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प्लास्टिक मनी का मतलब प्लास्टिक का नोट नहीं : डॉ. रमन सिंह : मुख्यमंत्री ने ‘रमन के गोठ’ में लोगों को कैशलेस लेनदेन के बारे में विस्तार से समझाया

तकनीकी शब्दों की भी सरल शब्दों में दी जानकारी

रायपुर, 11 दिसम्बर 2016

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज अपनी मासिक रेडियो वार्ता ‘रमन के गोठ’ में आम जनता को नगदी विहीन लेन-देन (कैशलेस ट्रांजेक्शन) के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जनता को कैशलेस लेन-देन के लिए दिए जा रहे विभिन्न तकनीकी विकल्पों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने प्लास्टिक -मनी, ई-बैकिंग, इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर, मोबाइल बटुआ अथवा ई-वालेट जैसे शब्दों के तकनीकी पहलुओं को भी सहज और सरल शब्दों में समझाया।  उन्होंने कहा -  ‘प्लास्टिक-मनी’ का मतलब प्लास्टिक से बना हुआ नोट नहीं है, बल्कि ऐसी प्रणाली है, जिसमें विभिन्न तरीकों के ‘स्मार्ट कार्ड’ के जरिए बैंकों या अन्य स्थानों पर नगद राशि के बदले आर्थिक लेन-देन हो। डॉ. रमन सिंह ने किसानों को विश्वास दिलाया कि प्रदेश की 1333 सहकारी समितियों के 1889 उपार्जन केन्द्रों में धान की आवक तेजी से हो रही है। धान बेचने पर उनके लिए ऑन लाईन भुगतान की व्यवस्था की गई है। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों को इसके लिए अब तक 600 करोड़ रूपए की नगद राशि दी जा चुकी है। आगे भी इसमें कोई समस्या नहीं आएगी। 
 मुख्यमंत्री ने कहा - बड़े पैमाने पर नगद लेनदेन के हिसाब-किताब छुपाने या नगद राशि की सुरक्षा उसके सदुपयोग या दुरुपयोग को लेकर अनेक समस्याएं आती हैं। उसका अनुभव सिर्फ भारत को ही नहीं, बल्कि पूरी दुिनया को होता है। माननीय प्रधानमंत्री जी प्रत्येक भारतीय नागरिक को यह सुविधा देना चाहते हैं, जो विकसित देशों के नागरिकों को उपलब्ध है। इसलिए उन्होंने कैशलेस ट्रांजेक्शन या नकद रहित लेन-देन को भारत में भी बढ़ावा देने का मन बनाया है। इस व्यवस्था में ज्यादातर प्लास्टिक से बना हुआ कार्ड उपयोग में आता है। इस तरह प्लास्टिक-मनी का शब्द लोकप्रिय हुआ। 
    प्लास्टिक मनी के संदर्भ में उन्होंने कहा -‘स्मार्ट कार्ड’ का उल्लेख मैंने इसलिए किया, क्योंकि हमने ‘प्रधानमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना’ और ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना’ आदि में नगद राशि का लेन-देन नहीं करके, एक ‘स्मार्ट कार्ड’ जारी किया है, जिसे लेकर जब कोई व्यक्ति अधिकृत अस्पताल में जाता है तो रूपए की तरह उस कार्ड का उपयोग वहां पर करता है। अर्थात् वह बिना नगद लिए अस्पताल जाकर अपना इलाज करा आता है, जिसमें प्लास्टिक का बने हुए ‘स्मार्ट कार्ड’ की भी जो प्रणाली है, वह नगदी लेन-देन का माध्यम बन जाती है। इसलिए इस व्यवस्था को ‘प्लास्टिक-मनी’ कहा जाता है। इसी तरह से ‘ई-बैंकिंग’ या ‘इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर’ होता है जब आप बैंक में ‘एटीएम कार्ड’ या ‘इंटरनेट’ के माध्यम से नगद रकम को हाथ लगाए बिना भी अपने बैंक एकाउंट में जमा रकम का लेन-देन न सिर्फ अपने गांव-शहर में बल्कि, दूसरे गांव या शहर में भी कर सकते हैं। 


