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‘रमन के गोठ’ : आकाशवाणी से प्रसारित विशेेष कार्यक्रम : (दिनांक 13 मार्च, 2016, समय प्रातः 10.45 से 11.00 बजे तक)
 Posted on 13/03/2016
 

उद्घोषक की ओर से
श्रोताओं नमस्कार!

  •    आकाशवाणी के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘‘रमन के गोठ’’ की 7वीं कड़ी के प्रसारण अवसर पर आप सभी का हार्दिक स्वागत करते हैं, अभिनंदन करते हैं।
  •    श्रोताओं! आज फिर से हमारे बीच हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए उपस्थित हैं।
  •    इस कार्यक्रम की 6वीं कड़ी की सराहना करते हुए बड़ी संख्या में पत्र प्राप्त हुए हैं, जिसमें जागेश्वर राम देवांगन, गंडई, जिला राजनांदगांव, योगेश्वर साहू, फूलझर, जिला गरियाबंद, भरत लाल दुबे, सरपंच पगबंधी, जिला दुर्ग, दुर्गाराम साहू और कुमारी साहू, चरडांेगरी, पिपरिया, पार्वती साहू और टिकेश्वरी साहू, हिसदा, आत्माराम यादव, भनपुरी, जिला दुर्ग, शिव चंद्राकर, दुर्ग चूड़ामन लाल बाड़दे, अमलीखुर्द, जयंती धु्रव, पटपर, जिला राजनांदगांव, कमलेश साहू, गिरौद, जिला धमतरी आदि हैं।
  •    कुछ पत्रों में बड़ी रोचक बातें श्रोताओं ने कही है। बिलासपुर जिले के मस्तूरी के राजकुमार पटेल कहते हैं कि ‘‘रमन के गोठ’’ का जब प्रसारण होता है, तो उसकी रिकॉर्डिंग करके, दूसरे दिन सोमवार को प्राईमरी और मिडिल स्कूल में सभी बच्चों को सुनाता हूं, जिससे मुझे बड़ी खुशी होती है। दीपक साहू, ग्राम गिरौद, जिला धमतरी से कहते हैं कि “सखी वन स्टॉप सेंटर” और “तेंदूपत्ता संग्रहण”, “कौषल विकास”, “राजिम कुंभ” और बोर्ड परीक्षाओं के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री जी ने उपयोगी जानकारी 6वीं कड़ी में दी है, जो सभी कोे अच्छी लगी।
  •    कमलकांत गुप्ता, पिपरिया से लिखते हैं कि ‘‘रमन के गोठ कार्यक्रम शुरू करने के बाद से रेडियों-श्रोताओं की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है, और आपका सीधा संवाद प्रदेश के लोगों से होने के कारण जन-सेवक के रूप में आपका नाम इतिहास के पन्नों मे दर्ज हो रहा है, और जनता आपको चौथी बार मुख्यमंत्री के रूप में चुनने को आतुर है।
  •   इसी प्रकार के और भी बहुत से पत्र प्राप्त हुए हैं, निष्कर्ष यह है कि गोठ में जिन विषयों को शामिल किया गया था, उसे प्रदेश की ढाई करोड़ जनता ने अपने दिल से पसंद किया है और पत्रों के माध्यम से अपनी भावनाओं को वे मुख्यमंत्री तक पहंुचाना चाहते हैं।
  •   श्रोताओं! ‘‘रमन के गोठ’’ कार्यक्रम द्विपक्षीय संवाद है, जिसमें मुख्यमंत्री जी के संबोधन की प्रतिक्रिया के तौर पर श्रोताओं के बड़ी संख्या में प्राप्त होने वाले पत्र इसकी सार्थकता को साबित करते हैं। उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया और आकाशवाणी को इस कार्यक्रम की लोकप्रियता से जो समर्थन प्राप्त हुआ है, उससे हम भी हर्षित हैं। 
  •   आईये श्रोताओं! हम सुनते हैं, हमारे जनप्रिय मुख्यमंत्री डां रमन सिंह को। मुख्यमंत्री जी आकाषवाणी के इस लोकप्रिय प्रसारण में आपका स्वागत है। 

