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‘रमन के गोठ’ : आकाशवाणी से प्रसारित होने वाला विशेष कार्यक्रम (दिनांक 10 जनवरी, 2016, समय प्रातः 10.45 से 11.00 बजे तक)
 Posted on 10/01/2016
 

श्रोताओं नमस्कार!
(उद्घोषक की ओर से)

आकाशवाणी के महत्वपूर्ण प्रसारण ‘‘रमन के गोठ‘‘ की पांचवीं कड़ी के प्रसारण के अवसर पर हम आपका हार्दिक स्वागत करते हैं, अभिनंदन करते हैं। आज एक बार फिर हम राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ आकाशवाणी के स्टुडियो में उपस्थित हैं। 

  • श्रोताओं ! इस कार्यक्रम के पिछले 4 प्रसारणों में राज्य के ‘‘इब से इन्द्रावती’’ तक राजनांदगांव से रायगढ़ तक सभी लोगों ने इसके ‘‘कलेवर’’ को पसंद किया है, और मुख्यमंत्री जी आम लोगो के दिलों को छूने मे सफल हो सके हैं। इसलिए एक श्रोता ने हमें पत्र लिखकर कहा भी है, कि ‘‘रमन के गोठ’’ अब ‘‘हमर गोठ’’ बन चुका है। यह सही है, वास्तव मे बहुत कम समय में जन-जन को छूने वाली आवाज बन गई है, ‘‘रमन के गोठ’’। इस सफलता के लिए मुख्यमंत्री जी हम आपको बधाई देते है।
  •     तो आईये, श्रोताओं हम सभी सुनें डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री जी को जिन्हें सुनने के लिए आप प्रतीक्षा कर रहे हैं। ताकि अधिक से अधिक समय हम उन्हें दे सकें।

मुख्यमंत्री जी द्वारा-छत्तीसगढ़ी भाषा में

  • छत्तीसगढ़ के मोर जम्मो भाई बहिनी सियान अउ संगी जहुरियां मन ला मोर जोहार। ‘‘रमन के गोठ‘‘ के मासिक प्रसारण के कार्यक्रम में रेडियो के माध्यम से मैं ह आज 5वां बार आप मन संग चर्चा करे बर आए हवं। एखर पहिली 4 माह ले, मै ह सरलग हर महिना चर्चा करत हववं, जेमा आप सब मन के सुख-दुख के गोठ होये हवै। मोला बहुत खुशी हे, कि आप मन मोर गोठ ला न केवल ध्यान से सुनथौं, बल्कि मोला बहुत अकन उपयोगी सलाह भी चिट्ठी के माध्यम से भेजथाैं।
  • सबले पहिली मैं ह आप सब ला नवा साल के बधाई देवत हववं। भगवान से मोर प्रार्थना हे, के नवां साल आप अउ आप के परिवार बर खुशहाली लावय। मोर शुभकामना हे, के जउन भी अपन जिदंगानी के बेहतरी बर आप मन सपना देखे हवव, ओला भगवान ह, जरूर पूरा करय।

मुख्यमंत्री जी द्वारा-हल्बी बोली (भाषा) में

  • छत्तीसगढ़ चो मोचो सपाय भाई-बहिन, पिलामन और सियान सजन आरू संग जंवरेया मन के मय करेंसे जुहार। ’’रमन के गोठ’’ मयना ने प्रसारण होतो कार्यक्रम ने रेडियो ले मय आजी ए हार संगे पांच हार होली, आपन मन संगे गोठयातो काजे इलेसे। एचो ले पहिल चार मयना ले मय सरलगा गोट बात करते अंयसे, जेताने आपन मन संगे सुख दुःख चो गोट, गोटयातोर होली से। मोके खूबे हरीक लागेसे कि आपन मन मोचो गोठ के धियान देउन सुनासाहास पाहरले मोके खूबे असन नंगत सलाह बले चिठी लिखुन पठावासाहास।
  • सबले पहिल आजी मय आपन मन के नुवा बरक चो बधाई देंयसे। भगवान के मय बिनती करेंसे कि नुवा बरक, आपन आरू आपन मनचो परिवार ने हरिक उदिम आनो। मोचो शुभकामना आय कि आपलो जिवना चो हरिक उदिम काजे आपन जे बले सपना दखला साहास, भगवान के गुहार करेंसे, हुन पूरा होओ। 

