logo-dark

Latest News

रमन के गोठ की 18वीं कड़ी : प्रकृति की किडनी हैं तालाब : डॉ. रमन सिंह : मुख्यमंत्री ने तालाबों को बचाने सभी लोगों से किया सहयोग का आव्हान

रायपुर, 12 फरवरी 2017

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने तालाबों को प्रकृति की किडनी बताते हुए जलाशयों की सुरक्षा पर विशेष रूप से बल दिया है। उन्होंने इसमें ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, सामाजिक संगठनों और सभी नागरिकों से सहयोग का आव्हान किया है। आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से आज प्रसारित अपनी मासिक रेडियो वार्ता ‘रमन के गोठ’ की 18वीं कड़ी में मुख्यमंत्री ने कहा - छत्तीसगढ़ में तालाबों की अपनी एक विशेष संस्कृति है। इसका ऐतिहासिक, धार्मिक और आर्थिक महत्व भी है जो स्थानीय आबादी की आस्था के साथ-साथ उसकी आजीविका से भी जुड़ता है। तालाबों की वजह से भू-जल स्तर बना रहता है। 
उन्होंने अपने रेडियो प्रसारण में छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए नागरिकों द्वारा किए जा रहे नये प्रयोगों (नवाचारों) की विस्तार से चर्चा की। गरियाबंद जिले के ग्राम रसेला (विकासखंड-छुरा) की महिलाओं द्वारा बड़ी-बड़ी कम्पनियों के मुकाबले में बनाए जा रहे सी.एफ.एल. बल्ब का भी मुख्यमंत्री ने आज की रेडियो वार्ता में उल्लेख किया और कहा कि जंगलों से घिरे इस अनजाने से गांव के महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं के इस कार्य को देखकर मैं खुद हैरत में पड़ गया। मुख्यमंत्री की मासिक रेडियो वार्ता की 18वीं कड़ी को भी विगत 17 कड़ियों की तरह शहरों और गांवों में लोगों ने उत्साह के साथ सुना।

परीक्षा के मौसम में बच्चों को तनावमुक्त रहने की समझाइश 

डॉ. सिंह ने परीक्षाओं के मौसम को ध्यान में रखकर छात्र-छात्राओं को तनावमुक्त रहने, परीक्षा का तनाव दूर करने के लिए पढ़ाई के बीच कुछ समय मिलने पर योग अभ्यास और हल्का फुल्का व्यायाम करने की समझाइश दी है। उन्होंने विद्यार्थियों को हिम्मत नही हारने की भी सलाह दी है। डॉ. सिंह ने बच्चों के माता-पिता और अभिभावकों का भी आव्हान किया है कि वे परीक्षा के दिनों में घर के वातावरण को शांत और सहयोगात्मक बनाकर बच्चों के साथ स्नेहपूर्ण व्यवहार करें। इस दौरान घर में कोई ऐसा आयोजन नही किया जाए जिसकी वजह से बच्चों को अलग रहना पड़े या उनका ध्यान भटक जाए। 
मुख्यमंत्री ने तालाबों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा - तालाबों के आस-पास पछियों का बसेरा होता है। साथ ही जैव विविधता का भी संरक्षण होता है। मछलियों के साथ कमल के फूल, सिंघाड़ा, जलकोचई आदि तालाबों के वरदान हैं जो स्थानीय लोगों के आमदनी का जरिया बनते हैं। इनके आस-पास औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती होती है। इस प्रकार तालाब प्रकृति के लिए ‘किडनी’ की तरह काम करते हैं। 

तालाबों के लिए बना वेटलैण्ड प्राधिकरण राज्य की वेटलैण्ड नीति भी जल्द बनेगी 

डॉ. सिंह ने कहा कि तालाबों के महत्व को देखते हुए राज्य सरकार ने वेटलैण्ड प्राधिकरण का गठन किया गया है और हम राज्य के वेटलैण्ड नीति बनाने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक डॉ. डी.के. मरोठिया द्वारा तालाबों के संरक्षण और वेटलैण्ड के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी प्रशंसा की। डॉ. रमन सिंह ने कहा- वेटलैण्ड का मतलब उस जमीन से है, जो तालाबों के विस्तार में लम्बे समय तक पानी में डुबी हुई हो। इस वजह से ऐसी जमीन की पहचान अलग से होती है। मुख्यमंत्री ने डॉ. डी.के. मरोठिया और उनकी टीम का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके द्वारा रतनपुर, दलपतसागर और कुटुम्बसर (बस्तर) की अद्भुत जलीय संरचनाओं को विश्व प्रसिद्ध ‘रामसर-साईट’ में जगह दिलाने की कोशिश की जा रही है, जो ऐतिहासिक महत्व के स्थानों को विश्व स्तरीय मान्यता दिलाती है।

