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‘रमन के गोठ’ : आकाशवाणी से प्रसारित विशेेष कार्यक्रम (दिनांक 14 फरवरी, 2016, समय प्रातः 10.45 से 11.00 बजे तक)
 Posted on 14/02/2016
 

उद्घोषक की ओर से श्रोताओं नमस्कार!

   आकाशवाणी के महत्वपूर्ण एवं अभिनव प्रसारण “रमन के गोठ” कार्यक्रम के छठवीं कड़ी के अवसर पर हम आप सभी का हार्दिक स्वागत करते हैं, अभिनंदन करते हैं।

  •    श्रोताओं ! आज फिर से हम एक बार हमारे राज्य के मुखिया डॉ. रमन सिंह के साथ आकाशवाणी के स्टुडियो में उपस्थित हैं।
  •     रमन के गोठ कार्यक्रम की शुरूआत 13 सितम्बर, 2015 को की गई थी, जब डॉ. रमन सिंह ने इस कार्यक्रम के माध्यम से पहली बार राज्य के ढाई करोड़ लोगों को वार्तालाप शैली में संबोधित किया था। 
  •     तब श्रोताओं वास्तव में हमें यह पता नहीं था कि यह कार्यक्रम इतना अधिक लोकप्रिय हो जाएगा तथा राज्य के कोने-कोने से श्रोतागण इसके प्रसारण का बेसब्री से इंतजार करते हुए इसे ध्यान से सुनेंगे। 
  •     आज जितनी बड़ी संख्या में श्रोताओं के पत्र हमें इस कार्यक्रम के बारे में प्राप्त हो रहे हैं, वे हमारे लिए सुखद क्षण जैसे हैं। मात्र 5 माह में आपसे इतना प्यार और दुलार इस कार्यक्रम को प्राप्त हुआ है, इसके लिए हम सभी श्रोतागणों के प्रति हृदय से आभारी हैं।
  •     साथ ही हम आभार व्यक्त करते हैं, हमारे मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के प्रति, जो वास्तव में दूरदृष्टि से युक्त एक ऐसे राजनेता हैं, जो निश्चित रूप से जनता की नब्ज पर हाथ रखना जानते हैं और यह उन्हीं की परिकल्पना थी, कि राज्य के मुखिया होने के नाते जनता के सुख-दुख से जुड़ते हुए वे सीधे ही आपसे बातचीत करें और ऐसा पहल करने वाले वे सहज ही देश के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। 
  •   तो आईये, सुनतेे हैं हमारे लोकप्रिय एवं दूरदृष्टा मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को।

