Latest News

अन्नदाता ल झन बिसार संगी...!
 Posted on 10/04/2016
 

रायपुर, 10 अप्रैल 2016

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज आकाशवाणी से प्रसारित अपनी मासिक रेडियो वार्ता ’रमन के गोठ’ में कुछ श्रोताओं द्वारा भेजी गई उस छत्तीसगढ़ी कविता का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसमें गांव के सहज-सरल जीवन के महत्व को रेखांकित करते हुए गरीबी और अशिक्षा को दूर करने तथा ’अन्नदाता’ के रूप में किसान को नहीं भूलने की अपील की गई है। उन्होंने ग्रामीण श्रोताओं द्वारा भेजी गई कविता की इन पंक्तियों को ’रमन के गोठ’ की आठवीं कड़ी में सभी श्रोताओं को पढ़कर सुनाया-

गांव ले कर मया दुलार संगी, गांव चल, देख खेत खार संगी।
देख आमा बगईचा के शोभा, धान के खेत कोठार संगी।
तैं गरीबी ल अऊ अशिक्षा ल, खेदेबर गांव म हमर आ संगी।
गांव म हे दया मया अब्बड़, चार दिन तो इहां गुजार संगी।
गांव के अन्न खात हे दुनिया, अन्नदाता ल झन बिसार संगी।
गांव हर आत्मा ये भारत के, गांव ह लगही तिहार संगी।

यह कविता बेमेतरा जिले के ग्राम बदनारा-नवागढ़, कटई से मयंक रेडियो श्रोता संघ के सदस्यों- सर्वश्री नारायण प्रसाद वर्मा और चंद्रकांत वर्मा तथा शारदा वर्मा, सीमा और बबली वर्मा द्वारा भेजी गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा-एमन एकठन बहुत सुन्दर चिट्ठी भेजे हें, जेमा सुन्दर कविता लिखे हें। डॉ. रमन सिंह ने कहा-ये बात बिलकुल सही हावे वर्मा जी, गांवें म हमर भारत देश के आत्मा ह बसे हे। आपके ये बात ह सोलह आना सही आय। 


क्रमांक-226/स्वराज्य