 
रतनपुर के 160 तालाबों की प्रणाली उसे दिला सकती है 
‘लेकसिटी’ की अन्तर्राष्ट्रीय मान्यता 

मुख्यमंत्री ने कहा - रतनपुर में 160 तालाबों की प्रणाली है, जो उसे लेकसिटी के रूप में अन्तर्राष्ट्रीय मान्यता दिला सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक स्थान पर ऐसी अद्भुत संरचना दुनिया में केवल दो स्थानों पर है, इनमें से एक चीन में है और दूसरा हमारे छत्तीसगढ़ के रतनपुर में है। मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों के साथ-साथ प्रदेश के सामाजिक संगठनों और प्रत्येक जागरूक नागरिक से अपील की है कि वे जहां कहीं भी हों, वहां जलाशयों को सुरक्षित रखने में योगदान करें। जलाशयों के गहरीकरण और सौंदर्यीकरण पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाए। वहां सौर ऊर्जा से रौशनी की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा - वैसे भी गर्मी का मौसम नजदीक है, जिससे हमें जलाशयों की आवश्यकता का ज्यादा एहसास होता है। हमें यह काम एक निश्चित कार्ययोजना बनाकर करना चाहिए, ताकि इसका फायदा किसी एक मौसम में नही, बल्कि साल भर मिल सके। 

नहीं हो सकने वाले कार्य नये तरीके से हों यही नवाचार 

मुख्यमंत्री ने आज के अपने रेडियो प्रसारण में छत्तीसगढ़ में हो रहे विभिन्न नवाचारों (नये प्रयोगों) का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा - मैं ज्यादातर समय जनता के बीच रहता हूं, दूर-दराज के गांवों का दौरा करता हूं। लोगों के बीच बैठता हूं तो समस्याएं भी पता चलती है और समाधान के तरीके भी निकलते हैं। मुझे लगता है कि ‘नवाचार’ की सबसे अच्छी एप्रोच यही है कि जो कार्य नही हो पो रहा है, वह जल्द से जल्द किसी नये तरीके से हो जाए। उन्होंने कहा-उदाहरण के लिए जब हमने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी.डी.एस.) को ठीक करने के लिए कम्प्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) का उपयोग किया, तो एक नवाचार ही था। जब 20 हजार करोड़ रूपए की लागत से रेललाईन बिछाने का सवाल आया तो हमनें ऐसी तमाम संस्थाओं से बात की, जिनको उनसे लाभ मिलता है और वे सब सहमत हो गए, तो यह भी एक ‘नवाचार’ है कि राज्य सरकार का ज्यादा पैसा लगे बिना बहुत बड़ा काम हो गया। डॉ. रमन सिंह ने कहा - माननीय प्रधानमंत्री जी ने डी.एम.एफ. (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) के रास्ते खनिज बहुल जिलों के विकास के लिए भरपूर राशि की व्यवस्था की और हमने इसमें से दो-ढाई सौ करोड़ रूपए रेलवे लाईन बिछाने के लिए दे दिए, तो यह भी एक नवाचार है कि हम काम बनाने के लिए पैसे की व्यवस्था कैसे करते हैं। डॉ. रमन सिंह ने कहा - हमर छत्तीसगढ़ योजना, सौर सुजला योजना और लाइवलीहुड कॉलेज जैसे अनेक कार्य ‘नवाचार’ की देन है। उन्होंने कहा - मैंने अपने अधिकारियों को यह छूट दी है कि जनहित के लिए वे जो भी नये कदम उठा सकते हैं, जरूर उठाएं। आम जनता को जल्द से जल्द सुविधाएं देना ही हमारा लक्ष्य है। 