मुख्यमंत्रीजी द्वारा- छत्तीसगढ़ भाषा में

  •     मोर छत्तीसगढ़ राज के सब्बो भाई-बहिनी, संगी संगवारी, जहुंरिया, सियान अऊ दाई-माई मन ला जय जोहार।
  •    आज ले ठीक 5 महीना पहिली सितम्बर के 13 तारीख के मैं हं “रमन के गोठ” के कार्यक्रम मं आप मन संग गोठियाए रेहेवं। तब मैं हं नई जानत रेहेंव कि आप सब मन के अतेक मया मोला मिलही। 
  •     आप मन से जऊन प्यार, दुलार मोला मिलथे, तेखर बर मैं हं आप सबके आभारी हवं। मोला ए महिना मं अब्बड़ अकन चिट्ठी राज के कोना-कोना से मिले हे, जेमा कतको सुझाव अऊ कतको शिकायत के चिट्ठी आय हवय। ऐखर साथ ही बड़ संख्या में मोला मोर भाई-बहिनी मन ए कार्यक्रम के बड़ई मं घलोक चिट्ठी लिखे हे। 
  •     जिला सरगुजा ले भाई कमलेश सिंह, भिलई दुरूग ले श्याम बहादुर सिंह, गरियाबंद ले योगेश्वर साहू, व योगेश धु्रव, कांकेर ले संदीप कुमार साहू, जांजगीर चांपा ले संतोश थवाईत, महासमुंद ले गिरीश कुमार शर्मा, गुन्नू राम रजक, राजनांदगांव ले जागेश्वर देवांगन, श्रीमती कचरा बाई देवांगन, गणेश वर्मा, राजेंद्र कुमार दामले, श्रीमती कांतिबाई दामले, सुलोचना साहू, राकेश कुमार, मानवेंद्र साहू, बलौदाबाजार-भाटापारा ले डॉ. टी.आर.साहू, भूधर प्रसाद वर्मा, घनश्याम प्रसाद, शिवकुमारी व हेमलता वर्मा, प्रदीप जैन, धमतरी ले दीपक कुमार साहू, शिवकुमार साहू, उमेंद्र कुमार निषाद, मोहेश्वरी देविका, पुनूराम साहू, बेमेतरा ले भुवनदास जांगड़े, कोरबा ले चंद्रपाल मरावी, कवर्धा ले कमलकांत गुप्ता, गोविंदा धुर्वे अऊ अईसन बहुत अकन चिट्ठी आए हे। 
  •    मैं हं सब्बो चिट्ठी ल पढ़ के आप मन के सुझाव अऊ शिकायत में जरूर कार्यवाही करहूं।

राजिम कुंभ 

  •   अभी हमन सब बसंत पंचमी के तिहार ल मनाए हन, अऊ अब सब ले पहिली मैं हं छत्तीसगढ़ के सब्बो भाई बहिनी मन ला माघी पुन्नी, जऊन हा 22 फरवरी के दिन परथे, ओ दिन शुरू होवईया हमर राज के राजिम कुंभ मेला के बारे में चर्चा करना चाहाथौं। 
  •   राजिम में महानदी, पैरी अऊ सोंढूर, ऐ तीनों नदी के संगम हे, अऊ इही त्रिवेणी के कारण राजिम ल छत्तीसगढ़ के प्रयाग कहे जाथे।
  •     हमर राजिम कुंभ ह देश में अब्बड़ लोकप्रिय होगे हे, अऊ ऐ ह माघी पुन्नी ले शुरू होके 07 मार्च, महाशिवरात्रि तक चलही। अऊ ए दौरान गांव-गांव ले कुंभ स्नान करे बर हमर सब भाई बहिनी मन आही, तेखर पूरा व्यवस्था शासन डहर ले करे जाथे। 
  •     22 फरवरी के पुन्नी स्नान, 02 मार्च के जानकी जयंती अऊ 07 मार्च के महाशिवरात्रि पर्व स्नान होही।
  •     देश भर के ज्ञानी, साधु, महात्मा, शंकराचार्य, महामंडलेश्वर आदि मन ऐ कुंभ मेला मं शामिल होए बर आवत हे, जेखर सूचना हमन ला प्राप्त होए हे। 
  •     ए दौरान बड़े-बड़े संत महात्मा के सत्संग अऊ आध्यात्मिक प्रवचन के अवसर भी हम सबला मिलही। 
  •    मैं हं आप सबला राजिम कुंभ मेला में शामिल होए बर “पिंवरा चांऊर” के संग नेवता देवा थौं। आप मन लोग-लईका, परिवार के संग शामिल हो के ऐ अवसर के लाभ ला जरूर उठावव।

