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‘रमन के गोठ‘ : आकाशवाणी से प्रसारित होने वाला विशेष कार्यक्रम : (दिनांक 13 सितम्बर 2015, समय प्रातः 10.45 से 11 बजे तक)
 Posted on 13/09/2015
 

श्रोताओं नमस्कार ।

    कार्यक्रम ‘रमन के गोठ’ में आप का स्वागत है, अभिनंदन है ! लोकतंत्र में जनादेश की अहम भूमिका होती है। जब किसी प्रदेश में कोई सरकार बनती है, तो वो जनादेश के आधार पर ही बनती है। धान का कटोरा कहे जाने वाले प्राकृतिक दृश्यों, खनिज संसाधनों और पुरातात्विक धरोहरों से परिपूर्ण हमारे राज्य छत्तीसगढ़ में तीसरी बार जनता ने अपना पूर्ण जनादेश देकर डॉ. रमन सिंह को अपना दृढ़ समर्थन दिया। जनता की भावनाओं का सम्मान करते उनके दुख-सुख में भागीदार बनते राज्य की समृद्धि और जनता की खुशहाली के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह।
मुख्यमंत्री महोदय, जनदर्शन के माध्यम से जनता से नजदीकी और प्रत्यक्ष संवाद बनाए हुए हैं और लोक सुराज तथा विकास यात्राओं के जरिए गांव-गांव के जन-जन तक उनकी सहज ही पहुंच है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जनता को हरसंभव मदद देने उनसे सम्पर्क बनाने के अपने सृजनात्मक प्रयास करते ही रहते हैं। श्रोताओं आज इस कड़ी में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है, जबकि डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री के रूप में जन-संचार के सबसे सशक्त और विश्वसनीय माध्यम रेडियो के जरिए जन-जन तक अपने अभिनव पहल के माध्यम से, जिस कार्यक्रम का नाम है, ‘रमन के गोठ’ ।  
रेडियो ने शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, कला, संगीत और साहित्य को नये स्वर दिए और हर वर्ग के लिए कार्यक्रम प्रसारित किए। इसीलिए डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश की जनता से सीधा संवाद करने के लिए रेडियो जैसा विश्वसनीय माध्यम चुना है। तमाम भारतीय प्रदेशों में इस तरह की अभिनव पहल करने वाले डॉ. रमन सिंह पहले मुख्यमंत्री हैं। निःसंदेह श्रोताओं हमें उम्मीद है कि आज का दिन एक मील का पत्थर साबित होगा। छत्तीसगढ़ शासन के लिए, राज्य की जनता के लिए, डॉ. रमन सिंह के लिए और साथ ही रेडियो के लिए। तो आईए श्रोताओं रमन के गोठ में स्वागत करें, छत्तीसगढ़ के तीसरी बार निर्वाचित मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का -

प्रश्न (1):- माननीय मुख्यमंत्री जी ! ‘‘रमन के गोठ‘‘ के इस कार्यक्रम में आज प्रथम प्रसारण में हम आपका स्वागत करते है। इस प्रकार के कार्यक्रम के बारे में आपके मन में विचार कैसे आया ?

उत्तर:-    छत्तीसगढ़ भौगोलिक दृष्टि से एक विस्तृत क्षेत्रफल वाला राज्य है जिसका अकेले बस्तर संभाग का क्षेत्रफल भी केरल राज्य से बड़ा है तथा इस राज्य की 44 प्रतिशत आबादी जहां अनुसूचित जाति एवं जनजातियों की है, वहीं 44 प्रतिशत क्षेत्र गहन वनों से आच्छादित है। 