नवाचारों के कारण छत्तीसगढ़ को मिली पहचान और प्रतिष्ठा

मुख्यमंत्री ने कहा - नवाचारों के कारण छत्तीसगढ़ को अलग पहचान और प्रतिष्ठा मिली है। मैंने 26 जनवरी 2017 के अवसर पर जो नई घोषणाएं की है, वे भी ‘नवाचार’ के माध्यम से अभावों को जल्द से जल्द दूर करने की कोशिश है। इसी कड़ी में डॉ. रमन सिंह ने गांवों और वन क्षेत्रों में विशेष रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए शुरू की जाने वाली ‘मुख्यमंत्री मेडिकल फेलोशिप’ कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने ‘मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप’ का भी जिक्र किया। 

मीसाबंदियों को अब लोकतंत्र सेनानी के रूप में जाना जाएगा

डॉ. रमन सिंह ने कहा - हमनें इस बार गणतंत्र दिवस के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का मासिक मानदेय 15 हजार रूपए से बढ़ाकर 25 हजार करने की घोषणा की है। डॉ. सिंह ने कहा - देश में एक ऐसा दौर आया था, जब हमारा लोकतंत्र खतरे में पड़ गया था और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले जेल में डाल दिए गए थे, जिन्हें ‘मीसाबंदी’ के नाम से जाना जाता है। हमनें यह निर्णय लिया है कि ‘मीसाबंदियों’ को ‘लोकतंत्र सेनानी’ के रूप में जाना जाए और उनकी मानदेय राशि भी 50 से 66 प्रतिशत तक बढ़ा दी जाए। 

तेंदूपत्ता पारिश्रमिक में लगातार वृद्धि: इस बार 1800 रूपए 

डॉ. सिंह ने कहा तेन्दूपत्ता संग्राहकों को तेरह साल पहले सिर्फ 350 रूपए प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक मिलता था, जिसे क्रमशः बढ़ाते हुए हमने 1500 रूपए कर दिया और अब यह फैसला किया है कि नये सीजन में उनकी पारिश्रमिक दर 1800 रूपए प्रति मानक बोरा कर दिया जाए। इस प्रकार तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलने वाला पारिश्रमिक पांच गुना से ज्यादा कर दिया गया है। मैं सोचता हूं कि यह हमारे प्रेरणा सा्रेत पं. दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के सिद्धांतों को अमल में लाने और सार्थक बनाने का बहुत अच्छा उदाहरण है। डॉ. सिंह ने तेन्दूपत्ते की ऑनलाईन नीलामी ‘ई-नीलामी’ का जिक्र करते हुए कहा कि मेरी नजर में यह भी एक ‘नवाचार’ है, जो समाज के सबसे पिछड़े तबके की जिन्दगी बदल रहा है। हमने तेन्दूपत्ते के पूरे काम-काज को सुनियोजित किया है, ताकि इसका लाभ वनवासियों को मिले। ऐसा पहले नही होता था। हमने उनकी जिंदगी को आमदनी के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अवसर पर सूचना प्रौद्योगिकी से भी जोड़ा है। 

राजनांदगांव के उद्यानिकी कॉलेज में तैयार हुई स्ट्राबेरी की नई किस्म

डॉ. रमन सिंह ने अपनी रेडियो वार्ता में छत्तीसगढ़ के उन लोगों और संस्थाओं का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिनके द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में प्रयोग किए जा रहे हैं। डॉ. सिंह ने उनके नवाचारों की तारीफ की। उन्होंने राजनांदगांव के उद्यानिकी कॉलेज में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा यूरोपियन स्ट्राबेरी को छत्तीसगढ़ की मिट्टी में उपजाने के लिए नई किस्म तैयार किए जाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा - इस किस्म से एक एकड़ में लगने वाली स्ट्राबेरी से पांच लाख से दस लाख रूपए तक की आमदनी हो सकती है। सब्जी भाजी और अन्य उद्यानिकी फसलों की खेती करने वाले किसानों को स्ट्राबेरी की फसल लेने से काफी लाभ होगा। डॉ. सिंह ने कहा कि - भारत में आम तौर पर स्ट्राबेरी की खेती कश्मीर, शिमला और हिमाचल प्रदेश जैसे ठण्डे स्थानों पर होती है। मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के डॉ. ए.के. गेड़ा को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा ‘एमेरिटस सांइटिस्ट’ के पद पर चुने जाने पर खुशी जताई और कहा कि - लगभग 29 वर्ष बाद छत्तीसगढ़ के किसी वैज्ञानिक को यह सम्मान मिला है। डॉ. गेड़ा औषधीय पौधे - हड़जोड़ में मुख्य रासायनिक घटकों का अध्ययन करेंगे। हमारे यहां वैद्यों द्वारा ऐसी जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है, लेकिन उस पर कोई सुव्यस्थित शोध नही हुआ था। अब यह कार्य डॉ. गेड़ा करेंगे। 