मुख्यमंत्रीजी द्वारा हिंदी भाषा में
स्कूल परीक्षा

  •     प्रश्न-माननीय मुख्यमंत्रीजी 22 फरवरी को प्रारंभ हो रहे राजिम कुंभ हेतु प्रदेशवासियों को आपने प्रदेश की संस्कृति व परंपरा के अनुरूप पीले चांवल से निमंत्रण दिया है, इसके दूसरे दिन 23 फरवरी सेे स्कूलों में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं भी प्रारंभ हो रही हैं। आप इस संदर्भ में विद्यार्थियों को क्या कहना चाहेंगे?
  •    उत्तर-यह बहुत अच्छा प्रश्न किया है आपने। सभी स्कूलों में 23 फरवरी से बोर्ड तथा इसी मध्य घरेलू परीक्षाएं होने वाली हैं। 
  •     चूंकि 10वीं एवं 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं होती हैं, इसलिए इसका महत्व बहुत अधिक है। इसमें प्राप्त सफलता बच्चों के सुनहरे भविष्य को तय करता है। इस परीक्षा में शामिल होने जा रहे समस्त बालक एवं बालिकाओं को मैं अपने हृदय से उनकी सफलता हेतु शुभकामनाएं देता हूं।
  •    प्यारे बच्चों! मैं आपको यह भी बताना चाहता हूं कि 23 फरवरी से प्रारंभ होकर 19 मार्च तक चलने वाली कक्षा 10वीं एवं 12वीं कीे इस बोर्ड परीक्षा में आप जैसे लगभग 08 लाख बच्चे पूरे राज्य में शामिल हो रहे हैं और इसके लिए 1986 परीक्षा केंद्र तैयार किए गए हैं। हमने यह भी व्यवस्था की है, कि आपको परीक्षा केंद्र में जाने में ज्यादा दूरी तय न करनी पड़े।
  •   आज से ठीक एक सप्ताह के पश्चात् आपकी परीक्षा प्रारंभ हो चुकी होगी। स्वाभाविक है, आप इसकी तैयारी में पूरे परिश्रम एवं मनोयोग से लगे होंगे। 
  •     मैं भी जब स्कूल में पढ़ता था, तो बोर्ड की परीक्षा में एक अलग ही रोमांच महसूस होता था। आपको यह भी बताना चाहता हूं कि तैयारी के दौरान मेरे मन में घबराहट होती थी, लेकिन साथ में यह उत्साह भी होता था कि जितना अधिक परिश्रम करूंगा, उतना ही अच्छा परीक्षा का परिणाम आएगा। 
  •     मुझे ख्याल है स्कूल परीक्षा के दौरान घर में हमारी माताजी हमें चार बजेे उठाया करती थी, चाय बनाया करती थी, और परीक्षा देकर जब हम घर लौटते थे, यदि परीक्षा अच्छा गया है तो उनके चेहरे में सबसे ज्यादा चमक हमने देखा।
  •     इसलिए आप और आपका पूरा परिवार इस परीक्षा में आपके साथ जुड़ा है। तो आप उन सब के लिए भी और अपने लिए भी उतना ही मेहनत करे ताकि परिवार का सम्मान आप बढ़ा सके। 
  •     लेकिन इसका यह अर्थ कदापि नहीं होता कि हम सभी को बहुत अच्छे नंबर मिलें। हर व्यक्ति में अलग-अलग योग्यताएं, क्षमताएं और विशेषताएं होती हैं तथा ईश्वर ने एक विशिष्ट उद्देश्य से हमें संसार में भेजा है। 
  •     इसलिए यदि किसी को कम नंबर प्राप्त होता है, तो इसमें हताश होने की आवश्यकता नहीं है। जीवन के संघर्ष में हमें इसी खेल भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए। 
  •    यदि असफलता मिलती है, तो फिर से बिना हताश हुए दुगुने प्रयास के साथ जुटना होगा। लेकिन कभी असफलता से हताश और निराश नहीं होना है, क्योंकि जितने भी सफल व्यक्ति दुनिया में हुए हैं कहीं न कहीं उन्हें असफलता मिली है, और उस असफलता को ही उन्होंनें सफलता का मूल मंत्र माना है। और जीवन में वो कामयाब हुए है, और राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनायी है। 
  •     मुझे भी मालूम है स्कूल के प्राथमिक परीक्षाओं में, मैं बहुत आगे नहीं हुआ करता था पर बाद में धीर-धीरेे-धीरे मुझे एहसास हुआ कि हमें यदि आगे बढ़ना है तो बाद की परीक्षाओं में हम और बेहतर करें। इसलिए आप आगे बढ़े मेरी शुभकामना आपके साथ है।
  •   प्यारे बच्चों! मैं फिर से आप सभी केे सुखद भविष्य की कामना करता हूं और आपने जो सपना देखा होगा, एक अच्छे डॉक्टर, एक अच्छे इंजीनियर, कलेक्टर, वैज्ञानिक, शिक्षक आदि बनने का, उसे ईश्वर अवश्य पूरा करे।