मुख्यमंत्री जी द्वारा-सरगुजिहा बोली (भाषा) में

  • छत्तीसगढ़ कर मोर सबो भाई-बहिन, सियान अउ संगता मन ला मोर जोहार। ’’रमन के गोठ’’ कर मासिक प्रसारण कर कार्यक्रम में रेडियो कर जरिया से मैं आज पांचवां बार राउर मन संग चरचा करे बर आए हों। एकर ले पहिले चार महिना ले मैं सरलग हर महीना चरचा करत हों-जेमे राउर मन संग सुख-दुख के गोएठ होवत हे। मोके बहुत खुशी है, कि रउरे मन मोर गोएठ ला धियान से सुनथा अउर चिट्ठी कर जरिया से जरूरी सलाहो ला भेजथा।
  • सबले पहिले मै सबो झनला नावासाल कर बधाई देहत हों । भगवान ठे मोर विनती है, कि नावासाल राउर के अउ राउर कर घर-परिवार बर खुशहाली लाये। मोर शुभकामना है, कि अपन जिनगी ला सुघर बनाए बर राउर मन जो भी सपना देखे हा ओला भगवान हर जरूर पूरा करही। 

मुख्यमंत्री जी द्वारा-छत्तीसगढ़ी भाषा में ‘‘छेर-छेरा’’

  • 24 जनवरी के ‘‘छेर-छेरा पुन्नी’’ के तिहार परत हे। हमर छत्तीसगढ़ मं ‘‘छेर-छेरा पुन्नी’’ के तिहार ला गांव-गांव मं मनाये के परंपरा हे। ऐ तिहार हमर राज्य के मुख्य फसल धान के लुअई-मिसाई के काम के सिराये के बाद मनाये जाथे। अउ ये तिहार के दिन गांव-गांव मं लइका मन घरो-घर जाके, ‘‘छेर-छेरा, माई कोठी के धान ला हेर हेरा‘‘, कहिथे, अउ गांव वाला मन अपन-अपन सामर्थ के अनुसार धान ला भेंट मे देथे। मै हं ‘‘छेर-छेरा पुन्नी’’ के तिहार म अपन सब्बों किसान भाई-बहिनीं अउ सियान मन ला बधाई देवत हौं।

मकरसंक्रांति

  • भाईयों और बहनों ! 15 जनवरी को मकरसंक्रांति का महत्वपूर्ण त्यौहार होगा। इस अवसर पर ‘‘ब्रह्म-मूहूर्त‘‘ में नदियों और सरोवरों में स्नान तथा तिल दान एवं तिल व गुड़ से निर्मित व्यंजनों के ग्रहण व दान की परंपरा है। इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करता हैं। मै सभी को मकरसंक्रांति पर्व की बधाई देता हूॅ।

गणतन्त्र दिवस की शुभकामना

  • 26 जनवरी को हम अपने राष्ट्र के गणतंत्र की 66वीं वर्षगांठ मनायेंगे। इस राष्ट्रीय महापर्व के अवसर पर मैं राज्य की समृद्धि, सुशासन और राज्यवासियों की खुशहाली हेतु अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए इस गौरवशाली दिवस पर राज्यवासियों को बधाई देता हॅू।