अनजान से गांव में महिलाएं बना रही सी.एफ.एल. बल्ब: मुख्यमंत्री हैरत में

मुख्यमंत्री ने आज के अपने रेडियो प्रसारण में राज्य के गरियाबंद जिले के ग्राम रसेला (विकासखंड-छुरा) के महिला स्व-सहायता समूह द्वारा सी.एफ.एल. बल्ब बनाने की चर्चा करते हुए कहा - आम तौर पर राज्य के गांव-गांव में महिला समूहों द्वारा पापड़, बड़ी, अचार, अगरबत्ती, साबुन, ईंट, रेडिमेड कपड़े बनाने, उन्हें बाजार में बेचने और किराए पर खेत लेकर किसानी करने की खबरें तो बहुत दिनों से सुन रहे हैं, लेकिन जंगलों से घिरे इस गांव की महिलाओं के इस कार्य को देखकर मैं खुद हैरत में पड़ गया। इस अनजाने से गांव की महिलाएं ‘सी.एफ.एफ. बल्ब’ बनाती है और उसे उतनी ही ‘वारंटी’ देकर बेचती हैं, जितनी बड़ी-बड़ी कम्पनियां देती हैं। इतना ही नहीं, बल्कि रसेला गांव के सी.एफ.एल. बल्ब  बड़ी कम्पनियों की तुलना में काफी कम कीमत पर बेचे जाते हैं। इस गांव के सांई कृपा महिला स्व-सहायता समूह ने यह काम सीखा और वे एक दिन में सौ सी.एफ.एल. बल्ब असेम्बल कर लेती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा - मैं उनके आत्मविश्वास, हौसले और जज्बे को सलाम करता हूं। रसेला गांव में बनने वाला सी.एफ.एल. बल्ब गरियाबंद जिले के आश्रम विद्यालयों और छात्रावासों को रौशन कर रहा है। इस कार्य से महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों को अच्छी आमदनी हो रही है। 

रमन के गोठ में अपील: नया रायपुर के हाफ मैराथन में सब हों शामिल 

मुख्यमंत्री ने रमन के गोठ में सभी लोगों से नया रायपुर में पहली बार 19 फरवरी को होने वाले 21 किलोमीटर के राज्य स्तरीय हाफ मैराथन में शामिल होने का आव्हान किया। उन्होंने कहा इस हाफ मैराथन के अलावा दस, पांच, तीन, दो और एक किलोमीटर की दौड़ भी आयोजित की जा रही है। हाफ मैराथन दौड़ 13 समूहों में होगी, जिसमें कुल 30 लाख रूपए के पुरस्कार दिए जाएंगे। प्रथम पुरस्कार तीन लाख रूपए, द्वितीय पुरस्कार दो लाख रूपए, तृतीय पुरस्कार एक लाख रूपए, चौथा पुरस्कार पचास हजार रूपए, पांचवा पुरस्कार पच्चीस हजार रूपए का होगा। उन्होंने कहा - छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के अलावा इसमें राष्ट्रीय स्तर के प्रतियोगी भी शामिल होंगे। बालक-बालिकाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग वर्ग भी बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा- यह अवसर अपना जोश और अपनी फिटनेस दिखाने और अपनी सेहत और अपने विकास के लिए एकजुटता दिखाने का भी है। उन्होंने कहा - मैं चाहता हूं कि इसमें लोग बड़ी संख्या में शामिल हों। यह पहला अवसर ही इतना अच्छा और इतना सफल हो कि राष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान बने और आगामी वर्षों में बड़े-बड़े लोग इसमें शामिल होने आएं। 


 क्रमांक-5567/स्वराज्य