये के परंपरा छत्तीसगढ़ में हावै। मोर कोती ले सब्बो भाई बहिनी मन ला पुन्नी मेला के घलो बहुत बहुत बधाई। 
  •     कातिक पुन्नी के दिन महान् संत गुरूनानक देव के जनमदिन हमर सब्बो सिक्ख भाई बहिनी मन मनाथे। मैं अपन जम्मों सिक्ख भाई बहिनी मन ल बधाई अऊ शुभकामना देवत हवंव। 

हिंदी भाषा में

  •     छत्तीसगढ़ के मेरे भाईयों और बहनों, कभी-कभी कुछ ऐसी दुर्घटनाएं होती है, जिससे मन व्यथित हो जाता है एवं जो मुझे दिल की गहराईयों तक छू जाती हैं। ऐसी ही एक हृदय विदारक घटना विगत् दिनों गरियाबंद जिले में हुई। आप सभी ने भी समाचार पत्रों में पढ़ा होगा। 17 अक्टूबर को सुबह गरियाबंद जिले के फिंगेष्वर विकासखंड, में स्थित शासकीय माध्यमिक शाला, ग्राम रजकट्ठी के पढ़ने वाले मिडिल स्कूल के 73 बालक और बालिकाओं को गांव के ही एक किसान के ट्रैक्टर को किराए में लेकर उस षाला के सभी शिक्षक पास में ही सोनई-रूपई माता के दर्शन के लिए ले गए, लेकिन दुर्भाग्यवष घाटीनुमा मार्ग पर ट्रैक्टर ट्रॉली के पलट जाने से उसमें सवार 05 छात्र-छात्राओं की स्थल पर ही मौत हो गई। ये सभी छात्र और छात्राएं कक्षा 6वीं से 8वीं में पढ़ते थे। 11 छात्र-छात्राओं को गंभीर रूप से घायल होने के कारण ईलाज के लिए रायपुर भेजा गया।
  •    भाईयो और बहनों, इस घटना से मेरे मन में अनेक प्रशन उत्पन्न हुए। क्या इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को  ट्रैक्टर जैसे मालवाहक वाहन में यात्रा कराना उचित था? क्या संबंधित शिक्षक का यह आचरण नियमानुसार था? क्या पालको व पंचायत को इसे रोकना नही था? क्या इस प्रकार की घटनाओं को रोका नही जा सकता? यह सारे प्रशन आज भी मेरे मन को आंदोलित करते रहते हैं। 
  •    असमय काल के गाल में समा गए बच्चे, जिसमें 03 बेटियां तथा 02 बेटे थे, के पालको ने उन्हें  सुबह- सुबह विद्यार्जन हेतु शाला भेजा था, तब उन्हें क्या पता था कि वे उनकी अंतिम विदाई कर रहे हैं। इन बच्चों को मैं श्रद्धांजलि देते हुए शोकग्रस्त परिवारों के प्रति संवेेदना व्यक्त करता हूं। 
  •     मैं यह अपील करता हूं कि इस प्रकार का लापरवाहीपूर्ण और अवैधानिक आचरण का प्रदर्शन हमारे शिक्षक न करे। हमने जिम्मेदार स्टॉफ के प्रति कड़ी कार्यवाही की है। पुलिस प्रकरण भी दर्ज किया है। लेकिन हमें यह संकल्प लेना होगा कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

प्रश्न-उत्तर
प्रश्न- शासन द्वारा किसानों के धान की बिक्री हेतु इस वर्ष क्या व्यवस्था की गई है?