मुख्यमंत्री जी द्वारा-हिन्दी भाषा में युवा-उत्सव

  • साथियों ! नया वर्ष नया संकल्प और नयी दिशा में अग्रसर होने का अवसर होता है। मुझे आपको यह जानकारी देते हुए ख़ुशी हो रही है, कि हमारे प्रदेश मे नव वर्ष की शुरूआत जनवरी माह में दो ऐसे कार्यों से हो रही है, जिसका दूरगामी, सकारात्मक परिणाम आने वाली पीढ़ी पर पड़ेगा। 
  • मै इस क्रम में सबसे पहले उल्लेख करना चाहता हॅू, कि आज से 2 दिन बाद भारत मां के महान सपूत एवं पथ प्रदर्शक स्वामी विवेकानंद जी की जंयती 12 जनवरी को होगी। जिसे पूरे देश में ‘‘युवा-दिवस’’ के रूप में प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है। 
  • इस अवसर पर मुझे यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है, कि भारत सरकार द्वारा घोषित 20वां ‘‘राष्ट्रीय युवा उत्सव’’ का आयोजन रायपुर में 12 से 16 जनवरी, 2016 तक किया जा रहा है। हमारे लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है, कि स्वामी विवेकानन्द के बचपन का दो साल छत्तीसगढ़ मे बीता था, और माना जाता है कि अपने जन्म और कर्म-स्थल कोलकाता के अलावा किसी भी स्थान पर इतना समय उन्होनें नहीं बिताया, जितना छत्तीसगढ़ में बिताया था। इसलिए ‘‘राष्ट्रीय युवा उत्सव‘‘ के आयोजन की मेजबानी करते हुए हमे विशेष गौरव का बोध हो रहा है। 
  •  इस राष्ट्रीय युवा उत्सव में देश के सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के लगभग 6 हजार युवा शामिल हो रहे हैं, तथा 18 विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं में प्रत्येक राज्य के कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। जिसमें लोकनृत्य, लोकगीत, नाटक, विभिन्न शास्त्रीय नृत्य व शास्त्रीय रागों पर आधारित वादन जैसे- तबला, हारमोनियम, गिटार, सितार, वीणा, मृदंगम, बांसुरी; शास्त्रीय गायन एवं तात्कालिक भाषण की प्रतियोगिता भी होगी। 
  • इस युवा उत्सव में विभिन्न राज्यों के युवाओं द्वारा हस्तशिल्प कला का भी प्रदर्शन किया जाएगा तथा ललित कला, पेंटिंग आदि भी बनाई जाएगी, जिसे देखकर पूरे देश के ‘‘युवा-कौशल‘‘ का आनंद लिया जा सकता है।
  • इस आयोजन को ‘‘युवा-कृति’’ का नाम दिया गया है।
  • इस उत्सव का शुभंकर ‘‘राज्य पशु वन भैंसा’’ को बनाया गया है, जो बस्तर के प्रसिद्ध नृत्य की मुद्रा में है। यह बलशाली है, तथा देश के युवाओं को सुदृढ़ शारीरिक सौष्ठव का संदेश देता है, इसके नृत्य की मुद्रा उत्सव का आभास करती है।
  • इस शुभंकर का नाम “संगी“ रखा गया है, जिसका अर्थ है दोस्त, तथा यह अपने नाम के अनुरूप युवाओं के मध्य सौहार्द्र  एवं मैत्री का संदेश देता है। 
  • इस आयोजन का ‘‘लोगो‘‘ घूमता हुआ चक्र है तथा इसकी विशेषताओं में मशीन का एक महत्वपूर्ण भाग गेयर है, जो "Skill –India”  का परिचायक है। ‘‘लोगो‘‘ में ‘‘तुरही‘‘ का प्रदर्शन किया गया है, जो विश्व के प्राचीनतम वाद्य यंत्र के माध्यम से संगीत की दुनिया का आभास कराती है। 
  • युवक एवं युवतियां नृत्य की मुद्रा में है, जो देश में उल्लास एवं आनंदमय वातावरण का परिचायक है। नृत्य की मुद्रा में आदिम जनजाति क्षेत्र बस्तर का नृत्य है, जोे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का परिचायक है। 
  • मै चाहता हॅू, कि इस अवसर पर हमारे छत्तीसगढ़ की युवा प्रतिभायें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रर्दशन करें, और साथ ही साथ अपनी मेहमान-नवाजी से भी हम पूरे देश का दिल जीत लें, ऐसा प्रयास हमारा होना चाहिए।