आर्थिक व्यवहार में आज कल पांच शब्दों का चलन ज्यादा
मुख्यमंत्री ने कहा आर्थिक व्यवहार में प्रमुख रूप से पांच शब्द आजकल, बहुत चल रहे हैं। ये पांच शब्द, पांच तरीकों के बारे में बताते हैं जिससे हम नगद रूपए लेन-देन के बिना भी आर्थिक लेन-देन कर सकते हैं। डॉ. सिंह ने कहा - पहला शब्द यू.पी.आई. है। लगभग सभी बैंकों का अपना ‘यू.पी.आई. एप’ होता है। जिस बैंक में आपका खाता है उसका ‘यूपीआई-एप’ डाउनलोड करके खाताधारी अपने मोबाइल का उपयोग करते हुए किसी वस्तु की खरीदी या सेवा का उपयोग करने पर उसका भुगतान कर सकता है। इसके लिए आपके पास ‘स्मार्ट फोन’ होना चाहिए।दूसरा शब्द है- यू.एस.एस.डी.। यह साधारण फीचर वाले मोबाइल फोन से भी संभव है। अपने फोन में स्टार 99 हैश डायल करके, उसमें आए निर्देशों का पालन करते हुए अपने बैंक खाते से किसी भी दुकान में छोटी से छोटी राशि का भुगतान किया जा सकता है। उदाहरण के लिए- रायपुर में चाय दुकान चलाने वाले अजय यादव, सूरजपुर में ऐसा ही छोटा कारोबार करने वाले कैलाश देवांगन ने अपनी दुकान के लिए यह सुविधा ले ली है, जहां वे 5 से 10 रू. का भुगतान भी मोबाइल फोन के माध्यम से प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे युवाओं की सजगता को मैं सलाम करता हूं, जो समय के साथ चलना जानते हैं और उनके छोटे-छोटे कदम देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का आधार बनते हैं।
    डॉ. सिंह ने कहा- तीसरा शब्द प्री-पेड वॉलेट है, जिसे ‘ई-बटुआ’ कहते हैं। उदाहरण के लिए- स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया का ‘मोबाइल एप बडी’, काफी लोकप्रिय है। आपके बैंक एकाउंट से एक निश्चित राशि ट्रांसफर होकर आपके मोबाइल के खाते में जमा हो जाएगी। आप बिना किसी स्वाइप मशीन के सिर्फ अपने मोबाइल का उपयोग करके इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। चौथा शब्द कार्डस् पी.ओ.एस. अर्थात् पॉइन्ट ऑफ सेलडिवाइस है। इसके लिए अलग से कोई कार्ड लेने की जरूरत नहीं है, बल्कि आपको अपने बैंक से मिला एटीएम कार्ड, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड ही उपयोग में आता है। और पांचवां शब्द है- आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम। इसके लिए आपके बैंक खाते में आधार कार्ड की सीडिंग होना जरूरी है। यह सबसे सुरक्षित उपाय है, क्योंकि इसमें आपके अंगूठे के निशान व आधार नम्बर से ही भुगतान हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने श्रोताओं को बताया - छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्थापित किए जा रहे सामान्य सेवा केन्द्र अथवा उपभोक्ता सेवा केन्द्र में यह सुविधा दी जाएगी। बलरामपुर जिले में बड़ी पहल हुई है, जहां सामान्य सेवा केन्द्र अर्थात् सी.एस.सी. अब लोगों को बैंक की सेवाएं देने तैयार हैं। इसलिए मैं आप लोगों से आव्हान करता हूं कि जिन खाताधारकों ने अपने बैंक एकाउंट में ‘‘आधार सीडिंग’’ नहीं कराई है, वे लोग बैंक में जाकर एक बार आधार नम्बर नोट कर ले, तो उन्हें यह सुविधा अपने घर के पास और बहुत आसानी से मिलने लगेगी। सी.एस.सी. के बेहतर ढंग से काम करने पर आपको न तो बैंक जाने की जरूरत पड़ेगी न एटीएम। 
कैशलेस लेनदेन के लिए चुनाव प्रशिक्षण की तरह ट्रेनिंग
 डॉ. रमन सिंह ने बताया -छत्तीसगढ़ में कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए हम उस स्तर पर प्रशिक्षण देने जा रहे हैं, जैसा कि आम चुनाव के संचालन के लिए दिया जाता है, जिसमें अधिकारी-कर्मचारी से लेकर मतदाता तक को यह जानकारी मिल जाती है कि उसे किस तरह से वोट डालना है और किस तरह की सुरक्षा अपनाना है। हमने सभी बैंकों से कहा है कि वे अपने खाताधारकों को प्रशिक्षित करें कि वे किस तरह से एटीएम, इंटरनेट से भुगतान या इससे जुड़ी विभिन्न सुविधाओं का उपयोग करें।     मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि    राज्य शासन द्वारा अपने स्तर पर भी सभी पंचायतों में सामान्य सेवा केन्द्रों (कॉमन सर्विस सेंटरों) अथवा सी.एस.सी. या उपभोक्ता सेवा केन्द्र को सक्षम बनाया जा रहा है और इसके लिए प्रशिक्षित किए गए लोगों के माध्यम से गांव-गांव में प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है।
नगदी विहीन लेनदेन में सावधानी की भी जरूरत: डॉ. रमन सिंह
  मुख्यमंत्री ने कहा - निश्चित तौर पर ‘कैशलेस ट्रांजेक्शन’ या ‘नगद-विहीन लेन-देन’ में जितनी सुविधा है, उसी पैमाने पर सावधानी बरतने की जरूरत भी है। इसके लिए गांव हो या शहर, किसान हो या कारोबारी, महिला हो या पुरूष, बच्चे हो या जवान, हर स्तर पर लोगों को समझाना जरूरी है, ताकि वे सतर्कता के साथ नई सुविधाओं का उपयोग करें और किसी भी तरह की ठगी का शिकार नहीं होने पाएं। उन्होंने बताया -रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी बैंक अपने खाताधारक से फोन पर कोई जानकारी नहीं लेगा। इसलिए बैंक का नाम लेकर फोन करने वाले को कड़ाई से मना करने में कोई संकोच न करें। और ज्यादा अच्छा हो कि उससे बात ही न करें,  क्योंकि बातचीत में फंसाकर वे ऐसी जानकारियां निकलवा लेते हैं, जिससे आपको नुकसान हो सकता है। ऐसे उपायों के बारे में व्यापक तौर पर प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी की जा रही है।


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