मुख्यमंत्री जी द्वारा-छत्तीसगढ़ी भाषा में

  •    ‘‘रमन के गोठ’’ कार्यक्रम के 7वां प्रसारण के मौका मं सब्बो भाई-बहिनी, संगी-संगवारी, जहुंरिया, सियान अऊ दाई-माई मन ला डा. रमन के जय जोहार। 
  •    मोला ये जान के अच्छा लगिस कि पिछले ‘‘रमन के गोठ‘‘ मं मैं हं जऊन विषय मं आपसे बात करे रेहेवं, वो ह आप मन ला सुघ्घर लगिस। अऊ बड़ संख्या मं चिट्ठी लिख के आप मन मोला अपन मन के बात से अवगत कराए हव। ऐखर साथ ही बहुत अकन चिट्ठी मोला गांव, कस्बा, षहर के स्थानीय समस्या अऊ षिकायत के संबंध मं घलव मिले हे। तेन ल मैं हं पढ़ के जरूरी कार्यवाही करे बर संबंधित अधिकारी अऊ विभाग ल भेजत हवं।

श्रद्धांजलि

  •     आज के बात शुरू करे के पहिली मैं हं अपन ‘मन‘ के दुख ल आप मन के संग बांटना चाहाथौं। हमर सियान मन अईसन कहिथें कि “दुख ह बांटे ले कम होथे, अऊ सुख हा बांटे ले बाढ़थे।” 
  •    आप मन ला पता होही कि 2 मार्च के हमर छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध संत कवि ‘‘पवन दीवानजी’’ हम सब ला छोड़ के बैकुंठधाम सिधार गे। ‘‘पवन दीवान’’ ल छत्तीसगढ़ में कोन नई जानय? ओखर नाव ह परिचय के मोहताज नई ए। छत्तीसगढ़ के अईसन अनमोल हीरा, अऊ छत्तीसगढ़ महतारी के सपूत अईसे लगथे कि आज हमर हाथ ले गंवा गे हे। ‘‘पवन दीवानजी’’ खाली संत भर नई रिहिस हे, बल्कि जन-जागरण के प्रतीक रिहिन हे। छत्तीसगढ़ी भाषा में भागवत् कथा के माध्यम से गांव-गांव मं ओमन जऊन अलख जगाईन हे, अऊ संस्कार के बीजा बोए हें, तेन ल हमन कभू नई भूला सकन। 
  •     हमर छत्तीसगढ़ राज के बने मं ओखर बहुत बड़े योगदान हवय। अईसन महान संत अऊ कवि ‘‘पवन दीवान’’ ल मैं सुरता करत हवं, अऊ श्रद्धा-सुमन अर्पित करत हववं। 
  •  उखर मन में जीवन के अंतिम समय मं कौषल्या महतारी के मंदिर बनाए के बड़ इच्छा रिहिसे। ओमन कहाय कि मैं हं ऐखर सेती कौषल्या माता के मंदिर बनवाना चाहाथौं, ताकि दुनिया ल पता चल सकै कि छत्तीसगढ़ महतारी के कोख में अतका ताकत हे कि ओ हा राम कस भगवान ल जनम देथे। अईसन सोच अऊ विचार के रिहिन हमर ’’पवन दीवानजी’’। कौषल्या माता ह हमर छत्तीसगढ़ के बेटी रहिस। हम कौषल्या माता के मंदिर बनाए के ‘‘संत पवन दीवान’’ के इच्छा ला जरूर पूरा करबो। अऊ छः महीना के भीतर ‘‘पवन दीवान सुरता ग्रंथ’’ घलो तैयार करे के योजना हवय। जेमा ऊखर बारे में सबके सुरता ला संकलित करके लेखबद्ध करे जाही।

त्यौहार की शुभकामना

  •     अवईया 22 तारीख के गांव-गांव में होलिका दहन करे जाही अऊ 23 तारीख के होली के तिहार मनाए जाही। एक बात अऊ बीच मं बताना चाहाथौं 22 तारीख के ‘‘विश्व जल दिवस’’ पूरा दुनिया मं मनाथे। पानी ला बचाना हें, अऊ पानी ल बचाये बर पेड़ ल बचाना पड़ही। अऊ ‘‘विश्व जल दिवस’’ मं हम सबला ये संकल्प लेना हे। हमर जतका तिहार-बार हे, ओ सबो मं एक संदेस छिपे रहिथे। वईसने होली के तिहार में एक बहुत बड़ संदेस हम सब ल मिलथे अऊ वो संदेस हे “बुराई मं अच्छाई के विजय”। ऐ पावन अवसर मं मैं हां अपन सबो भाई-बहिनी मन ल अपील करत हवं कि आपस के राग-द्वेष ल भूला के भरपूर प्रेम अऊ उत्साह से ऐ तिहार ल हमन मनावन। लेकिन ऐ अवसर मं कोनो ल दुख अऊ तकलीफ देना, सरकारी संपŸिा ल नुकसान करना, हराभरा झाड़ ला काटना, रंग के जगह केवांच या कीचड़ जैसे पदार्थ चेहरा मं लगाना अईसन काम हमन न करन, न दूसर ल करन देवन, ऐखर संकल्प भी जरूरी हे, काबर कि अईसन मौका मं कई बार लड़ाई झगड़ा व हिंसा के घटना भी हो जाथे।  हमर ईसाई भाई-बहिनी मन के  27 तारीख के ‘‘ईस्टर‘‘ के तिहार मनाए जाही, मैं हं ‘‘ईस्टर‘‘ पर्व के सब ईसाई भाई-बहिनी मन ल शुभ कामना देवाथौं।   