सखी-वन स्टॉप सेंटर

  •    मैं अपने प्रदेश की माताओं, बहनों और बेटियों से संबंधित एक बहुत ही महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय पर आज चर्चा करना चाहता हूं। हमारे देश की बेटी निर्भया के साथ दुर्भाग्य से जो घटना हुई, उससे हम सभी चिंतित हैं। 
  •     पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय समय पर मिल सके, इस हेतु कानून में जितनी सख्ती और कठोर दंड का प्रावधान हो सकता था, वह किया गया है, लेकिन महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध को रोकने के लिए सरकार और कानून के साथ-साथ समाज को भी अपनी भागीदारी निभानी होगी, ताकि महिलाओं के प्रति हिंसा और अपराध की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
  •    इन्हीं भावनाओं को ध्यान में रखते हुए हमने रायपुर में देश का पहला “सखी-वन स्टॉप सेंटर” प्रारंभ किया है, जिसका उद्घाटन केंद्रीय मंत्री श्रीमती मेनका गांधी ने 16 जुलाई, 2015 को किया था। 
  •    मैं माताओं, बहनों व बेटियों को यह बताना चाहता हूं कि आखिर ‘‘सखी-वन स्टॉप सेंटर’’ क्या है ? तथा इससे किस प्रकार आपकी मदद मिल सकती है? 
  •    इस सेंटर में पीड़िता को एक ही स्थान पर सभी प्रकार की सुविधाएं जैसेः चिकित्सा, कानूनी सहायता, पुलिस सहायता, परामर्श उपलब्ध कराना, और इसके अतिरिक्त अस्थायी तौर पर 05 दिन तक आश्रय हेतु आवासीय सुविधा भी उपलब्ध है। 
  •   राज्य स्तर पर महिला हेल्प लाईन 181 टोल फ्री नंबर तथा कार्यालय का नंबर 0771-4061215 सखी-वन स्टॉप सेंटर में उपलब्ध है, जो 24 घंटे काम करता है।
  •    इस नंबर पर आप अपनी शिकायत दर्ज कर पुलिस, चिकित्सा और परामर्श संबंधी सेवाएं ले सकती हैं। पुलिस में केस दर्ज होने से लेकर सारी औपचारिकताएं पूरी होने तक पीड़ित महिला को इस सेंटर में रखा जाता है।
  •  आपके मन में यह बात भी आ सकती है कि किस प्रकार के प्रकरणों को इस सेंटर में लिया जाएगा? घरेलू और, लैंगिक हिंसा, बलात्कार, दहेज से उत्पीड़न, एसिड अटैक, और टोनही के नाम से प्रताड़ना, कार्य स्थल पर लैंगिक उत्पीड़न, अवैध मानव व्यवहार, बाल विवाह, भ्रूण हत्या, सतीप्रथा, धोखाधड़ी, छेड़छाड़, रांग नंबर से परेशानी, पेंशन संबंधी समस्या, संपत्ति विवाद, दैहिक शोषण आदि रूप में जो भी हिंसा समाज में विद्यमान है, ऐसे सभी प्रकरणों में महिलाओं को एकीकृत सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सखी-वन स्टॉप सेंटर का संचालन किया जा रहा है।
  •   मैं आप सभी जो इस प्रसारण को सुन रहे हैं, उनके साथ सभी एन.जी.ओ. महिला संगठन, माननीय जनप्रतिनिधि, सरपंच व मीडिया से अनुरोध करता हूं कि शासन की इस पहल का अधिकाधिक प्रचार-प्रसार कर पीड़ितो को इसका लाभ लेने हेतु प्रेरित करें।   

