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ईब से इन्द्रावती और घर-आंगन से चौपालों तक ‘रमन के गोठ’ की अनुगूंज : मुख्यमंत्री के रेडियो कार्यक्रम को श्रोताओं का उत्साहजनक प्रतिसाद
 Posted on 06/01/2016
 

किसी ने कहा- दिल की आवाज तो किसी ने अन्तस को छूने की कोशिश
प्रदेश में ट्रांजिस्टरों की बिक्री में भारी इजाफा: पांचवी कड़ी का प्रसारण 10 जनवरी को

रायपुर, 6 जनवरी 2016

 

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के रेडियो प्रसारण का अब छत्तीसगढ़ के शहरों से लेकर दूर-दराज गांवों तक लोग हर महीने बेसब्री से इन्तजार करने लगे हैं। ईब नदी से लेकर इन्द्रावती तक और शिवनाथ से लेकर महानदी तक, घरों के आंगन से चौपालों तक ‘रमन के गोठ’ की अनुगूंज सुनने के लिए बच्चों, युवाओं और बड़े बुजुर्गो में एक नया उत्साह देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि डॉ. रमन सिंह देश के पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘मन की बात’ से प्रेरणा लेकर आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से छत्तीसगढ़ की जनता को हर महीने सम्बोधित करने और प्रदेशवासियों के साथ अपने विचारों को साझा करने की शुरूआत कर दी है। 
प्रधानमंत्री श्री मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह दोनों के इन कार्यक्रमों से टेलीविजन के इस युग में रेडियो का महत्व एक बार फिर बढ़ गया है। यह कहना गलत नहीं होगा कि जनता के बीच रेडियो वापस आ गया है। आकाशवाणी के स्थानीय अधिकारियों के अनुसार ‘रमन के गोठ’ का प्रसारण शुरू होने के लगभग पांच महीने में प्रदेश में ट्रांजिस्टरों की बिक्री में भारी इजाफा हुआ है। 
उल्लेखनीय है कि जनसम्पर्क विभाग के सहयोग से डॉ. रमन सिंह का यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ स्थित आकाशवाणी के सभी केन्द्रों से हर महीने के दूसरे रविवार को सवेरे 10.45 से 11 बजे तक प्रसारित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम की पहली कड़ी का प्रसारण लगभग पांच महीने पहले 13 सितम्बर को हुआ था। अब तक ‘रमन के गोठ’ की चार कड़ियों का प्रसारण हो चुका है। पांचवीं कड़ी 10 जनवरी को प्रसारित की जाएगी। अब तक प्रसारित सभी कड़ियों में मुख्यमंत्री ने खेत-खलिहानों से लेकर किसानों, ग्रामीणों और आम नागरिकों के जीवन से जुड़ी समस्याओं को, उनके सुख-दुःख से जुड़े विषयों को मानवीय संवेदनाओं के साथ छूने की सार्थक कोशिश की है। उनकी इस कोशिश को आकाशवाणी के लाखों श्रोताओं ने हाथों-हाथ लिया है। कार्यक्रम को लेकर श्रोताओं से मिलने वाले पत्रों में इसका संकेत मिलता है। किसी ने इस कार्यक्रम को ‘दिल से निकली आवाज’ बताया है तो किसी ने इसे श्रोताओं के अन्तस को छू लेने वाला कार्यक्रम कहकर अपने विचार व्यक्त किए हैं। अब तक प्रसारित चारों कड़ियों में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ी और हिन्दी मिश्रित शैली में छत्तीसगढ़ के तीजा-पोला और राखी जैसे पारम्परिक तीज-त्यौहारों की जिस तरह से चर्चा की, सूखे की मार झेल रहे किसानों के दुःख-दर्द को महसूस करते हुए जिस तरह उनका हौसला बढ़ाया, रेडियो वार्ता में उनकी यह शैली लोगों के दिलों को छू गई।   