मुख्यमंत्रीजी द्वारा हिंदी भाषा में

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

  •     मैं आपसे एक महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार साझा करना चाहता हूं। आज से कुछ दिन पहले 08 मार्च को ‘‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’’ मनाया गया। 
  •    हम इस अवसर पर समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान, जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता को दोहराते हैं।
  •   छत्तीसगढ़ी भाषा में जब “माई लोगन” शब्द का इस्तेमाल करते हैं, तो इसमें सभी आयु, वर्ग की महिलाएं शामिल होती हैं और इस प्रकार हम संपूर्ण ‘‘मातृ-षक्ति’’ के प्रति श्रद्धा का भाव व्यक्त करते हैं।
  •   ’’महिला सषक्तिकरण’’ के लिए छत्तीसगढ़ ने अनेक कदम उठाए हैं, जिसमें पंचायत चुनावों में 50 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देना भी शामिल है, जिसके कारण प्रदेश की पंचायतों में बड़ी संख्या में महिला पंच, सरपंच कार्यरत् हैं। 
  •   हमने महिलाओं के नाम पर संपत्ति की खरीदी करने पर ‘‘स्टॉम्प ड्यूटी’’ में छूट का कानून भी रखा है, ताकि संपŸिा पर नाम होने से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़े व भविष्य भी सुरक्षित रहे।
  •  प्रदेश की राशन दुकानों, मध्यान्ह भोजन योजना, आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन, गणवेश वितरण आदि में महिलाओं के स्वसहायता समूहों की भागीदारी है, जिससे माताओं की ममता और जतन का लाभ इन योजनाओं को मिल रहा है।
  •   छत्तीसगढ़ में बेटियों के जन्म पर “नोनी सुरक्षा योजना ” लागू की गई है। योजना के तहत गरीब परिवार की दो बेटियों के जन्म पर प्रत्येक नवजात बेटी के नाम पर राज्य सरकार 5 हजार रूपये बैंक में जमा करती है, और 5 साल तक 5-5 हजार जमा करते जब बेटी 18 वर्ष की हो जाती है, तो उसे 1 लाख रूपये मिलेंगें। 
  •    बेटियों को कक्षा पहिली से लेकर कॉलेज स्तर तक की निःशुल्क शिक्षा देने का प्रावधान किया गया है। सरकारी इंजीनियरिंग व पॉलिटेक्निक कॉलेज में भी गरीब की बेटियों को निःशुल्क शिक्षा देने की व्यवस्था है।
  •     हाई स्कूल में पढ़ने वाली बेटियों के लिए ’’निःषुल्क सरस्वती साईकिल योजना’’ लागू की गई है, जिसका लाभ हमारी बेटियां उठा रही हैं। 
  •     हमने गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में मदद के लिए ‘‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’’ संचालित की है। जिसमें सामान्य विवाह पर 15 हजार और विधवा विवाह पर 30 हजार रूपये की सहायता राशि देने का प्रावधान है।
  •     छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसने टोनही के नाम पर महिलाओं को प्रताड़ना से मुक्ति दिलाने हेतु ‘‘विधान सभा में टोनही प्रताड़ना निवारण कानून’’ बनाया है। जिसमें प्रताड़ित करने वालो के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान है।
  •     हमारे प्रदेश की महिलाओं ने अपनी चेतना और जागरूकता से बड़े-बड़े काम किए हैं।
  •   आप सब सुने होंगे कि, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 21 फरवरी को जब प्रदेश में आए थे, तो ऐसी ही महतारी श्रीमती कुंवर बाई यादव का सम्मान करते हुए मंच पर उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया। जिन्होनें धमतरी जिले के अपने गांव में बकरियां बेचकर पहला शौचालय बनवाया था। 
  •    प्रधानमंत्री जी को जब यह बात पता चली, तो उन्होंने कहा कि मैं छत्तीसगढ़ की इस ‘‘महान-महतारी’’ से मिल कर उनका आशीर्वाद लेना चाहता हूं ।
  •    निःस्वार्थ भाव से काम करने वाली महतारी को इतना बड़ा सम्मान मिल सकता है, इसका यह उदाहरण है तथा ‘‘छत्तीसगढ़-महतारी’’ का गौरव इससे बढ़ा है।