  •   प्रदेश की जनसंख्या ढाई करोड़ से भी ऊपर है, तथा इस विशाल जनसंख्या तक सीधे पहुंचने का माध्यम आकाशवाणी से बेहतर और कोई दूसरा नहीं हो सकता, जिसके 5 केन्द्रों की पहुंच प्रदेश के 99 प्रतिशत जनसंख्या तक है। 
  •   प्रदेश के मुखिया के नाते राज्य के आम नागरिको से मेरा जीवंत संपर्क बना रहे, उनके सुख-दुःख की घड़ियों में, मैं उनके साथ सदैव खड़ा रहूॅं, तथा उनकी आवश्यकता और व्यथा की जानकारी भी मुझे हमेशा पता रहे, ताकि ऐसी समस्याओं का निराकरण समय रहते प्रभावी ढंग से शासन के द्वारा किया जा सके। दीन दुखियों के आंसू पोछने में, यदि मैं तत्पर रहते हुए सफल हो सकूं, तो इसे मैं अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानूंगा। इसी उद्देश्य को सामने रखकर मैंने यह निर्णय लिया है, कि हर  महीने के दूसरे रविवार को अपने प्रदेश की जनता के साथ सीधे-सीधे संबोधन के माध्यम से संवाद स्थापित करूं। मेरा यह प्रयास भी होगा कि इस संबोधन के माध्यम से मैं आम जनता की  रोजमर्रा की कठिनाईयों और समस्याओं को आपके साथ बैठकर न केवल साझा कर सकूं, बल्कि ऐसी समस्याओं का प्रभावी हल भी समय-समय पर निकलता रहे। 
  •   मेरा यह भी प्रथम प्रयास होगा कि मेरी संवेदना सदैव आप लोगों के साथ बनी रहें, और इस जीवंत संपर्क के माध्यम से ही शासन और प्रशासन की भूमिका जनोन्मुखी तथा सर्वहारा के लिए केन्द्रित हो। 
  •   मैं यह भी चाहूंगा कि मेरा यह प्रयास आपको कैसा लगा, तथा छत्तीसगढ़ शासन से आप और क्या अपेक्षा रखते हैं, इस संबंध में प्रदेशवासियों से मुझे आकाशवाणी के माध्यम से समय-समय पर जानकारी सूचना के रूप में प्राप्त होती रहे, ताकि ऐसी सूचनाओं पर हम अपनी नीतियों और योजनाओं को तैयार कर सकंे।

प्रश्न (2):-यह बहुत ही अभिनव पहल आपके द्वारा की गई है तथा जहां तक मुझे जानकारी है, भारत के पहले मुख्यमंत्री आप हैं, जिनके द्वारा इस प्रकार की पहल प्रारंभ की जा रही है। आज इसकी प्रथम कड़ी की शुरूआत आप कैसे करना चाहते हैं ?

उत्तर:-    इस प्रदेश की 80 प्रतिशत आबादी आजीविका हेतु खेती किसानी पर निर्भर है। मैं भी मूलतः किसान परिवार से हूं तथा इस नाते छत्तीसगढ़ के किसान भाईयों की पीड़ा एवं व्यथा को समझ सकता हूं। आज 13 सितम्बर है, और इसके बावजूद वर्षा के अभाव के चलते बड़े क्षेत्र में सूखे की आशंका उत्पन्न हो रही है, ऐसे वातावरण में मैं किसान भाईयों को आश्वस्त करना चाहता हूं, कि सिंचाई के जो भी शासकीय साधन उपलब्ध हैं, उनका यथासंभव अधिक से अधिक उपयोग वे करें। साथ ही निजी सिंचाई के साधन जैसे पम्प आदि का भी समुचित लाभ उठायें। इसके लिए जल संसाधन विभाग तथा उर्जा विभाग को आवश्यक निर्देश जारी कर दिये गये है। इसके बावजूद भी सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाने पर गांवों में रोजगार के अभाव में पलायन न हो। इस हेतु हम योजना तैयार कर रहे हैं, ताकि हर गांव में जरूरतमंद लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सके और किसी प्रकार की रोजी-रोटी की समस्या पैदा न हों। 

  •   मैं इस संबंध में यह भी स्पष्ट करना चाहूंगा, कि सूखे की स्थिति में शासकीय मदद के मापदण्ड को हमने और भी अधिक उदार बनाया है। 
  •   पहले जहां 50 प्रतिशत फसलों की क्षति पर ही राहत एवं मदद दी जाती थी, उसे शिथिल कर 33 प्रतिशत फसल क्षति पर भी यह मदद दी जाए, इसके लिए आर.बी.सी. के प्रावधानों में संशोधन किया गया है। 
  •   इसके साथ ही राष्ट्रीय फसल बीमा योजना के अन्तर्गत सिंचित धान सहित आठ प्रकार की फसलों को शामिल किया गया है। ऋणी किसानों का पहले ही बीमा किया जा चुका है। जिन किसानों ने ऋण नहीं लिया है, उनके लिए बीमा कराने की तिथि 15 सितम्बर तक बढ़ा दी गयी है। मैं किसान भाईयों से अपील करता हूं कि वे इसका लाभ लें। 

 