कई स्थानों पर रेडियो श्रोताओं ने अपने संघ के माध्यम से भी ‘रमन के गोठ’ को सुनने और सुनाने का सिलसिला शुरू कर दिया है। धरसीवां जिला रायपुर के आकांक्षा रेडियो लिसनर्स क्लब के श्री छेदूलाल यादव और श्रीमती सीता यादव ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में अपनी भावनाएं कुछ इस तरह व्यक्त की हैं- ‘बहुत खुशी होती है, जब एक तरफ लोग मेरे घर में एकत्र होकर रेडियो सुनते हैं। एफ.एम. का जमाना आ गया, परन्तु ‘रमन के गोठ’ का प्रसारण प्रायः घर-घर रेडियो में सुना जाएगा’। ग्राम खपरी जिला दुर्ग निवासी श्री घुरेलाल जोशी ने लिखा है- ‘रमन के गोठ’ की प्रस्तुति हृदय स्पर्शी है। जनसम्पर्क विभाग और आकाशवाणी को हार्दिक बधाई। ग्राम चरडोंगरी, जिला कबीरधाम स्थित रेडियो श्रोताओं के संगठन ‘जय छत्तीसगढ़ रेडियो श्रोता संघ’ की ओर से श्री दुर्गाराम साहू, श्रीमती कुमारी साहू और उनके साथियों ने इस कार्यक्रम को नागरिकों के लिए सार्थक और ज्ञानवर्धक बताते हुए प्रसारण अवधि 15 मिनट से बढ़ाकर 30 मिनट करने का सुझाव दिया है। ग्राम देवरी जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के श्री अश्विनी वर्मा और श्री सुरेश वर्मा ने ‘रमन के गोठ’ में दी जाने वाली जानकारी को बेहद उपयोगी बताते हुए सफल प्रस्तुति के लिए मुख्यमंत्री को बधाई दी है। ग्राम हरदीबाय (धवलपुर) जिला गरियाबंद निवासी श्री योगेन्द्र कुमार यादव ने छत्तीसगढ़ी भाषा में अपनी प्रतिक्रिया इस प्रकार दी है- ‘रमन के गोठ’ ह हमर मन के अन्तस ल छू डारिस जी। ये कार्यक्रम ल सुनेबर घर के जम्मो सदस्य एके जगह रेडियो के तीर म बैईठके सुनेन अउ अवईया कार्यक्रम ल घलो ध्यान लगा के सुनबो। ग्राम पिपरिया जिला कबीरधाम के श्री कमलकान्त गुप्ता ने लिखा है- मुख्यमंत्री जी ने ‘रमन के गोठ’ के जरिए किसानों, युवाओं और सभी लोगों की चिन्ता की है। सूखे की विपदा से निपटने के लिए कारगर कदम उठाए गए। उन्होंने मुद्रा योजना का लाभ उठाने की बात कही। सफल कार्यक्रम के लिए हार्दिक बधाई। 
श्रोता ‘रमन के गोठ’ की प्रशंसा के साथ-साथ अपने महत्वपूर्ण सुझाव भी दे रहे हैं, समस्याएं भी बता रहे हैं, जिन पर डॉ. रमन सिंह संबंधित विभागों को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दे रहे हैं। ग्राम भानपुरी (मुसरा) जिला राजनांदगांव के श्री आत्माराम यादव ने लिखा है- मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता को अपने विचारों से अवगत कराने का यह अच्छा कार्यक्रम शुरू किया है। इसके लिए मुख्यमंत्री जी, जनसम्पर्क विभाग और आकाशवाणी परिवार को धन्यवाद और बधाई। ग्राम पसौद, जिला बालोद के श्री बी.एल. देवांगन ने लिखा है- लोगों के मन की बात करने वाले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का उदबोधन सराहनीय है। ऐसा उदबोधन देने वाले वह देश के प्रथम मुख्यमंत्री है। प्रेरणादायी प्रस्तुति के लिए मुख्यमंत्री, जनसम्पर्क विभाग और आकाशवाणी परिवार को बधाई। भिलाई नगर के सेक्टर-एक निवासी डॉ. नलिनी किशोर श्रीवास्तव ने इस कार्यक्रम को विशेष प्रभावशाली बताते हुए मुख्यमंत्री को लिखा है कि संवाद से संबंध बनते हैं। सुन्दर वार्ता के लिए आप बधाई के पात्र हैं। 