जन-औषधि स्टोर का शुभारंभ

  •    माननीय प्रधानमंत्री जी जब छत्तीसगढ़ के दौरे पर पिछले माह आए थे, तो छत्तीसगढ़ की धरती पर एक और क्रांति हुई। वह यह कि “जन औषधि केंद्र” प्रारंभ करने की पहल को देश में छत्तीसगढ़ ने सबसे पहले लागू किया। 
  •     ‘‘जन औषधि केंद्रो’’ का क्या महत्व है, इसके संबंध में, मैं आपको बताना चाहता हूं। देश में लगभग 80 प्रतिशत आऊटडोर और 60 प्रतिशत इनडोर पेषेंट का ईलाज निजी चिकित्सकों और अस्पतालों में होता है और ईलाज में खर्च का 80 प्रतिशत हिस्सा दवाओं में जाता है। 
  •    ब्रांडेड एवं जेनेरिक दवाईयाँ उपयोग में तो समान होती हैं। किन्तु ब्रांडेड दवाईयाँ जेनेरिक दवाईयों की तुलना में बहुत अधिक महंगी होती हैं। गुणवत्तायुक्त जेनेरिक दवाईयाँ उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने से सभी को लाभ मिलेगा। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुये केन्द्र सरकार द्वारा ‘‘जन औषधि स्टोर योजना  ( JAS ) शुरू की गई।
  •     इस योजना के अंतर्गत ‘‘जेनेरिक दवाईयों’’ के विक्रय हेतु ‘‘जन औषधि केंद्र’’ खोलने का प्रावधान है, तथा संस्थाओं को दुकान प्रारंभ करने हेतु 2 लाख रूपये तथा क्रियाशील पूंजी के रूप में 50 हजार रूपये भी देने का प्रावधान है। 
  •    मुझे खुशी है कि माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा हमारे प्रदेश में 21 फरवरी 2016 को ’’100 जन औषधि केंद्र’’ का शुभारंभ किया गया। 

जन्म-मृत्यु पंजीयन

  •    मेरे भाईयों और बहनों! आज मैं आप लोगों का ध्यान एक और महत्वपूर्ण विषय की ओर दिलाना चाहता हूं, जिसका संबंध आप सभी से है। 
  •    कानून के तहत् हर एक ’’जन्म-मृत्यु‘‘ का पंजीयन कराना अनिवार्य है। लंबे समय तक जागरूकता और जानकारी न होने से लोग इसके महत्व को नही समझते थे, जिसके कारण उन्हें आगे चलकर अनेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ता था, क्योंकि ‘‘जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र’’ हर नागरिक के जीवन का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। शासन की किसी भी योजना का लाभ लेने में ‘‘जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र’’ की आवश्यकता पड़ती है। 
  •   पूरे प्रदेश के ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों, नगर-निगम, नगर-पालिका, समस्त शासकीय अस्पताल इन सभी संस्थाओं में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र मुफ्त में बनाया जाता है। जन्म मृत्यु का पंजीयन 07 दिवस में कराना आवश्यक है।
  •    मेरी आपसे अपील है, कि ‘‘जन्म-मृत्यु’’ का पंजीयन अवश्य करावें। 

शाला प्रवेष उत्सव/निःशुल्क पाठ्य-पुस्तको का वितरण

  •   अब मैं स्कूल जाने वाले बच्चों के संबंध में कुछ बातें कहना चाहता हूं। इस वर्ष नया शैक्षणिक सत्र 01 अपै्रल 2016 से प्रारंभ होगा तथा 13 अप्रैल तक राज्य के समस्त शालाओं में ‘‘षाला प्रवेष उत्सव‘‘  आयोजित होगा। इस दौरान हम यह सुनिश्चित करें कि शाला जाने योग्य बच्चे, जो 06 वर्ष से अधिक उम्र के है, वे शाला प्रवेश से वंचित न रहे। 
  •    साथ ही जो बच्चे पहले से शालाओं में पढ़ रहे हैं, वे आगे भी अपनी पढ़ाई जारी रखें । 
  •   एक और बहुत महत्वपूर्ण बात मैं अभिभावकों व पालकों से करना चाहता हूं। वह यह कि नया सत्र आरंभ होने के साथ-साथ हम यह व्यवस्था सुनिश्चित कर रहे हैं कि 1लीं से 10 वीं तक के विद्यार्थियों को सभी विषयों की पाठ्य-पुस्तकों का निःशुल्क वितरण कर दिया जावे।
  •   इस वर्ष हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू माध्यम की पुस्तकों के साथ-साथ संस्कृत माध्यम की पुस्तकों का वितरण भी किया जायेगा तथा लगभग 59 लाख विद्यार्थियों को 2 करोड़ 91 लाख पुस्तकों का निःशुल्क वितरण किया जावेगा।