उत्तर- आपने बहुत ही सामयिक प्रष्न किया है। हमारे प्रदेश के किसानों को धान के एक-एक दाना का समर्थन मूल्य प्राप्त हो, इस हेतु हमने चौकस व्यवस्था की है। खरीफ विपणन वर्ष 2015-16 हेतु धान खरीदी के लिए किसानों का पंजीयन 01 सितम्बर से 15 अक्टूबर, 2015 तक किया गया है। खरीदी हेतु मार्कफेड को नोडल एजेंसी बनाया गया है। नगद और लिंकिंग में समितियों द्वारा 1976 खरीदी केंद्रों में 16 नवंबर 2015 से 31 जनवरी, 2016 तक (ढाई माह) खरीदी की जाएगी।
        धान का समर्थन मूल्य कॉमन किस्म के धान के लिए 1410 रू. प्रति क्विंटल तथा ग्रेड-ए श्रेणी के धान के लिए 1450 रू. प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। किसानों से धान खरीदी ऋण पुस्तिका के आधार पर की जाएगी। 
        विगत् वर्ष की तुलना में इस वर्ष 71 हजार अधिक किसानों का पंजीयन किया गया है और कुल 13 लाख 23 हजार किसान पंजीबद्ध किए गए हैं। किसानों से अनुरोध है कि वे अपना धान साफ कर और सुखाकर खरीदी केंद्रों में लाएं। 
        विक्रय किए गए धान की राषि किसानों के खाते में ऑनलाईन भुगतान होगा तथा धान उपार्जन की समस्त कार्यवाही कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था के माध्यम से की जायेगी। धान खरीदी की अधिकतम सीमा प्रति एकड़ 15 क्विंटल निर्धारित की गई है। 

प्रश्न -राज्य के बड़े हिस्से में सूखे की स्थिति है। सूखा प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
उत्तर -
    प्रदेश की 93 तहसीलों को पहले ही हमने सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। इसके अतिरिक्त आनावारी रिपोर्ट के आधार पर कुछ और तहसीलों को भी सूखाग्रस्त घोषित किया जा सकेगा।
        जहां तक सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानो को राहत पहुंचाने का विषय है, सरकार स्थिति के प्रति पूरी तरह जागरूक और अवगत है। आगामी खरीफ फसल में सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों को बीज की कोई समस्या न हो, इसके लिए प्रभावित क्षेत्र के लगभग 22 लाख किसानों को एक क्विंटल तक धान का बीज निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे शासन पर करीब 250 से 300 करोड़ रूपये तक वित्तीय भार आयेगा।
        इसके साथ ही सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को ‘‘कृषक जीवन ज्योति योजना‘‘ के तहत 7500 यूनिट मुफ्त बिजली के स्थान पर 9000 यूनिट बिजली निःशुल्क दी जाएगी। यानी उन्हें 1500 यूनिट अतिरिक्त बिजली मुफ्त दी जाएगी। प्रत्येक सूखा प्रभावित किसान को कुल मिलाकर लगभग 30 हजार रूपये की बिजली निःशुल्क मिलेगी। लगभग 4 लाख सिंचाई पम्पधारक किसानों को यह लाभ मिलेगा।
        इसके अतिरिक्त सूखा प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार के अभाव में पलायन की स्थिति न हो, इस उद्देष्य से अतिरिक्त रोजगाार के अवसर भी उपलब्ध कराये जा रहे है, जिसमें मनरेगा के तहत 100 दिन के स्थान पर 150 दिन का रोजगार दिया जाएगा।
        सरगुजा इलाके में ओलावृष्टि के कारण फसलों की क्षति होने की सूचना भी प्राप्त हुई है। ऐसे प्रभावित किसानों को आर.बी.सी. 6-4 के प्रावधानों के तहत उचित मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए मैनें अधिकारियों को निर्देशित कर दिया है।
        मुझे विश्वास है कि हम अपने प्रदेश की ढाई करोड़ जनता की सहभागिता से छत्तीसगढ़ महतारी की भरपूर सेवा कर आशीर्वाद प्राप्त करते हुए एक नई सुबह की ओर अग्रसर होंगे।
        भाईयों और बहनों, आपसे पुनः अगले माह दिनांक 13 दिसम्बर को रमन के गोठ कार्यक्रम में मिलूंगा। तब तक के लिए मुझे आज्ञा दीजिए।

 

जय जोहार

 जयछत्तीसगढ़