ग्राम देवरी, जिला बालोद की सांस्कृतिक संस्था ‘सुनता के संदेश’ लोक कलाकार श्री रामप्रसाद साहू और उनके साथियों ने मुख्यमंत्री को छत्तीसगढ़ी भाषा में पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि इस कार्यक्रम से हम कलाकारों को खुशी हुई। इसके लिए आपको बहुत-बहुत बधाई। पत्र में श्री साहू ने प्रदेश के हर जिले में लोक संगीत विद्यालय खोलने का अनुरोध किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को यह भी सुझाव दिया है कि छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में लोक कलाकार रहते हैं, जिन्हें संगठित कर ‘कला आयोग’ का गठन किया जाना चाहिए और उसमें किसी अनुभवी व्यक्ति को बैठाना चाहिए। 
मुख्यमंत्री ने उनका यह पत्र सुझाव के परीक्षण के लिए संस्कृति विभाग को भिजवाया है। कार्यक्रम की तारीफ करते हुए कुछ इसी तरह का सुझाव बेमेतरा जिले के ग्राम खण्डसरा निवासी श्री गंगाधर यादव ने भी दिया है। उन्होंने लिखा है- आपके सूझबूझ और सफल नेतृत्व में सभी योजनाओं के तहत प्रदेश का विकास हो रहा है। इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं। लोक कला हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, लेकिन हमारे पुराने लोक गीत, नृत्य और संगीत विलुप्त होने के कगार पर हैं। श्री गंगाधर यादव ने अपने पत्र में धान के कटोरा छत्तीसगढ़ को ज्ञान के कटोरा और कला के कटोरा के रूप में उल्लेखित करते हुए ‘कला आयोग’ में अनुभवी कलाकारों को नियुक्त करने का सुझाव दिया है। बिलासपुर जिले के रतनपुर निवासी श्री जनक राम साहू और ग्राम जरवाय, जिला दुर्ग निवासी श्री गणेश घृतलहरे ने भी कला आयोग बनाने और ग्राम सिंधौरी, तहसील खैरागढ़ जिला राजनांदगांव निवासी श्री कमलेश वर्मा ने लोक कलाकारों के लिए एक अलग संस्था गठित करने का सुझाव दिया है। उनके सुझाव भी परीक्षण के लिए संस्कृति विभाग को भेजे गए हैं। सहसपुर लोहारा जिला कबीरधाम के श्री चतुरराम साहू और श्री विजय वैष्णव, बेलसोण्डा जिला महासमुन्द के श्री अनिल चन्द्राकर और नवागांव जिला मुंगेली के श्री विशेषर साहू ने भी छत्तीसगढ़ की लोक कलाओं के संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री से आग्रह किया है। 
आदर्श नगर दुर्ग निवासी साहित्यकार श्री महावीर अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कुछ इन शब्दों में अपनी बात रखी है- ‘रमन के गोठ’ कार्यक्रम दिल से निकली आवाज है और दिमाग को सही दिशा देने में कामयाब है। अम्बिकापुर (सरगुजा) निवासी श्री कमलेश सिंह ने ‘रमन के गोठ’ को एक सार्थक पहल बताते हुए सुझाव दिया है कि कौशल उन्नयन कार्यक्रम को स्कूलों से जोड़कर चलाया जाए और प्रत्येक हायर सेकेण्डरी स्कूल में कौशल उन्नयन केन्द्र बनाया जाए तो अच्छे परिणाम आएंगे। मुख्यमंत्री ने उनका सुझाव परीक्षण के लिए स्कूल शिक्षा, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और रोजगार विभाग को भेजा है। 

 

क्रमांक- 4781/स्वराज्य