तेंदूपत्ता संग्रहण

  •     प्रश्न- प्रदेश का 44 प्रतिशत हिस्सा वन आच्छादित है और बड़ी जनसंख्या तेंदूपत्ता संग्रहण एवं वनोपज पर आजीविका के लिए आश्रित है, जिसके संग्रहण एवं उपार्जन का सीजन प्रारंभ हो रहा है। इसके लिए आपकी क्या योजनाएं हैं?
  •     उत्तर -श्रोताओं! हमारे राज्य में लघु वनोपज कारोबार का लाभ आदिवासियों, वनवासियों को दिलाने हेतु नए-नए प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि उन्हें उनकी मेहनत का सही मोल मिलने के साथ साथ बिचौलियों से भी बचाया जा सके। 
  •     मैं यह जानता हूं कि तेंदूपत्ता, लाखों वनवासी भाईयों के रोजगार का साधन है, इसलिए यह बताना चाहता हूं कि संग्रहण की मौजूदा दर, जो 1200 रूपये प्रति मानक बोरा थी, उसे बढ़ाकर 1500 रूपये प्रति मानक बोरा कर दिया गया है। इससे प्रदेश के लगभग 15 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार लाभान्वित होंगे। वर्ष 2016 में 250 करोड़ की राशि इन तेंदूपत्ता संग्राहकों को वितरित की जाएगी।  
  •    मैंने यह भी निर्देश दिए हैं कि तेंदूपत्ता कार्य में संलग्न लगभग 10 हजार फड़मुंशियों के पारिश्रमिक में 5 रूपये प्रति मानक बोरा की वृद्धि की जाए, जिससे फड़मुंशियों को अब 25 रूपये प्रति मानक बोरा कमीशन मिलेगा।  
  •    इसी प्रकार हमने यह भी निर्णय लिया है कि अभ्यारण्य एवं टाईगर रिजर्व जैसे संरक्षित क्षेत्रों में निवासरत 25 हजार आदिवासी परिवारों को, जो तेंदूपत्ता संग्रहण नहीं कर पाते हैं, उन्हें 02 हजार रूपए की राशि प्रति परिवार मुआवजा के रूप में दी जाएगी।
  •     प्राथमिक लघु वनोपज समिति के प्रबंधकों का वेतन भी 8,000 रूपए से बढ़ाकर  10,000 रूपये प्रतिमाह करने का फैसला हमने लिया है। प्रदेश के 12 लाख 50 हजार तेंदूपत्ता संग्राहकों को एक जोड़ी चरण पादुका भी मुफ्त में वितरित की जाएगी।
  •    तेंदूपत्ता के साथ-साथ साल बीज, हर्रा, ईमली, लाख, चिरौंजी और महुआ टोरा जैसे लघु वनोपज को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य में खरीदने के लिए शासन की क्रय योजना में शामिल किया गया है और इसके जरिये 54 करोड़ रूपए  हमारे वनवासी भाईयों को वितरित होगी।
  •     मैं यह अपील करता हूं कि तेंदूपत्ता संग्रहण व लघु वनोपज के विक्रय में शासन की योजनाओं का लाभ लेकर बिचौलियों से दूर रहें।  