आंगनबाड़ी गुणवत्ता अभियान

  • भाईयों और बहनों ! हमारा मानना है कि राज्य के विकास के लिए जितनी जरूरत सड़क, रेलमार्ग, पुल-पुलिया, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल आदि जैसे अधोसंरचना के निर्माण की है, उतना ही या उससे ज्यादा जरूरत नई पीढ़ी के निर्माण की भी है और नई पीढ़ी का निर्माण शिक्षा और स्वास्थ्य के बल पर ही होता है। 
  • और इसी संदर्भ में मै आपसे चर्चा कर रहा हूॅ, नए साल मे हमारे राज्य मे प्रारंभ होने जा रही एक नई योजना की। नए साल के अवसर पर हमनें प्रदेश में 4 जनवरी से ‘आंगनबाड़ी गुणवत्ता उन्नयन अभियान’ प्रारंभ किया है, जो 13 जनवरी, 2016 तक चलेगा।
  • जैसा कि आप जानते हैं, आंगनबाड़ी केन्द्र किशोरियों, गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं की देखरेख का एक प्रमुख स्थान है। इसलिए पिछले 10 वर्षों में आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या 21 हजार से बढ़ाकर हमने 50 हजार कर दी है। इससे लाभान्वित हितग्राहियों की संख्या भी 13 लाख से बढ़कर 25 लाख हो गई है। 
  • हमारा प्रयास इन 50 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों की गुणवत्ता में और अधिक सुधार लाने का है, ताकि इन केन्द्रों से मिलने वाली सेवाओं का पूरा लाभ हमारी गर्भवती माताओं व शिशुओं को मिल सके। 
  • भाईयों और बहनों ! मैने यह देखा है, कि हमारी मातायें बहनें घर परिवार की चिन्ता पहले करती है। परिवार के सदस्य को पहले खाना खिलाती है, बचा हुआ खाना अंत में वो खाती हैं। हमे ध्यान रखना चाहिए कि, हमारी बहने और मातायें कुपोषण का शिकार न हों। हमारी गर्भवती बहनों और माताओं को ज्यादा पोषण आहार की जरूरत होती है। और ये परिवार की जवाबदारी है, कि पोषण आहार की व्यवस्था करें और उन्हें नियमित रूप से आंगनबाड़ी जाने के लिए प्रेरित करें।
  • इन आंगनबाड़ियों के माध्यम से हमने कुपोषण के खिलाफ एक महा-अभियान भी छेड़ा है। हमने विगत 12 वर्षों में राज्य में कुपोषण की दर 52 प्रतिशत से घटाकर 32 प्रतिशत लाने में सफलता हासिल की है और अब हमारा लक्ष्य 2016 के अंत तक कुपोषण को 25 प्रतिशत से नीचे लाने का है। 
  • ‘आंगनबाड़ी गुणवत्ता उन्नयन अभियान’ के अंतर्गत सरकार का पूरा ध्यान आंगनबाड़ी केन्द्र की गतिविधियों पर रहेगा। मंत्रीगण, संसदीय सचिवगण, विधायक, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि, नगरीय निकायों के प्रतिनिधि के साथ-साथ व्यापक जनभागीदारी के तहत आंगनबाड़ी से जुड़े कार्यों की गुणवत्ता का परीक्षण और सुधार के कदम उठाए जाएंगे।
  • इस अभियान के दौरान ‘आंगनबाड़ी-मित्रों’ और ‘बाल-मित्रों’ द्वारा भी बड़ी भूमिका निभाई जा रही है। कुपोषित बच्चों को स्वेच्छा से गोद लेने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। अभियान के दौरान पोषण आहार का वितरण आंगनबाड़ी एवं कुपोषित बच्चों को गोद दिलाने का क्रियान्वयन, रेडी टू ईट यूनिट तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों के निरीक्षण और पोषण मेले का आयोजन भी किया जा रहा है। साथ ही संबंधित समुदाय आंगनबाड़ी केन्द्रों व बच्चों के कुपोषण तथा अन्य संबंधित विषयों पर चर्चा भी की  जा रही है। 
  • मुझे विश्वास है, कि प्रदेशवासियों के सहयोग से वर्ष के शुरूआत में प्रारंभ इस अभियान का अच्छा परिणाम प्राप्त हो सकेगा, तथा अधिक स्वस्थ-शिक्षित नई पीढ़ी के निर्माण से हम जरूर सफल होंगे। 
  • मै यह अपील करता हूॅ, कि जो भी व्यक्ति एवं संस्था इस अभियान से जुड़ना चाहते हैं, वे अधिक से अधिक कुपोषण दूर करने के इस पवित्र अभियान से अवश्य जुड़ें। इस अभियान से जुड़ने वाले सभी लोगो का मै स्वागत करता हूॅ।
  • सूखा राहत
