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​दुख बांटने से कम होता है: डॉ. रमन सिंह
 Posted on 13/03/2016
 

रायपुर, 13 मार्च 2016

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आकाशवाणी से आज प्रसारित ‘रमन के गोठ’ की 7वीं कड़ी के प्रसारण पर प्रदेश के नागरिकों से अपने मन की बात को साझा किया। उन्होंने संत कवि पवन दीवान के निधन पर अपने मन के दुःख को बांटते हुए छत्तीसगढ़ी में कहा कि ‘‘दुख है बांटे ले कम होथे, अऊ सुख हा बांटे ले बाढ़थे’’।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पवन दीवान जी केवल संत ही नहीं थे, बल्कि वे जन-जागरण के प्रतीक भी रहे। उन्होंने भागवत कथा के माध्यम से गांव-गांव में मानव प्रेम को प्रगाढ़ करने की अद्भुत अलख जगायी, जिसे हम कभी नहीं भूल सकते। डॉ. सिंह ने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण में पवन दीवान का बहुत बड़ा योगदान रहा है।
मुख्यमंत्री ने उनको दिल से याद करते हुए श्रद्धापूर्वक नमन किया और कहा कि उनके मन में जीवन के अंतिम समय में कौशल्या मां का मंदिर बनाने की बहुत इच्छा थी। पवन दीवान जी कहते थे कि ‘‘मैं इसलिए कौशल्या माता का मंदिर बनवाना चाहता हूं, ताकि दुनिया को यह पता चल सकें कि छत्तीसगढ़ की कोख में इतनी ताकत है कि वह राम जैसे भगवान को जन्म देती है’’। पवन दीवान जी के ऐसे सोच और विचार को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि कौशल्या माता हमारे छत्तीसगढ़ की बेटी है। हम कौशल्या माता का मंदिर बनाने की संत पवन दीवान की इच्छा को जरूर पूरा करेंगे। डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि आने वाले 6 महीने के भीतर ‘पवन दीवान सुरता ग्रंथ’ भी तैयार करने की योजना है, जिसमें संत दीवान जी के बारे में सभी लोगों की स्मृतियों को संकलित कर उस लेखबद्ध किया जाएगा। ज्ञातव्य है कि गत 2 मार्च को संत कवि पवन दीवान जी का निधन हो गया था।

क्रमांक-6056/स्वराज्य