राज्य के युवाओं के लिए

  •     प्रश्न- माननीय मुख्यमंत्री जी, युवा किसी भी देश की उन्नति का आधार होते है, इस अवसर पर प्रदेश के युवाओं को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
  •    उत्तर -मैं अपने नौजवान साथियों को यह अवगत कराना चाहता हूं, कि शिक्षा गुणवत्ता  के साथ रोजगारपरकता पर हम ज्यादा जोर दे रहे हैं। विगत् 01 वर्ष में शासकीय आवासीय आदर्श महाविद्यालय रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, कांकेर, जगदलपुर प्रारंभ किए गए हैं। नया रायपुर में ट्रिपल आई.टी. और भिलाई में आई.आई.टी. की स्थापना का कार्य प्रगति पर है। सभी जिलों में लाईवलीहुड कॉलेज शुरू किए गए हैं।
  •    सभी विकासखंडों में कम से कम एक आई.टी.आई. खोलने का हमारा लक्ष्य है। साथ ही साथ हमनें युवाओं को सरकारी नौकरी में चयन का अधिक अवसर उपलब्ध कराने के हेतु 31 दिसम्बर 2016 तक सीधी भर्ती के पदों पर आयु सीमा 35 वर्ष से बढ़ाकर 40 वर्ष की है। 
  •     इसी प्रकार तृतीय श्रेणी के पदों पर अनुकम्पा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों में  10 प्रतिशत की अधिकतम सीमा को 01 वर्ष के लिए शिथिल भी किया गया है तथा तृतीय श्रेणी गैर कार्यपालिक व चतुर्थ श्रेणी के पदों के लिए साक्षात्कार का प्रावधान समाप्त किया गया है।   
  •    युवा दोस्तों, छत्तीसगढ़ के निर्माण के हमने 16 वर्ष पूरे किये, 21वीं सदी का यह सोलहवां वर्ष है। छत्तीसगढ़ के विकास में केन्द्र बिन्दु आप हैं, और आप ही छत्तीसगढ़ के कल के निर्माता हैं। आपकी ओर पूरा छत्तीसगढ़ देख रहा है। इसको सजाने में, संवारने में, इसको विकसित करने में आपकी ऊर्जा का हम उपयोग करना चाहेंगें। आप शिक्षित हों, आप प्रशिक्षित हों। 
  •     कौशल उन्नयन से सीधे जुड़े, शिक्षा के साथ सीधे जुड़े और सभी राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के ‘‘कॉम्पीटिटिव एक्जाम‘‘ में बैठे। इसके साथ ही साथ आप शिक्षित हो और कौशल उन्नयन के बाद आप रोजगार मांगने वाले नहीं रोजगार देने वाले की भूमिका आपकी हों। 
  •     मेरी यही शुभकामना है, कि आने वाला कल आपका बेहतर हो छत्तीसगढ़ को हम और आगे बढ़ाये। 
  •    मेरे नौजवान साथियों! आपसे मैं अपील करता हूं कि इन सुविधाओं का आप अधिक से अधिक लाभ उठाएं, आत्मनिर्भर बनें तथा देश एवं प्रदेश के विकास में अपना अमूल्य योगदान दें।   

मुख्यमंत्रीजी द्वारा-छत्तीसगढ़ी भाषा में

  •    ये हमर बर बहुत खुशखबरी के विषय हे, कि हमर प्रधानमंत्री 21 तारीख के छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिला के कुर्रूभाट में आवत हे। अऊ हमर गांव के विकास बर एक नवां योजना जेन देश मं पहली बार छत्तीसगढ़ मं जेखर शुरूआत होही। ’’श्यामाप्रसाद मुखर्जी रूर्बन योजना’’ ओखर शुरूआत करे बर आवत हे। मैं सबो भाई-बहिनी मन ला, सियान मन ला नेवता देवत हवंव, के आप प्रधानमंत्री जी के ए कार्यक्रम मं उपस्थित हों। छत्तीसगढ़ के विकास के एक नया अध्याय के शुरूआत होहीं, आप सबके उपस्थिति मं।
  •    मैं अगले महीने की 13 तारीख को पुनः इस कार्यक्रम मे आपके बीच उपस्थित होऊंगा। आप सभी को मेरा सादर नमस्कार।

 

“जय जोहार जय छत्तीसगढ़”