  •    मेरे प्रदेश के भाईयों एवं बहनों, इस प्राकृतिक आपदा की घड़ी में मैं तथा मेरी सरकार हमेशा आपके साथ खड़ी है, तथा 15 तारीख को राज्य मंत्रि-मण्डल की बैठक भी मैंने बुलायी है, उसमें भी इस विषय पर विस्तारपूर्वक चर्चा करके हम सब सहानुभूतिपूर्वक निर्णय लेगें। 
  •       कल का दिन हम छत्तीसगढ़ वासियों के लिए प्रमुख त्यौहार का दिन था, जिसे पोला के रूप में हम सब धूम-धाम से गांव-गांव में मनाते हैं । आप सभी ने भी मनाया होगा। किसी भी राज्य की सार्थक पहचान उसकी संस्कृति से होती हैं। छत्तीसगढ़ राज्य देश का एक मात्र राज्य हैं, जो पूर्णतः कृषि प्रधान है। 
  •        यहॉ के निवासी पूरे वर्षभर खेती कार्य में लगे रहते हैं और धान की खेती यहां की प्रमुख फसल हैं। यहॉ के निवासियों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को कुछ इस तरह संजो कर रखा है, कि कृषि कार्यो के दौरान साल में विभिन्न अवसरों पर खेती कार्य आरंभ होने के पहले ‘अक्ती’, फसल बोने के समय ‘सवनाही’ और फसल उगने के समय भोजली तथा फसल लहलाने के समय ‘हरेली’ जैसे पर्व मनाते हुए, जन-मानस में एकता का संदेश देते  हैं। यहॉ के निवासी पेड़-पौधे, जीव-जन्तु, तथा प्रकृति को भी भगवान की तरह पूजते हैं। हर त्यौहार के अवसर पर यहॉ मातायें अलग-अलग प्रकार के पारंपरिक व्यंजन बना कर अतिथियों का स्वागत-सत्कार करती हैं। इसी कारण छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में अपनी अलग पहचान बना कर रखी है और यहां के रहवासी अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते हैं। 
  •     इसी क्रम में एक महत्वपूर्ण पर्व हैं ‘पोला’, जिसको हम छत्तीसगढ़ी में ‘‘पोरा’’ भी कहते हैं। 
  •    भाद्रपद मास अमावस्या की तिथि को मनाये जाने वाला ‘पोला’ त्यौहार खरीफ फसल के दूसरे चरण का कार्य जैसे निंदाई-गुड़ाई आदि पूरा हो जाने पर फसलों के बढ़ने की खुशी में किसानों के द्वारा बैलो का पूजन कर मनाया जाता हैं, जो कि कृषि कार्याे में बैलो के प्रति कृतज्ञता दर्शाने और प्रेमभाव अर्पित करने का प्रतीक है, क्योंकि बैलों के सहयोग द्वारा ही खेती का कार्य किया जाता हैं। कृषि एवं पशुधन का संबंध एक दूसरे से परस्पर जुड़ा हुआ है। मैं आप सभी को ‘पोला’ पर्व की बधाई देता हूॅं। 
  •       आज से 3 दिन के बाद 16 सितम्बर को एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार आप सब मना रहे होंगे, जो हमारी छत्तीसगढ़ की बहनों और महतारियों का सबसे बड़ा त्यौहार होगा, जिसको हम सभी तीजा के रूप में जानते हैं। मेरा यह मानना है कि हमारी बहनें और माताएं चाहे जितनी भी उम्र की हो जाए अपने मायके में तीजा के दौरान अपने पिता या भाई के बुलावे पर जाने की उन्हें सदैव प्रतीक्षा रहती है, तथा यह उनके भाग्य और मंगल से जुड़ा हुआ लोक पर्व है और हमारे छत्तीसगढ़ की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। मैं अपनी सभी तिजहारिन बहनों एवं महतारियों को इस मंगल पर्व की जिसमें वे अपने सुहाग की रक्षा के लिए निर्जला उपवास करके ईश्वर से प्रार्थना करती है, मंगल कामना एवं बधाई देता हूं, तथा ईश्वर से यह भी प्रार्थना करता हूं कि मेरी बहनों का सुहाग सदैव सुरक्षित रखें। मेरी बहनें यदि सुखी नहीं होगीं तो मैं कैसे प्रसन्नचित रह सकता हूं।    
  •      तीजा के दूसरे दिन, गणेश चतुर्थी से गणेश उत्सव प्रारंभ होगा जो 11 दिनों तक चलेगा। उस समय प्रदेश में विध्नहर्ता भगवान गणेश की धूम रहेगी। प्रदेश के विकास के रास्ते पर आने वाले सभी बाधाओं को विध्नहर्ता दूर करेगे। यह हम सब मिलकर प्रार्थना करें।
  •       यह भी सुखद संयोग है, कि इन त्यौहारों की कड़ी में 25 तारीख को हमारे मुस्लिम भाईयों का पुनीत पर्व ‘ईदु-उल-जुहा’ मनाया जायेगा। मैं इस मुबारक अवसर पर अपने सभी मुस्लिम भाईयों को हृदय से ईद की मुबारकबाद देता हूं।