छात्र निराश न हो

  •    आये दिन बहुत सी घटनायें विद्यार्थियों के संबंध मंे सुनने को मिलती हैं। परीक्षा के रिजल्ट आ रहे हैं, जिनके पेपर कमजोर गये हैं। उनके मन में निराशा का भाव देखने को मिलता है, और पिछले कुछ दिनों में आत्महत्या की घटनायें हमारे बेटे-बेटियों में देखने को मिल रही हैं। 
  •   मैं आपसे इस अवसर पर इतना ही कहना चाहूंगा, पढ़ाई में यदि नम्बर कम आये हैं, एक विषय में यदि आप पीछे भी रह गये तो जीवन के सारे सफलता के दरवाजे बंद नहीं होने वाले हैं। 
  •   आत्मविश्वास के साथ आप आगे बढ़ें। जीवन में सभी महत्वपूर्ण व्यक्तियों ने जिन्होनें दुनिया में अपना नाम कमाया, कहीं न कहीं, कभी न कभी असफल जरूर हुए थे। असफलता हमें सफलता की नई मंजिल की ओर जाने का आत्मविश्वास देती है। आप डरे नहीं, संकोच न करे, मन में हीन भावना न लाए, आने वाली पढ़ाई की तैयारी  करें। 
  •    मैं आप सबसे एक बात और कहना चाहता हूॅ, कि आपको कोई शिकायत हो, कोई संदेह हो आपके पेपर और आपके नम्बर के संबंध में यदि आपको लगता है, आपके साथ बेइंसाफी हुई है, तो आप मुझसे सीधे संपर्क कर सकते हैं। दूरभाष पर मेरा नम्बर 0771-2331001 है, इस नम्बर पर आप सीधे मुझसे बात कर सकते है।
  •    आपकी समस्याओं को मैं सुनुंगा, जितना भी आवश्यक होगा मैं निश्चित ही आपकी मदद करूंगा।
  •    जीवन अनमोल है। इसे समाप्त ना करें। आगे बढे़ं ,दुनिया आपके साथ है।

बजट

  •  प्रश्न- माननीय मुख्यमंत्री जी, विगत 09 मार्च को आपने विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2016-17 का वार्षिक बजट प्रस्तुत किया, आपकी नजर में इस बजट की क्या विशेषताएं हैं?
  •     उत्तर- इस बार हमने 70 हजार करोड़ रूपये से ज्यादा की राशि का बजट प्रस्तुत किया। सबसे बड़ा जोर इसमें ‘‘शिक्षा’’ का रहा,      13 हजार करोड़ रूपये से ज्यादा की राशि हमने शिक्षा के लिए इसमें रखी है, और इसके साथ-साथ अकाल से जूझ रहे किसानों के लिए 2 हजार करोड़ की राहत राशि का प्रावधान भी किया है।
  •     इसमें 150 करोड़ रूपये के निःषुल्क धान बीज खरीदने की व्यवस्था की गयी है। इसके साथ ही साथ पेयजल हेतु 175 गांवों के लिए प्रावधान किया गया है। 
  •    इस बजट में विशेषता रही कि, हमने ‘‘स्वच्छ भारत अभियान‘‘ के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 400 करोड़ व मैदानी क्षेत्रों में 300 करोड़ रूपये की राशि का प्रावधान किया है। नगरीय शौचालयों हेतु राज्य के बजट में सब्सिडी राशि दोगुनी कर दी गई है, तथा स्वच्छता से संबंधित वस्तुओं को वैट से मुक्त किया गया है।
  •     इसलिए यह बजट छत्तीसगढ़ के लिए और खासतौर पर बस्तर और सरगुजा में नयी उम्मीद जगाने वाला है। इसके साथ-साथ हम छत्तीसगढ़ की ढ़ाई करोड़ जनता के जीवन में खुशहाली लाये, तरक्की लाये और विकास की नयी ऊचाईयों को छुये इस दृष्टि से ’’सबके साथ सबका विकास’’ अवधारणा पर हमने इस बजट को रखा है। निश्चित रूप से यह बजट सबके लिए मंगलमय होगा।
  •   साथियों! मैं अगले माह की 10 तारीख को पुनः इस कार्यक्रम मे आपके बीच उपस्थित होऊंगा। आप सभी को मेरा सादर नमस्कार।


जय जोहार जय छत्तीसगढ़