  • प्रिय भाईयो और बहनों ! हमारे प्रदेश के अन्नदाता किसान भाई इस वर्ष सूखे से पीड़ित हैं। मै उनकी परेशानी को स्वयं किसान होने के नाते अच्छी तरह से समझता हूॅ। प्राकृतिक आपदा के आगे हमे कई बार विवश हो जाना पड़ता है। 
  • प्रदेश की 117 तहसीलों में सूखे की स्थिति है। इन सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जरूरतमंदों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘‘मनरेगा‘‘ के तहत् साल में 150 दिन के स्थान पर अतिरिक्त 50 दिन का रोजगार देने का निर्णय हमने लिया है। जिससे सूखाग्रस्त क्षेत्रों में 200 दिन का कार्य प्रभावितों को मिल सके। वर्तमान में ‘‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना‘‘ के तहत् राज्य के 8000 से अधिक ग्राम पंचायतों में रोजगारमूलक कार्य प्रारंभ कर दिए गए हैं, जिसमें 10 लाख से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। मैंने इनके कार्यों में मजदूरी भुगतान 15 दिन के भीतर करने के निर्देश भी दिए हैं।
  • मैने सूखा प्रभावित किसान भाईयों के संबंध मे शासन द्वारा जो रियायते दी गई है उसके बाबत् पहले भी विस्तारपूर्वक चर्चा की है। इसी कड़ी में सूखा प्रभावित क्षेत्रों मे हमने किसान भाईयों के भू-राजस्व तथा सिंचाई उपकर को पूरी तरह माफ कर दिया है।
  • इसी प्रकार आर.बी.सी. 6(4) के प्रावधानों के तहत 33 प्रतिशत से ज्यादा हानि वाले असिंचित क्षेत्र के किसानों को 6,800 रूपये प्रति हेक्टेयर तथा सिंचित क्षेत्र वाले किसानों को 13,500 रूपये प्रति हेक्टेयर की राहत राशि दी जा रही है। मैने निर्देश जारी किया है, कि यह राहत राशि 31 जनवरी तक बांट दी जाये।
  • वर्ष 2015 में कृषि कार्य हेतु लिए गये ऋण के 75 प्रतिशत राशि को 15 मार्च 2016 तक जमा करने पर 25 प्रतिशत ऋण माफ करने का भी निर्णय हमने लिया है।
  • साथ ही जो किसान यह ऋण नहीं पटा पाये हैं, उन्हें अल्प अवधि ऋण को ब्याज रहित मध्यकालीन ऋण में परिवर्तन की सुविधा हम दे रहे है। इससे लगभग 5 लाख किसान परिवारों को लाभ मिलेगा।
  • 37 प्रतिशत तक के आनावरी वाले सूखा प्रभावित गांवों में भी ऋण को परिवर्तित कर वर्ष 2015-16 मेे 30 प्रतिषत, वर्ष 2016-17 में 50 प्रतिशत और 2017-18 में 20, प्रतिशत वार्षिक ब्याज रहित किशतों मे ऋण भुगतान की सुविधा किसान भाईयो को दी जायेगी।
  • इसी प्रकार 20 हजार हेक्टेयर में मक्का उत्पादन के लिए 4 सौ मिट्रीक टन मक्का बीज के मिनीकिट निःशुल्क वितरित किये जायेंगें। 
  • मुझे मालूम है, कि सूखा प्रभावित किसान भाईयों के विवाह योग्य बेटियां के हाथ पीले करने के मांगलिक कार्य को रोका नहीं जा सकता। इसे ध्यान में रखते हुए ‘‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’’ के तहत दी जाने वाली राशि, जो अब तक 15 हजार रूपये दी जाती थी, उसे दुगुना बढ़ाकर 30 हजार रूपये करने का निर्णय भी हमने लिया है।
  • किसान भाईयों ! प्रत्येक जिले में ‘‘किसान मितान केन्द्र‘‘ स्थापित कर आपकी समस्याओं को सुनने और उसके निराकरण करने की व्यवस्था की गई है। इन केन्द्रो में आप टेलीफोन से भी अपनी समस्या रख सकेंगें। सभी ग्राम पंचायतो में इसलिए ‘‘किसान-संगवारी केन्द्र‘‘ किसानों की मदद के लिए बनाये गये है। आप अपनी समस्या उन्हें भी बता सकते हैं।
  • मैं आप सभी से विनम्र निवेेदन तथा अपील भी करता हूँ, कि जीवन में उतार-चढ़ाव, सुख-दुख तो आते ही रहते हैं, लेकिन ऐसे क्षणोें मे हमें हिम्मत से काम लेना होगा। ऐसे दुख और परेषानी केेे क्षणोें मेें, मै और मेरी पूरी सरकार आपके साथ खड़ी है। मेरा अनुरोध है, आप भी वर्तमान की विपरीत परिस्थितियों का हिम्मत से सामना करें। छत्तीसगढ़ महतारी का आर्षीवाद सदैव हम सभी पर बना रहे, यही कामना है।
  • मैं अगले माह की 14 फरवरी को ‘‘रमन के गोठ‘‘ कार्यक्रम मे सुख-दुख की बात साझा करने फिर आपके बीच उपस्थित होऊंगा। आप सभी को मेरा सादर नमस्कार।

जय जोहार जय छत्तीसगढ़