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राष्ट्र भाषा से होती है किसी भी देश की पहचान: डॉ. रमन सिंह : मुख्यमंत्री ने हिन्दी दिवस पर जनता को दी बधाई

13/09/2017

हिन्दी के विकास के लिए सभी लोगों से सहयोग की अपील

रायपुर, 13 सितम्बर 2017

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कल 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस के अवसर पर जनता को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी है। उन्होंने हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर आज यहां जारी बधाई संदेश में कहा है - किसी भी देश की पहचान वहां की राष्ट्रभाषा से होती है। हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा और राष्ट्रीय एकता की भाषा है। अनेकता में एकता वाली हमारी महान भारतीय संस्कृति में हर राज्य की अपनी समृद्ध भाषा और अपनी आंचलिक बोलियां हैं। इन सभी भाषाओं और बोलियों का अपना महत्व है। इन सबके बीच देश में व्यापक रूप से प्रचलित हिन्दी भाषा पूरे देश को एकता के सूत्र में बांधती है।
उन्होंने कहा - किसी भी भाषा को सशक्त और समृद्ध बनाने में जितना बड़ा योगदान उस भाषा के साहित्यकारों और कलाकारों का होता है, वहीं उस भाषा को बोलने और अपनी दिनचर्या में उसे शामिल करने वाली आम जनता का भी उसमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण योगदान रहता है। मुख्यमंत्री ने कहा - हिन्दी चूंकि हमारे संविधान की स्वीकृत राजभाषा है। इसलिए सरकारी काम-काज में इसका इस्तेमाल अनिवार्य रूप से करना चाहिए, वहीं राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी के विकास के लिए सबको अपने-अपने स्तर पर हर संभव प्रयास करना चाहिए। उन्होंने इसमें सभी लोगों से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा - 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के बाद देश की संविधान सभा में 14 सितम्बर 1949 को सर्वसम्मति से हिन्दी को भारत की राजभाषा का दर्जा देने का निर्णय लिया। इस ऐतिहासिक दिन को यादगार बनाने के लिए हर साल 14 सितम्बर को हम लोग हिन्दी दिवस मनाते हैं। 
डॉ. सिंह ने कहा - हिन्दी न सिर्फ हमारे देश में बल्कि जहां भी हमारे प्रवासी भारतीयों  और भारतवंशीयों की बसाहट है, ऐसे कई देशों कई देशों जैसे-मॉरिशस, फिजी, नेपाल, श्रीलंका, सूरीनाम, संयुक्त अरब अमिरात (दुबई), सहित हमारे पड़ोसी श्रीलंका, चीन, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, म्यानमार और दक्षिण पूर्वी एशिया के अनेक देशों सहित सुदूर इंग्लैंड, अमेरिका और आस्ट्रेलिया आदि राष्ट्रों में हिन्दी भाषा-भाषियों द्वारा इसे लोकप्रिय बनाया जा रहा है। सर्वेक्षण के अनुसार दुनिया के 40 से ज्यादा देशों के अनेक विश्वविद्यालयों और स्कूलों में हिन्दी भाषा की भी पढ़ाई हो रही है और चीनी भाषा मंदारिन के बाद हिन्दी दुनिया की दूसरे नम्बर की सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा के रूप में चिन्हांकित की है, जबकि अंग्रेजी तीसरे स्थान पर है।  


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