प्रश्न (3):- माननीय मुख्यमंत्री जी आज इस अवसर पर आप प्रदेश वासियों को क्या संदेश देना चाहेंगे ?

उत्तर:-     आज मैं छत्तीसगढ़ के समस्त भाईयों-बहनों एवं माताओं से यह अपील करना चाहता हूं, कि नये शिक्षा सत्र का प्रारंभ 2 माह पूर्व हो चुका है। शिक्षा के बिना नई पीढ़ी के विकास की कल्पना भी बेमानी होगी। साथ ही यह भी आवश्यक है, कि प्राप्त होने वाली शिक्षा, उच्च-गुणवत्ता की हो, ताकि हमारे बच्चे अन्य राज्यों के बच्चों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा में भी सफल हो सकंे। इसके लिए सिर्फ विद्यालय खोलना ही पर्याप्त नहीं, अपितु जो अनेक स्कूल खोले गये हैं , वहां हमारे शिक्षक नियमित रूप से विद्यार्थियों को उच्च स्तर की शिक्षा प्रदान करें , यह भी जरूरी है। स्कूल परिसर में स्वच्छता हो, पेयजल तथा शौचालय की व्यवस्था हो, अच्छी अधोसंरचना हो, इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए हमने अपने राज्य में हमारे जन-जन के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. कलाम की याद में ‘डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम शिक्षा गुणवत्ता अभियान’ प्रारंभ किया है। 

  •        इस अभियान के माध्यम से सभी स्कूलों को पढ़ाई के स्तर के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जायेगा तथा हर ग्राम स्तर पर ग्राम सभा का आयोजन किया जायेगा। स्कूलों में पढ़ाई, शिक्षकों की उपस्थिति तथा पढ़ाई का स्तर आदि के संबंध में ग्राम वासियों द्वारा सुझाव दिये जाएंगे। जिन स्कूलों में गुणवत्ता निम्न स्तर की पायी जायेगी उन्हें सी और डी ग्रेड में चिन्हित करते हुए ऐसे स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए विशेष अभियान संचालित किया जायेगा। इस प्रकार की विशेष ग्राम सभा पूरे प्रदेश में 16 और 17 तारीख को आयोजित होगी। मैं सभी ग्रामीण भाईयों से अपील करना चाहता हूं, कि वे इस प्रकार की ग्राम सभाओं में शामिल होकर अवश्य अपनी भूमिका निभाये।
  •        इसी प्रकार हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में बहुत सी योजनाएं प्रारंभ की गई हैं, जिनमें मुख्य रूप से ‘प्रधानमंत्री जन-धन योजना’ तथा ‘सुरक्षा बीमा योजना’ प्रमुख है। ‘प्रधानमंत्री जन-धन योजना’ में हमने 77 लाख बैंक खाते खोलने के लक्ष्य के विरूद्व लगभग 80 लाख खाते खोलकर लक्ष्य से आगे बढ़ चुके है और इसी प्रकार ‘प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना’ में 20 लाख के लक्ष्य के विरूद्व 32 लाख परिवारों ने बीमा करवा लिया है। 
  •        इसी प्रकार एक योजना ‘स्वच्छ भारत मिशन’ की है, जिसमें महात्मा गांधी के जन्म दिन पर 2 अक्टूबर 2019 तक सम्पूर्ण प्रदेश को स्वच्छ बनाने का हमारा लक्ष्य है । इस लक्ष्य में भी हम तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं। मैं आप सभी से यह अपील करता हूं, कि ‘स्वच्छ भारत मिशन’ को हर दृष्टि से सफल बनाने के लिए हम सब मिलकर अधिक से अधिक प्रयास करें। 

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